फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Police will break the network of illegal weapons

Haryana: अवैध हथियारों के नेटवर्क पर होगा एक्शन, दूसरे प्रदेशों में स्ट्राइक से पीछे नहीं हटेगी हरियाणा पुलिस

Wed, 14 Sep 2022 10:30 AM IST
ajay kumar सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
सोमदत्त शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 14 Sep 2022 10:30 AM IST
सार

हरियाणा पुलिस के एक सीनियर आईपीएस अधिकारी मानते हैं कि मात्र एक प्रतिशत वारदात लाइसेंसी हथियारों से होती हैं। शेष 99 प्रतिशत वारदात में अवैध हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है।

विज्ञापन
Haryana Police will break the network of illegal weapons
हरियाणा पुलिस

विस्तार

गैंगस्टर्स और आतंकियों के संगठित होने पर अब हरियाणा पुलिस भी सतर्क हो गई है। प्रदेश में गैंगस्टरों की कमर तोड़ने के लिए हरियाणा पुलिस ने सबसे पहले अवैध हथियारों की आवक का नेटवर्क तोड़ने का लक्ष्य रखा है। इसके तहत अब पुलिस अवैध हथियार रखने वालों की गिरफ्तारी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि उनसे पूछताछ के आधार पर तस्करों से लेकर अवैध हथियार बनाने वाली फैक्ट्रियों तक भी पहुंचेगी। 

विज्ञापन


पहली बार पुलिस प्रदेश के बाहर दूसरे राज्यों में चल रही अवैध फैक्ट्रियों पर भी कार्रवाई करेगी। जहां से हरियाणा में अवैध हथियार सप्लाई किए जा रहे हैं। इसके लिए हरियाणा पुलिस ने पूरा खाका तैयार कर लिया है। प्राथमिक चरण में पुलिस ने आंकड़ों के आधार पर उन फैक्ट्रियों की सूची बनानी शुरू कर दी है, जहां से अवैध हथियार भेजे जा रहे हैं। इसके अलावा गैंगस्टरर्स और हथियारों के तस्करों को भी पुलिस ने निशाने पर लिया है। 
विज्ञापन


प्रदेश में अवैध हथियारों की बढ़ती खपत को लेकर खुद सूबे के मुख्यमंत्री मनोहर लाल और गृह मंत्री अनिल विज गंभीर हैं। पिछले सप्ताह आठ सितंबर को सीएम मनोहर लाल ने डीजीपी पीके अग्रवाल, सीआईडी चीफ आलोक मित्तल, एडीजीपी ओपी सिंह समेत फील्ड के आईजी संग बैठक कर अवैध हथियारों की आवक पर रोक लगाने और सख्त रणनीति बनाने का निर्देश दिया है। 

विज्ञापन
विज्ञापन

बैठक में एक बिंदु ये भी आया था कि हरियाणा में अधिकतर उत्तर प्रदेश, बिहार और मध्य प्रदेश में चल ही अवैध फैक्ट्रियों से हथियारों की तस्करी हो रही है। इसके बाद तय हुआ कि अगर कोई व्यक्ति अवैध हथियार के साथ पकड़ा जाता है तो केवल उसके खिलाफ कार्रवाई करके केस बंद नहीं करना है, बल्कि उससे तस्करों और फैक्टरी के बारे में जानकारी हासिल तक पूरे रैकेट को ही तोड़ना है। अगर इसके लिए पुलिस को पड़ोसी राज्यों में भी दस्तक देनी पड़े तो वह संबंधित राज्यों की पुलिस से समन्वय स्थापित कर कार्रवाई करेगी।

99 प्रतिशत वारदात में अवैध हथियारों का इस्तेमाल
पिछले काफी समय से हरियाणा में अपराध बढ़ रहे हैं। एनसीआरबी की रिपोर्ट भी इसकी पुष्टि कर रही है। यूपी में बदमाशों के खिलाफ चलाए जा रहे सख्त अभियान के चलते बदमाश हरियाणा में शरण ले रहे हैं। हरियाणा पुलिस के एक सीनियर आईपीएस अधिकारी मानते हैं कि मात्र एक प्रतिशत वारदात लाइसेंसी हथियारों से होती हैं। शेष 99 प्रतिशत वारदात में अवैध हथियारों का इस्तेमाल किया जाता है। 18 जुलाई और 6 सितंबर को पुलिस द्वारा चलाए गए ऑपरेशन आक्रमण में ही 200 से अधिक अवैध हथियार बरामद किए गए थे। हथियारों की सप्लाई तोड़ने के लिए प्रदेश की सीमावर्ती इलाकों में जांच बढ़ाई जाएगी।

यहां से आते हैं हथियार
प्रदेश में यूपी के बुलंदशहर, जेवर, अलीगढ़, मथुरा, मेरठ, शामली, कैराना और बिहार के मुंगेर और मध्य प्रदेश व अन्य स्थानों से अवैध हथियार आते हैं। वहीं, प्रदेश में अवैध हथियारों की सबसे अधिक खपत पलवल, मेवात, रोहतक, सोनीपत और भिवानी में होती है। इन्हीं जिलों में गैंगस्टर अधिक सक्रिय हैं और वो अपने गुर्गों के जरिये वारदात को अंजाम दिलाते हैं। शौक और अपराध के लिए ये आसानी से उपलब्ध है और 5 से 10 हजार रुपये में मिल जाते हैं। इसलिए अवैध हथियारों की खपत ज्यादा है।
 

हरियाणा में बदमाशों के लिए कोई जगह नहीं है। अवैध हथियारों के पूरे रैकेट को ध्वस्त किया जाएगा। इसके लिए पुलिस विशेष रणनीति के तहत काम कर रही है और तस्करों को काबू कर हथियार बरामद किए जा रहे हैं। - अनिल विज, गृह मंत्री। 

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed