एसीआर मामले में अशोक खेमका की बड़ी जीत, सरकार को नकारात्मक टिप्पणी हटाने के आदेश
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वरिष्ठ आईएएस अधिकारी अशोक खेमका की एसीआर में नकारात्मक टिप्पणी के मामले में सोमवार को हरियाणा सरकार को पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में करारा झटका लगा है। हाईकोर्ट ने खेमका की एसीआर में हरियाणा के मुख्यमंत्री द्वारा अंक कम करके की गई टिप्पणी को रद्द कर दिया। कोर्ट ने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज द्वारा दिए 9.92 अंकों को सही ठहराते हुए इन्हें बहाल करने के आदेश भी दिए।
जस्टिस राजीव शर्मा और जस्टिस कुलदीप सिंह की खंडपीठ ने सोमवार को अशोक खेमका की याचिका पर फैसला सुनाते हुए कहा कि हमारी राजनीतिक, सामाजिक और प्रशासनिक प्रणाली में ऐसी व्यावसायिक ईमानदारी को संरक्षित करने की जरूरत है।
खंडपीठ ने फैसले में लिखा कि यहां तक कि रिपोर्टिंग अथॉरिटी यानी हरियाणा के मुख्य सचिव ने भी अंकित किया है कि खेमका एक बुद्धिमान और अनुभवी अधिकारी हैं। उनकी ईमानदारी संदेह से परे है। कोर्ट ने कहा कि ऐसे ईमानदार अधिकारियों की संख्या बहुत तेजी से घट रही है, इन्हें संभालने की जरूरत है।
सीएम ने अंक घटाने का नहीं दिया कोई आधार
हाईकोर्ट ने फैसले में कहा कि मुख्यमंत्री ने भी एसीआर में अंक घटाते हुए यह स्वीकार किया है कि खेमका एक ईमानदार और सत्यनिष्ठ अधिकारी हैं। वे अपनी ईमानदारी के लिए देशभर में जाने जाते हैं। हाईकोर्ट ने यह भी कहा कि सीएम ने खेमका की एसीआर में अंक कम करते हुए इसका आधार भी नहीं बताया।
उन्होंने बस इतना लिखा कि खेमका के बारे में मंत्री ने बढ़ा-चढ़ा कर टिप्पणी की है। सीएम ने यह टिप्पणी भी 184 दिनों बाद की। यही नहीं खेमका ने जब अंक कम करने और उन पर की गई टिप्पणी को हटाए जाने के लिए रिप्रेजेंटेशन दी तो उस पर कोई निर्णय ही नहीं लिया गया।
यह है मामला
अशोक खेमका ने वर्ष 2016-17 के लिए जून 2017 में अपना अप्रेजल भरा था। अप्रेजल पर मुख्य सचिव डीएस ढेसी ने उन्हें 10 में से 8.22 अंक दिए। इसके बाद खेल एवं युवा मामलों के मंत्री अनिल विज के पास जब यह अप्रेजल पहुंचा तो उन्होंने 9.92 अंक देते हुए टिप्पणी दर्ज की कि कैबिनेट मंत्री के रूप में उन्होंने पिछले तीन वर्षों में 20 से अधिक आईएएस अफसरों के साथ काम किया और अशोक खेमका का काम बेहतर रहा है।
ऐसे ईमानदार अफसर युवा अधिकारियों के लिए प्रेरणास्रोत हैं। खेमका की यह अप्रेजल रिपोर्ट 31 दिसंबर, 2017 को जब मुख्यमंत्री के पास पहुंची तो उन्होंने अंक कम करके 9 कर दिए। इसके अलावा यह भी टिप्पणी की कि उनके बारे में मंत्री विज ने बढ़ा-चढ़ा कर लिखा है।
इसके खिलाफ खेमका ने कैट में याचिका दायर की। कैट ने उनकी याचिका खारिज कर दी। फिर वे हाईकोर्ट पहुंचे और सीएम की टिप्पणी रद्द करने के साथ ही 9.92 अंक बहाल कराने की मांग की। हाईकोर्ट ने याचिका पर सुनवाई करते हुए 12 मार्च को फैसला सुरक्षित रख लिया था।