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पंजाब-हरियाणा और यूटी में सहमति, FIR से गायब होगा जाति का कॉलम
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 15 Dec 2017 09:19 AM IST
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- फोटो : File Photo
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अपराध की स्थिति में दर्ज होने वाली एफआईआर में जाति और धर्म का उल्लेख न करने के लिए हरियाणा, पंजाब और चंडीगढ़ तैयार हो गए हैं। तीनों राज्यों ने बताया कि उन्होंने इसके लिए तैयारी भी आरंभ कर दी है।
पुलिस द्वारा किसी भी अपराध के आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते समय आरोपी की जाति लिखे जाने के नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी गई। इस दौरान हरियाणा सरकार व पंजाब सरकार ने ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके यहां एफआईआर में जाति, धर्म का कालम हटाने पर काम शुरू कर दिया गया है।
हालांकि सरकार की तरफ से कहा गया कि एससी/एसटी आदि के मामले में जाति धर्म लिखना जरूरी होगा। इस मामले में चंडीगढ़ ने कहा कि वो भी इस मामले में काम कर रहा है। लेकिन उसको इस बाबत कुछ समय दिया जाए। हाईकोर्ट ने समय देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
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एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने जनहित याचिका में कहा है कि, जब हमारा संविधान जातिवाद मुक्त तथा सभी धर्मों को बराबर का दर्जा देने वाला है, तो फिर एफआईआर में आरोपी और पीड़ित की जाति क्यों दर्ज की जाती है। पंजाब पुलिस रूल्स-1934 के नियमों में एफआईआर. दर्ज करते समय आरोपी और पीड़ित की जाति लिखे जाने का प्रावधान है।
अरोड़ा ने दायर याचिका में बताया है की यह प्रावधान संविधान के लिखे जाने के से पहले के हैं और अब यह प्रावधान न सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि संविधान की मूल भावना का भी उल्लंघन है।
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पुलिस द्वारा किसी भी अपराध के आरोपी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करते समय आरोपी की जाति लिखे जाने के नियम को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान यह जानकारी दी गई। इस दौरान हरियाणा सरकार व पंजाब सरकार ने ने हाईकोर्ट को बताया कि उनके यहां एफआईआर में जाति, धर्म का कालम हटाने पर काम शुरू कर दिया गया है।
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हालांकि सरकार की तरफ से कहा गया कि एससी/एसटी आदि के मामले में जाति धर्म लिखना जरूरी होगा। इस मामले में चंडीगढ़ ने कहा कि वो भी इस मामले में काम कर रहा है। लेकिन उसको इस बाबत कुछ समय दिया जाए। हाईकोर्ट ने समय देते हुए मामले की सुनवाई स्थगित कर दी।
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एडवोकेट एचसी अरोड़ा ने जनहित याचिका में कहा है कि, जब हमारा संविधान जातिवाद मुक्त तथा सभी धर्मों को बराबर का दर्जा देने वाला है, तो फिर एफआईआर में आरोपी और पीड़ित की जाति क्यों दर्ज की जाती है। पंजाब पुलिस रूल्स-1934 के नियमों में एफआईआर. दर्ज करते समय आरोपी और पीड़ित की जाति लिखे जाने का प्रावधान है।
अरोड़ा ने दायर याचिका में बताया है की यह प्रावधान संविधान के लिखे जाने के से पहले के हैं और अब यह प्रावधान न सिर्फ असंवैधानिक है बल्कि संविधान की मूल भावना का भी उल्लंघन है।