5 राज्यों में चुनावों का असरः अब नेताओं की गांवों में एंट्री बंद करेंगे हरियाणा-पंजाब के किसान
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पांच राज्यों में चुनावों के बाद किसानों का मूड सरकारों के खिलाफ और आक्रामक हो गया है। सरकार के साथ-साथ किसान अन्य राजनीतिक दलों को भी आगामी चुनावों में आड़े हाथों लेने की तैयारी में है। जिसके चलते आगामी लोकसभा चुनावों में किसान नेताओं का अपने गांवों में घुसना वर्जित करने वाले हैं। ये निर्णय राष्ट्रीय किसान महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लिया गया है।
इस बैठक में हरियाणा, पंजाब समेत अन्य राज्यों के किसान नेता शामिल रहे। राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में जहां किसानों की विभिन्न समस्याओं पर चर्चा की गई, वहीं निर्णय लिया गया कि आगामी चुनावों से पहले जो राजनीतिक दल शपथपत्र के साथ अपने लेटर हेड पर किसानों की मांगों को पूरा करने का पुख्ता वादा करेगा, वही गांव में घुस पाएगा। इसके लिए किसान नेता सभी गांवों में किसानों को लामबंद करेंगे। उल्लेखनीय है कि इस महासंघ के साथ विभिन्न प्रदेशों के 180 किसान संगठन जुड़े हुए हैं।
राष्ट्रीय किसान महासंघ की राष्ट्रीय कार्यकारिणी में लिया गया फैसला जहां सरकार पर दबाव बनाने को लेकर है, वहीं गांवों में नेताओं का प्रवेश वर्जित करने के लिए विभिन्न राज्यों के गांवों में 20 दिसंबर से अभियान छेड़ा जाएगा। जिसके अंतर्गत गांव-दर-गांव किसानों को इसके लिए तैयार किया जाएगा।
इस बैठक में हरियाणा से अभिमन्यु कोहाड़, पंजाब से जगजीत सिंह, मध्यप्रदेश के शिवकुमार कक्काजी, उत्तरप्रदेश के हरपाल चौधरी, कर्नाटक के शांता कुमार, आंध्रप्रदेश से पीएस मुरली बाबू, केरल से के वी बीजू, गुजरात से जयेश कुमार पटेल, महाराष्ट्र से श्रीकांत तराल एवं लक्ष्मण वांगे समेत अन्य किसान नेता उपस्थित रहे।
इन वादों को लेटर हेड पर लिखकर देना होगा
- किसानों को स्वमीनाथन आयोग के अनुसार उनकी फसल की लागत के आधार पर डेढ़ गुना लाभकारी मूल्य सी-2+50 प्रतिशत के हिसाब से भुगतान किया जाए व देश की सभी फसलों को क्रय करने की गारंटी का कानून बनाया जाए।
- देश के संपूर्ण किसानों को हर प्रकार के कर्ज से मुक्त किया जाए।
- फल, सब्जी व दूध का एमएसपी तय किया जाए।
- देश के सभी किसानों की न्यूनतम आय 18000 रुपये प्रति माह सुनिश्चित हो।
- शिक्षित ग्रामीण युवाओं के लिए रोजगार सुनिश्चित किया जाए।
चुनावों से पहले राजनीतिक पार्टियां बड़े-बड़े वादे करती हैं, लेकिन चुनावों के बाद वो वादे भूला दिए जाते हैं। देश का किसान इन राजनीतिक पार्टियों के बहकावे में हर बार आ जाता है। 20 दिसंबर से हरियाणा, पंजाब समेत अन्य राज्यों के गांवों में बैठकें आयोजित की जाएंगी। गांवों में किसान राजनीतिक पार्टियों को गांव में न घुसने देने का संकल्प पत्र पारित करेंगे व गांवों के प्रवेश द्वार पर राजनीतिक पार्टियों को चेतावनी देता हुआ यह बैनर लगा दिया जाएगा। - अभिमन्यु कोहाड़, प्रवक्ता, राष्ट्रीय किसान महासंघ।