हरियाणा विधानसभा बजट सेशन, 10 अहम बातें
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा विधानसभा का बजट सत्र आज से शुरू हो चुका है। 17 मार्च को भाजपा सरकार अपना पहला बजट पेश करेगी। सरकार की सबसे बड़ी चुनौती कर्ज के बोझ को कम करने के साथ चुनाव में जनता से किए वादों पर खरे उतरने की है।
भाजपा श्वेत पत्र जारी करने के साथ कह रही है कि वह किसी पर दोषारोपण नहीं कर रही, लेकिन हरियाणा सरकार अब श्वेत पत्र जारी करना बंद कर जनता के हितों पर ध्यान दे।
केंद्र का बजट देश के लोगों को कड़वा घूंट पिलाने वाला था। अब प्रदेश सरकार अपने बजट में जनता को कड़वा घूंट पिलाने वाली है। इसके लिए पूरी तैयारी के साथ घाटे का रोना रोया जा रहा है।
कई मुद्दों पर हो सकते हैं कड़े फैसले
हरियाणा में नई सरकार ने अपना पहला बजट पेश करने से पहले श्वेत पत्र के जरिए जहां विपक्ष पर दबाव बनाने की रणनीति अपनाई है, वहीं आगामी बजट में संभावित कड़े फैसले लेने पर जनता की नाराजगी से बचने का प्रयास भी किया है।
प्रदेश पर भारी-भरकम कर्ज का हवाला देकर सरकार बजट में नए टैक्स ला सकती है और खर्चों में कटौती के लिए कई योजनाओं पर रोक भी लग सकती है।
दूसरी ओर, विपक्ष भूमि-अधिग्रहण, वैट दरों और डीजल के दाम में की गई वृद्धि पर सरकार को सदन में घेरने की तैयारी कर चुका है। ऐसे में पूरे बजट के दौरान सदन में श्वेत पत्र सरकार की ढाल बना रहेगा। श्वेत पत्र के जरिए प्रदेश की पूर्व सरकार को कठघरे में खड़ा कर दिया है।
जनता पर नए कर लग सकते हैं
नए वित्त वर्ष में हरियाणावासियों को नए करों का सामना करना पड़ सकता है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर खजाना खाली होने और प्रदेश पर भारी कर्ज का हवाला दे चुके हैं। सोमवार से शुरू हो रहे हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र से पहले सरकार ने खर्चों में कटौती करने और आय के नए साधन सृजित करने के संकेत दिए हैं।
वहीं, वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु के पास घटते राजस्व की भरपाई के लिए टैक्स के अलावा कोई और साधन भी नहीं है। प्रदेश में पूर्व हुड्डा सरकार की ओर से बीते दो वार्षिक बजटों में कोई कर नहीं लगाया गया। उस दौरान जो राजस्व घाटा बढ़ा, उसे पूरा करने के लिए सरकार कर्ज लेती रही।
स्थिति यह रही कि जीएसडीपी (सकल राज्य घरेलू उत्पाद) में कर राजस्व का प्रतिशत वर्ष 2004-05 के 7.8 फीसदी से वर्ष 2013-14 में घटकर 6.6 फीसदी रह गया। इस दौरान बढ़ते खर्चों ने प्रदेश के वित्तीय ढांचे को तहस-नहस कर दिया है। प्रदेश में वर्ष 2014-15 का कुल बजट लगभग 73 हजार 301 करोड़ का था, जिसमें राजस्व घाटा पांच हजार 13 करोड़ दर्शाया गया। तब हुड्डा सरकार ने राजस्व व्यय लगभग 52 हजार 702 करोड़ और राजस्व की उगाही करीब 47 हजार 690 करोड़ रुपये होने का अनुमान लगाया था।
फिर भी हुड्डा सरकार अपनी प्राप्तियों को गैर-योजना और तदर्थ व्यय के रूप में खर्च करती रही। अब प्रदेश में निजाम बदला और वर्ष 2015-16 के बजट में खट्टर सरकार के लिए एक बड़ा सिरदर्द बिजली और शिक्षा पर दी जा रही सब्सिडी राशि भी है। वर्ष 2013-14 के बजट में बिजली के लिए लगभग पांच हजार 338 करोड़ रुपये की राशि हुड्डा सरकार को रखनी पड़ी थी, जबकि शिक्षा क्षेत्र में प्रति छात्र लगभग 1300 रुपये खर्च किए गए।
दो हिस्सों में श्वेत पत्र जारी करना खास रणनीति
भाजपा सरकार द्वारा दो हिस्सों में जारी किए गए श्वेत पत्र में प्रदेश की वित्तीय हालत का जो नक्शा खींचा गया है, वह आर्थिक रूप से तहस-नहस हो चुके प्रदेश की झलक प्रस्तुत कर रहा है। श्वेत पत्र में सरकार ने बजट से पहले पूर्व सरकार के ‘हरियाणा नंबर वन’ के दावे को सिरे से खारिज करते हुए दावा किया है कि औसत विकास दर में पिछड़कर हरियाणा दसवें नंबर पर पहुंच चुका है।
मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर और वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की ओर से दावा किया गया है कि उनकी सरकार को खंडित अर्थव्यवस्था और खाली खजाना मिला है। बीते दस वर्षों से प्रदेश उधार लेकर ही चल रहा है। जिसकी वजह से आज प्रदेश के हर व्यक्ति पर 31,500 रुपये का कर्ज है।
वर्ष 2013-14 में दिसंबर माह तक प्रदेश पर कर्ज का बोझ 71,305 करोड़ था, जो चालू वित्त वर्ष में करीब 81 हजार करोड़ तक पहुंच चुका है। वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु साफ कर चुके हैं कि कांग्रेस के 10 वर्ष के शासन में अधिक कर्ज लेने, सार्वजनिक कर्ज बढ़ने और उसके फलस्वरूप ब्याज बढ़ने से प्रदेश की अर्थव्यवस्था चरमरा गई है।
घाटे में चल रहे हैं अधिकतर सरकारी उपक्रम
श्वेत पत्र के दूसरे भाग में भाजपा सरकार ने प्रदेश के सरकारी उपक्रमों की माली हालत के आंकड़े प्रस्तुत करके यह साबित करने का प्रयास किया कि लगभग सभी सरकारी उपक्रम घाटे में चल रहे हैं और यह घाटा इतना अधिक है कि कई बोर्ड व निगम बंद होने के कगार पर हैं।
इसके साथ ही सरकार ने यह दावा भी किया है कि इन्हें बचाए रखने और घाटे से उबारने के लिए पैसे की सख्त जरूरत है। श्वेत पत्र के दूसरे भाग में ही सरकार ने राजनीतिक बिसात बिछाते हुए हुड्डा सरकार पर विकास कार्यों में जिलों से भेदभाव करने का आरोप भी लगाया है।
हालांकि, भाजपा सरकार ने इसके लिए आंकड़े भी पेश किए हैं कि तीन जिलों रोहतक, झज्जर और सोनीपत पर हुड्डा सरकार ने जितना पैसा खर्च किया, उससे कम रकम राज्य के शेष जिलों को दी गई।
वोट के लिए किए वायदों में उलझी सरकार
भाजपा के घोषणा पत्र को निशाना बनाते हुए कांग्रेस आने वाले समय में पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोलेगी। भाजपा ने जो वादे किए थे वह तुरंत वोट बटोरने के लिए थे। आने वाला समय नौजवानों का है। नौजवानों में स्किल डेवलेपमेंट होना बहुत आवश्यक है। आगामी बजट में सरकार को स्किल डेवलपमेंट पर विशेष फोकस करना चाहिए।
किसानों के बोनस का प्रावधान बहुत ज्यादा जरूरी है। प्रदेश की जनता विकास कार्यों के लिए तरस रही है। सरकार ने सत्ता में आते ही चिट्ठी जारी करके यह कह दिया कि अग्रिम आदेशों तक सभी काम रोक दिए जाएं। अब विभाग अग्रिम आदेशों का इंतजार कर रहे हैं, जो अब तक नहीं हुए।
कांग्रेस सरकार ने स्वास्थ्य और शिक्षा को आगे बढ़ाने का बहुत प्रयास किया, लेकिन अभी इस सेक्टर को और आगे बढ़ना है। कांग्रेस ने प्रयास पूरे किए थे, लेकिन पूरी तरह से सफलता नहीं मिली। सरकार को चाहिए कि प्रदेश के विश्वविद्यालयों और मेडिकल कालेजों को सुधारा जाए।
गोहत्या के लिए सख्त होंगे सजा के प्रावधान
हरियाणा सरकार आगामी बजट सत्र में किसानों के लिए गो संवर्धन का विधेयक लाने जा रही है। प्रदेश में लंबे समय से चली आ रही गोतस्करी पर सरकार के इस कदम से कितना विराम लगेगा, यह बाद में पता चलेगा। फिलहाल, सरकार ने डिब्बा बंद गोमांस पर हरियाणा में पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का मन बना लिया है।
प्रदेश के कृषि मंत्री ओम प्रकाश धनखड़ ने इस बात के संकेत दिए हैं। पत्रकारों से बातचीत में धनखड़ ने कहा है कि पशुधन को देखते हुए किसानों के लिए गो संवर्धन बहुत जरूरी है। हम पहले की तुलना में कानून को मजबूत बना रहे हैं, जिससे गो हत्या पूरी तरह से बंद हो जाएगी। कानून के तहत सजा के प्रावधान सख्त किए जाएंगे।
गो तस्करी में प्रयुक्त होने वाले वाहन सरकार जब्त करेगी। हरियाणा की गोशालाओं में तीन लाख दो हजार गउएं हैं। राज्य में 400 गोशालाएं हैं। इनमें से 327 गोशालाएं पंजीकृत हैं, जबकि डेढ़ लाख गाय सड़कों और खेतों में घूम रही हैं। ऐसी गायों के लिए गो अभ्यारण्य बनाया जाएगा।
प्रदेश में कुछ गोशालाएं आत्मनिर्भर हैं, जबकि कुछ की स्थिति अच्छी नहीं है। उन्होंने कहा कि हमारा मुख्य मकसद गउओं को किसानों के घर तक पहुंचाना है। इसका भी प्रावधान किया जाएगा कि आर्थिक दृष्टि से गोपालन किसानों के लिए लाभकारी हो।
सरकार को चाहिए 20 हजार करोड़
सूत्रों के अनुसार, भाजपा सरकार यदि जनता पर बोझ बढ़ाने की नाराजगी के बचना भी चाहे तब भी उसे जीएसडीपी के मौजूदा प्रतिशत को बनाए रखने के लिए कम से कम 20 हजार करोड़ रुपये की जरूरत पड़ेगी। इतनी बड़ी राशि केवल नए टैक्स या पुराने टैक्सों को बढ़ाकर नहीं उगाही जा सकती, इसलिए भाजपा सरकार को भी मौजूदा खर्चों में कटौती करनी होगी।
हालांकि, इस साल केंद्र सरकार की ओर से इस साल वित्त आयोग की बैठक में लिए गए उस फैसले से प्रदेश सरकार को कुछ राहत मिलेगी, जिसमें केंद्र से राज्यों को मिलने वाली रकम में 10 फीसदी का इजाफा किया गया है। इसके अलावा सेंट्रल सेल्स टैक्स के मुआवजे के रूप में राज्य सरकार के 1100 करोड़ रुपये केंद्र के पास हैं।
वित्त मंत्री कैप्टन अभिमन्यु की नजर प्रदेश के प्राइमरी सेक्टर पर भी है, जहां रोजगार की उपलब्धता तो 51.3 फीसदी है, लेकिन राज्य के जीडीपी में वर्ष 2013-14 के दौरान उसका योगदान केवल 15.3 फीसदी ही रहा है। नए बजट में वित्त मंत्री प्राइमरी क्षेत्र में नौकरियों के मुकाबले बागवानी, डेयरी फार्मिंग जैसे उत्पादकता वाले क्षेत्रों को बढ़ावा देकर युवाओं को प्रोत्साहित कर सकते हैं।
नए के साथ मौजूदा उद्योगों को भी देनी होगी राहत
हरियाणा में उद्योगों को आने का न्योता दे रही खट्टर सरकार के सामने प्रदेश में मौजूद उद्योगों ने भी अपनी डिमांड रख दी है। वर्तमान में मौजूद उद्योगों को बजट में सरकार से वही राहत चाहिए, जो नए उद्योगों के प्रदेश में आने पर दी जाएगी। महंगी बिजली उद्योगों के लिए संकट का कारण बन चुकी है।
हरियाणा चेंबर आफ कामर्स एंड इंडस्ट्री के चेयरमैन विष्णु गोयल के मुताबिक हमने मांग रखी है कि मौजूदा उद्यम यदि प्रदेश में ही 50 प्रतिशत तक विस्तार करना चाहते हैं। तो उन्हें भी नए उद्योगों के मुताबिक लाभ दिए जाएं। नए उद्योगों को लाभ देने का वादा कर रही सरकार को पुराने उद्योगों को बचाने की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। हम फाइनेंशियल लाभ नहीं मांगते, लेकिन उद्योगों के लिए पेपर वर्क आसान किया जाए।
इंडस्ट्री केलिए बनाए गए नियम कायदे कानून सरल किए जाएं। उद्यमियों को सरकार को लीज पर जमीन देनी चाहिए, जिससे वे आगे चल कर उस जमीन को खरीदने की स्थिति में आ जाएं। उद्योगों के लिए ढांचा बढ़ाया जाए। गोयल के मुताबिक हरियाणा से सस्ती बिजली दरें पंजाब, हिमाचल, दिल्ली और चंडीगढ़ में हैं।
सरकार के सामने ये हैं मुख्य चुनौतियां
- पंजाब के समान वेतनमान का दावा किया था। अब कह रहे हैं कि पैसा नहीं है। आज भी 18,590 करोड़ विभिन्न बोर्ड और निगम के खजाने में बकाया हैं। 11 हजार करोड़ टाउन एंड कंट्री प्लानिंग को एक्सटर्नल डेवलपमेंट चार्जेस का वसूल करना है। साढ़े चार माह में क्यों नहीं कर सके।
- घोषणा पत्र के वायदे अब चुनौतियां बनकर उभर रहे हैं। उस समय जनता का आकर्षण का विषय बने वायदे अब पूरे करने होंगे। मान लिया कि स्वामीनाथन आयोग की रिपोर्ट केंद्र का विषया है, लेकिन लागत और बोनस तो प्रदेश सरकार भी दे सकती है।
- बुजुर्गों और विधवाओं को पेंशन देने का वायदा किया था, लेकिन यह पेंशन किश्तों में देने की घोषणा की थी, जबकि घोषणा पत्र में किश्तों का प्रावधान नहीं दिखाया था।
- नौ हजार रुपये प्रतिमाह बेरोजगारों को देने की बात की थी। इस वादे को पूरा करने के लिए सरकार ने अब तक क्या किया है।
- हरियाणा में बिजली के क्षेत्र में सुधार करना बड़ी चुनौती है। अभी तक कोई स्कीम लागू नहीं की गई है। बिजली बिलों के बकाया की वसूली की भी कोई रणनीति नहीं है।