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हरियाणा का फैसला : गुटबाजी, संगठन की कमी, बागी और भितरघात कांग्रेस को ले डूबे, मुद्दे भुनाने से चूक गई पार्टी

Wed, 09 Oct 2024 04:53 AM IST
दुष्यंत शर्मा सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, चंडीगढ़ Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 09 Oct 2024 04:53 AM IST
सार

केवल माहौल के भरोसे बैठी कांग्रेस पूरा चुनाव जनता के भरोसे छोड़ दिया। रही सही कसर गुटबाजी और संगठन की कमी ने पूरी कर दी। इसकी वजह से कांग्रेस बूथों पर कमजोर रही। टिकट नहीं मिलने वाले बागियों और नाराज नेताओं की भितरघात ने भी पार्टी के समीकरण बिगाड़ दिए।

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Haryana's decision: factionalism, lack of organization, rebellion and factionalism took Congress down.
पूर्व सीएम हुड्डा और सांसद कुमारी सैलजा - फोटो : Self

विस्तार

लोकसभा चुनावों के बाद से हरियाणा में कांग्रेस के पक्ष में बने माहौल को पार्टी चार महीने भी संभाल नहीं पाई। केवल माहौल के भरोसे बैठी कांग्रेस पूरा चुनाव जनता के भरोसे छोड़ दिया। रही सही कसर गुटबाजी और संगठन की कमी ने पूरी कर दी। इसकी वजह से कांग्रेस बूथों पर कमजोर रही। टिकट नहीं मिलने वाले बागियों और नाराज नेताओं की भितरघात ने भी पार्टी के समीकरण बिगाड़ दिए।

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दूसरी ओर, टिकट वितरण से लेकर तमाम मामलों पर हाईकमान की ओर से पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह को फ्री हैंड करने का फॉर्मूला भी उलटा पड़ गया। केवल जाट चेहरे को आगे किए जाने से प्रदेश की दूसरी बिरादरियों में इसके प्रति नाराजगी थी और लोगों ने इसे मतदान में जाहिर भी कर दिया। शीर्ष नेतृत्व भी शांत मतदाताओं के मूड को भांप नहीं पाया और यही भारी पड़ गया। कांग्रेस फिर सत्ता में आते-आते रह गई और दस साल का सूखा दूर करने में कामयाब नहीं हो पाई। 
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दूसरी ओर, कांग्रेस नेता शुरू से ही अति उत्साह में नजर आए। टिकटों में खूब देरी हुई और नामांकन के अंतिम दिन तक पार्टी टिकट वितरण करती रही। दिग्गज नेता अपने समर्थकों को टिकट दिलाने के लिए दस दिन तक दिल्ली में ही डेरा डाले रहे, जबकि भाजपा लगातार फील्ड में काम करने में जुटी रही। इसके अलावा, भाजपा की तरफ से चलाया गया दलित कार्ड भी काम कर गया। कुमारी सैलजा की जाति पर व्यक्तिगत टिप्पणी का भी गलत संदेश गया। भाजपा ने जाट और एससी वोट बैंक के गठजोड़ को तोड़ने के लिए आरक्षण के वर्गीकरण का फॉर्मूला दिया, जिससे कांग्रेस का वोट बैंक बंट गया।

कुमारी सैलजा और सुरजेवाला जैसे नेताओं की प्रचार से दूरी भारी पड़ी
कुमारी सैलजा और रणदीप सुरजेवाला विधानसभा चुनाव लड़ना चाह रहे थे, लेकिन हाईकमान ने इजाजत नहीं दी। इससे सैलजा खासी नाराज नजर आई। 12 दिनों तक प्रचार से दूर रहीं। इसको भाजपा ने जमकर मुद्दा बनाया और दलितों को अपनी ओर करने की कोशिश की। हाईकमान के आदेश के बाद सैलजा 10 से 15 सीटों पर ही प्रचार करने उतरीं। वहीं, रणदीप सुरजेवाला अपने बेटे आदित्य सुरजेवाला के क्षेत्र कैथल व चौधरी बीरेंद्र सिंह बेटे बृजेंद्र सिंह के क्षेत्र उचाना से बाहर ही नहीं निकल पाए। 

  • कैप्टन अजय यादव भी अपने बेटे के हलकों तक ही सीमित रहे। इससे संदेश गया कि हुड्डा ही कांग्रेस के सीएम के अगले चेहरे हैं। पहले से ही खेमों में बंटी कांग्रेस को इसका नुकसान हुआ है और पूरा दारोमदार हुड्डा पर आकर टिक गया। इसका गलत संदेश गया। पूरे चुनाव में भी कांग्रेसी दिग्गज नेता एकजुट नजर नहीं आए। राहुल गांधी ने जरूर कुमारी सैलजा और हुड्डा के हाथ मिलवाए, लेकिन दिल फिर भी नहीं मिल पाए।

दस साल, तीन प्रदेशाध्यक्ष...पर संगठन तक नहीं बना पाए
हरियाणा में कांग्रेस का दस साल से संगठन नहीं है। हालांकि, प्रदेशाध्यक्ष के तौर पर तीन अध्यक्ष आ चुके हैं। इनमें अशोक तंवर, कुमारी सैलजा से लेकर उदयभान तक शामिल हैं। गुटबाजी के चलते आज तक कांग्रेस अपने जिलाध्यक्ष और ब्लॉक अध्यक्ष भी तय नहीं कर पाई है। लोकसभा चुनाव से पहले हाईकमान को सूची भेजी गई थी, लेकिन आज तक हाईकमान इसे जारी करने की हिम्मत नहीं कर पाया है। संगठन नहीं होने के चलते कांग्रेस के बस्ते पकड़ने वालों तक की कमी रही।



मुद्दे भुनाने में भी कमजोर रही कांग्रेस
किसान, पहलवान और जवान का मुद्दा भी कांग्रेस भुनाने में नाकामयाब रही। भाजपा के पर्ची खर्ची के मुद्दे की काट तो दूर, कांग्रेस प्रत्याशी खुले तौर पर बयान देते रहे कि कोटे से नौकरियां मिलेंगी। इसका प्रदेशभर में गलत संदेश गया और भाजपा ने इसी मुद्दे को भुनाया। कांग्रेस मेरिट मिशन को लेकर कोई ठोस रणनीति नहीं बना पाई। वहीं, राहुल ने लोकसभा चुनावों की तर्ज पर ही संविधान के मुद्दे को भुनाने की कोशिश की, लेकिन यह फॉर्मूला इस बार नहीं चला।
दलितों पर हुए कांड का तोड़ नहीं निकाल पाई कांग्रेस : भाजपा ने कांग्रेस के दस साल के दौरान दलितों पर हुए मामले जनता को याद दिलाती रही। कांग्रेस प्रत्याशियों के पर्ची पर नौकरियां देने और अपने घर भरने के बयान भी कांग्रेस के लिए बड़ा घातक साबित हुए।

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