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हरियाणा में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की अब खैर नहीं, प्राधिकरण जल्द निपटाएगा 95% मामले
Thu, 22 Aug 2019 09:53 AM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 22 Aug 2019 09:53 AM IST
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- फोटो : फाइल फोटो
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हरियाणा में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों की अब खैर नहीं है। हरियाणा प्रदूषण अपीलीय प्राधिकरण ऐसे मामलों को लेकर तेजी दिखा रहा है। अभी तक प्राधिकरण ऐसे 95 प्रतिशत मामलों का निपटारा अपनी क्षमता-दक्षता के चलते कर चुका है। प्राधिकरण की कार्रवाई के चलते यह स्पष्ट है कि हरियाणा में प्रदूषण फैलाने वाली इकाइयों के खिलाफ तेजी से कार्रवाई की जा रही है और संबंधित अपीलीय प्राधिकरण में इस बाबत आने वाले केसों को भी जल्द निपटाया जा रहा है।
मालूम हो कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एसडी आनंद प्राधिकरण के हेड हैं। प्राधिकरण के सदस्य डॉ. सुखदेव कुंडू ने बताया कि अथॉरिटी में अपील के दायर होने के तुरंत बाद अगले कार्यदिवस पर ही उसकी सुनवाई शुरू कर दी जाती है। प्राधिकरण एक माह से भी कम समय में अपीलों का निपटारा कर देता है। यहां उल्लेखनीय है कि सभी फैसले सर्वसम्मति एवं निर्विवाद रूप से हुए हैं। केवल 4 से 5 प्रतिशत मामलों में ही राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) एवं उच्चतम न्यायालय में निर्णयों को चुनौती दी गई है।
उन्होंने बताया कि अपीलीय प्राधिकारी ने जब राज्य सरकार को लिखित में बताया कि बोर्ड का गठन सही ढंग से नहीं किया गया है तो प्रदेश सरकार द्वारा एचएसपीसीबी के सरकारी एवं गैर-सरकारी सदस्यों का पुनऱ् मनोनयन कर बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि हरियाणा की यह अपीलीय प्राधिकरण एक वैधानिक संस्था है और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), पंचकूला के मामलों में न्यायसंगत निर्णय ले मामलों का निपटारा करता है। जबकि मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) हरीश जीत सिंह (शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मैडल) एवं डॉ. सुखदेव कुंडू (पीएएचडी पर्यावरण विज्ञान) बतौर जज सदस्य हैं।
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अपीलीय प्राधिकरण की इस कार्यप्रणाली की चर्चा विधि एवं पर्यावरणीय विशेषज्ञों द्वारा 2018 में एक प्रतिष्ठित पेशेवर पत्रिका लॉ, एन्वायरमैंट एंड डिवैल्पमैंट जर्नल में लिखे गए एक लेख ‘भारत में प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत अपीलीय प्राधिकारी: शक्तियां, समस्याएं और क्षमता’ में भी किया जा चुका है। जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि इस राज्य अपीलीय प्राधिकरण को एक आदर्श रूप से प्रस्तुत किया गया है।
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मालूम हो कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश जस्टिस एसडी आनंद प्राधिकरण के हेड हैं। प्राधिकरण के सदस्य डॉ. सुखदेव कुंडू ने बताया कि अथॉरिटी में अपील के दायर होने के तुरंत बाद अगले कार्यदिवस पर ही उसकी सुनवाई शुरू कर दी जाती है। प्राधिकरण एक माह से भी कम समय में अपीलों का निपटारा कर देता है। यहां उल्लेखनीय है कि सभी फैसले सर्वसम्मति एवं निर्विवाद रूप से हुए हैं। केवल 4 से 5 प्रतिशत मामलों में ही राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) एवं उच्चतम न्यायालय में निर्णयों को चुनौती दी गई है।
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उन्होंने बताया कि अपीलीय प्राधिकारी ने जब राज्य सरकार को लिखित में बताया कि बोर्ड का गठन सही ढंग से नहीं किया गया है तो प्रदेश सरकार द्वारा एचएसपीसीबी के सरकारी एवं गैर-सरकारी सदस्यों का पुनऱ् मनोनयन कर बोर्ड का पुनर्गठन कर दिया गया। उल्लेखनीय है कि हरियाणा की यह अपीलीय प्राधिकरण एक वैधानिक संस्था है और हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (एचएसपीसीबी), पंचकूला के मामलों में न्यायसंगत निर्णय ले मामलों का निपटारा करता है। जबकि मेजर जनरल (सेवानिवृत्त) हरीश जीत सिंह (शौर्य चक्र, विशिष्ट सेवा मैडल) एवं डॉ. सुखदेव कुंडू (पीएएचडी पर्यावरण विज्ञान) बतौर जज सदस्य हैं।
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अपीलीय प्राधिकरण की इस कार्यप्रणाली की चर्चा विधि एवं पर्यावरणीय विशेषज्ञों द्वारा 2018 में एक प्रतिष्ठित पेशेवर पत्रिका लॉ, एन्वायरमैंट एंड डिवैल्पमैंट जर्नल में लिखे गए एक लेख ‘भारत में प्रदूषण नियंत्रण कानून के तहत अपीलीय प्राधिकारी: शक्तियां, समस्याएं और क्षमता’ में भी किया जा चुका है। जिसमें यह स्पष्ट किया गया है कि इस राज्य अपीलीय प्राधिकरण को एक आदर्श रूप से प्रस्तुत किया गया है।