टोल की टीसः सड़क पर गड्ढे, टोल वड्डे-वड्डे
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जिले के लोग चारों तरफ से टोल टैक्स से घिरे हुए हैं। कामकाज के लिए प्रतिदिन जिले के लोगों को चंडीगढ़-दिल्ली, मेरठ और यमुनानगर का सफर करना पड़ता है।
लोग व्यापारिक गतिविधियों के चलते अपने रिश्तेदारों को मिलने और मरीजों को इधर-उधर ले जाने के लिए इन रास्तों का उपयोग करते हैं, लेकिन आलम यह है कि जिस भी रोड पर करनाल वासी निकलते हैं उसे टोल टैक्स के रूप में भारी चपत लगती है।
यह चपत और भी दर्द का एहसास कराती है जब उसे सरकार की तरफ से इन सड़कों पर कोई सुविधा नहीं मिलती। शाम के समय वह घर लौटता है तो उसकी गाड़ी की हालत भी खस्ता हो जाती है। मेरठ रोड का आलम यह है कि उस सड़क पर जानवर भी नहीं चल सकते, लेकिन वहां पर भी सरकार टोल वसूल रही है।
करनाल के लोग चंडीगढ़, दिल्ली, यमुनानगर और मेरठ रोड पर लगभग 150 से 200 रुपये अतिरिक्त देते हैं। टोल टैक्स लगाने का कई बार विरोध हो चुका है, लेकिन विधायक और सांसद भी जनता का साथ नहीं देते।
दस साल से लोग इसका खामियाजा पैसे देकर भुगत रहे हैं। करनाल से चंडीगढ़ और दिल्ली जाना लोगों की मजबूरी है। चंडीगढ़ में सचिवालय और सभी सरकारी ऑफिस हैं। वहीं दिल्ली में मुख्यमंत्री सहित सांसद का निवास है।
ये हैं टोल टैक्स के रेट
कुरुक्षेत्र के गांव समानाबाहू के पास लगे टोल बैरियर पर एक कार के आने जाने का टैक्स 158 रुपये है। पानीपत टोल टैक्स पर कार के 30 रुपये लिए जाते हैं। इंद्री एरिया में एक तरफ के बड़े वाहनों पर 50 रुपये लिए जाते हैं।
मेरठ रोड स्थित टोल टैक्स पर एक तरफ के कार के 20 रुपये, कैंटर व ट्रक के 60 रुपये लिए जाते हैं। लोगों पर पहले डीजल पेट्रोल की मार है और ऊपर से टोल टैक्स देने से परेशान हैं।
समानाबाहू टोल बैरियर से डेढ़ अरब की कमाई
सूचना के अधिकार के तहत मिली एक जानकारी के अनुसार समानाबाहू टोल टैक्स से सोमा कंपनी हर साल एक से डेढ़ अरब रुपये के बीच में टोल इकट्ठा कर रही है। इतना ही रकम पानीपत टोल टैक्स से जमा होती है।
पहले सड़क बनाओ, फिर लो टोल
लोगों का मानना है कि मौजूदा टोल टैक्स की नीति सही नहीं है। सरकार को चाहिए कि वह इस प्रकार का करार तैयार करे कि पहले सड़क का निर्माण कार्य पूरा हो और उसके बाद सड़क पर टोल टैक्स लगाया जाए।
वरना जैसे लोग सिक्स लेन प्रोजेक्ट के द्वारा सताए जा रहे हैं भविष्य में भी ऐसा ही होगा। सड़क निर्माण कार्य के साथ टोल टैक्स लगाने की इजाजत नहीं देनी चाहिए।
सरकार की सहमति से लगता है टैक्स
सड़क या फ्लाईओवर का निर्माण कार्य पूरा करने की जिम्मेदारी कंपनी ले लेती हैं। उसके बदले सरकार से करार तय करती है कि वह कितने साल तक टोल टैक्स से वसूल करेंगी। यदि सरकार सहमति जता देती है तो वह अपना टोल टैक्स स्थापित कर लेती हैं।
एक्सपर्ट व्यू
नेशनल हाईवे नंबर एक पर (जालंधर-दिल्ली हाईवे) करनाल-कुरुक्षेत्र के बीच समाना बाहू में टोल बैरियर 11 मई 2009 से शुरू किया गया। 15 वर्ष तक फर्म द्वारा टोल टैक्स लेने का करार हो चुका है।
टोल बैरियर से गुजरने पर टैक्स में किसी प्रकार की कोई भी छूट केवल उन वाहनों को दी जाती है जिनका विवरण भारत सरकार के गजट नोटिफिकेशन में किया गया है।
-विपिन शर्मा, महाप्रबंधक (तकनीकी), भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण
प्रदेश की सड़कों की हालत किसी भी पैमाने पर टोल टैक्स के लायक नहीं है। प्रदेश भर में 45 प्रतिशत दुर्घटनाएं टूटी सड़कों के कारण होती हैं। अगर सरकार टोल वसूल करना चाहती है तो पहले सड़कों की हालत सुधारे। जालंधर-दिल्ली हाईवे के अधूरे प्रोजेक्ट हैं और कई टोल टैक्स लगा दिए गए हैं।
खासकर करनाल के लोग टोल टैक्स की मार सबसे ज्यादा झेल रहे हैं। हम नेशनल हाईवे अथॉरिटी, निर्माण कार्य करवा रही सोमा कंपनी व प्रशासनिक अधिकारियों को ज्ञापन सौंपकर फ्लाईओवर के चल रहे काम को जल्द से जल्द पूरा करवाने की मांग कर चुके हैं।
-जेके शर्मा, वरिष्ठ सर्वेक्षक, आईआरडीए, करनाल