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संत रामपाल की 'सरहद' में फेल हुआ पुलिस ऑपरेशन

Wed, 19 Nov 2014 09:04 AM IST
राजेश सैनी/अमर उजाला, हिसार
राजेश सैनी/अमर उजाला, हिसार Updated Wed, 19 Nov 2014 09:04 AM IST
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haryana police failure in sant rampal issue

संत रामपाल को पुलिस मंगलवार को भी गिरफ्तार नहीं कर पाई। पूरा दिन पुलिस प्रशासन और अनुयायियों के बीच हिंसक झड़पें चलती रहीं। मारपीट हुई, अनुयायियों ने बंदूक, रिवॉल्वर और राइफल से से गोलियां चलाईं, पेट्रोल बम फेंके, पत्थरबाजी की, तेजाब से भरी बोतलें फेंकी और कहीं-कहीं पर पुलिसकर्मियों को पीटा भी।

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लेकिन अनप्लांड ऑपरेशन में उतरी पुलिस सिर्फ अपना बचाव ही करती नजर आई। जैसे-जैसे अनुयायी हिंसक होते जा रहे थे पुलिस सिर्फ आंसू गैस के गोले फेंककर उन्हें नियंत्रित करने का प्रयास कर रही थी।
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पूरे दिन की गतिविधि में पुलिस कहीं भी आक्रामक नजर नहीं आई और सबसे बड़ी बात तो यह कि उनकी आपस में ही मारपीट हो। यमुनानगर के एसपी की कुछ पुलिसकर्मियों ने पिटाई भी कर दी।

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बिना प्लानिंग के बोला धावा

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पुलिस की कोई प्लानिंग नहीं थी। जवानों को कौन लीड करेगा। किस तरफ से आश्रम के अंदर प्रवेश करना है। पेट्रोल बम, पत्थरबाजी और तेजाब से कैसे बचना है। अनुयायियों की गोलियों से कैसे बचा जाए, इसका कोई प्लान नहीं था।

जब पुलिस आश्रम के सामने पहुंची तो करीब 50-60 अनुयायियों ने उन्हें उकसाया। अपने ऊपर उन्होंने जब तेल डालकर आत्मदाह की धमकी दी तो अचानक पुलिस ने धावा बोल दिया। उधर, अनुयायियों ने उन पर पेट्रोल बम और फायरिंग शुरू कर दी। शुरुआत में ही आश्रम के सामने खड़े पुलिस के दर्जनों जवानों पर फेंके गए पेट्रोल बम व गोलियों के छर्रे लगे।

बख्तर बंद गाड़ियों का नहीं हुआ प्रयोग
पुलिस पूरा दिन अपने आपको बचाने में ही लगी रही। अनुयायियों का सामना करने के लिए पुलिस ने बख्तरबंद गाड़ियों तक का प्रयोग नहीं किया। पुलिस के पास जो शील्ड थी, वह भी कमजोर थी। अनुयायियों द्वारा फेंके जाने वाले पत्थर शील्ड को तोड़कर जवानों को चोट पहुंचा रहे थे। अनुयायियों के पास जो डंडे थे, वो पुलिस के डंडों से मजबूत थे।

प्रेशर के साथ नहीं फेंक पाई मशीनें पानी की बौछारें

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प्रशासन ने अनुयायियों को हटाने के लिए जिस तरह पानी फेंकने वाली मशीनों का प्रयोग किया, उनका अनुयायियों पर कोई असर नहीं था। इन मशीनों का प्रेशर नाम मात्र था। गेट के सामने बैठी महिलाएं भी पानी की बौछारों से नहीं हटीं। बार-बार पानी फेंकने वाली अनेक गाड़ियां इधर-उधर जाती रहीं, लेकिन अनुयायियों पर उनका कोई असर दिखाई नहीं दिया।

आंसू गैस के गोले की निकाली काट
आश्रम में अनुयायियों को हटाने के लिए पुलिस ने जो आंसू गैस के गोले दागे तो अनुयायियों ने उसकी भी काट निकाल ली। अनुयायियों ने अपने पास गीले कपड़े रखे हुए थे। जब पुलिस की तरफ से आंसू गैस के गोले दागे जाते, अनुयायी गीले कपड़े अपने चेहरों पर ढक लेते। अनुयायी इतने ट्रेंड थे कि उन्हें पुलिस से ज्यादा बचाव के तरीके पता थे और जवाबी कार्रवाई भी कर रहे थे।

पुलिस नहीं कर पाई कोई प्रबंध

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अमर उजाला ने खबर प्रकाशित कर पहले ही बता दिया था कि अनुयायियों के पास पेट्रोल बम व तेजाब की बाल्टियां हैं। इसके बावजूद भी पुलिस कोई बचाव व इनको नाकाम करने के लिए कोई प्रबंध नहीं कर पाई। संत के अनुयायियों ने उसी ढंग से हमला बोला। जब पुलिस आगे बढ़ी तो उन्होंने पेट्रोल बम व पत्थर फेंकने शुरू कर दिए।

आरएएफ व सीआरपीएफ को नहीं दिया मोर्चा
संत की गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही पुलिस इसलिए भी नाकाम रही कि उनकी प्लानिंग में आरएएफ व सीआरपीएफ कहीं दिखी ही नहीं। वह सिर्फ सफेद हाथी बने खड़े रहे। शुरूआत से ही पुलिस जवान भिड़ते रहे। आरएएफ व सीआपीएफ के जवान कई मीटर दूर आश्रम के चारों तरफ घेरा बनाकर खड़े रहे।

एसपी, आइजी की अपील बेकार
एसपी व आईजी बार बार जवानों को आगे आकर मोर्चा संभालने की अपील करते रहे लेकिन जवान आगे नहीं आए। कई बार ऐसा मौका भी आया कि अनुयायी उन पर हावी रहे और जवान उनके सामने आगे होकर दौड़ पड़े।

पुलिसकर्मियों ने एसपी यमुनानगर को पीटा

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ऑपरेशन के दौरान पुलिसकर्मी आपस में ही भिड़ गए। आश्रम के अनुयायियों पर कार्रवाई के दौरान किसी बात को लेकर यमुनानगर के एसपी ने गुस्से में आकर अपने एक सिपाही व इंस्पेक्टर को थप्पड़ जड़ दिया। जवाब में जवानों और इंस्पेक्टर ने भी उनको पीटना शुरू कर दिया। इसके बाद किसी तरह एसपी वहां से जान बचाकर भागे। तो जवान उनके पीछे दौड़ पड़े।

एसपी ने डबवाली ने भी पुलिस की एक गाड़ी में घुसकर जान बचाई। शाम करीब पांच बजे जब एसपी यमुना नगर व इंस्पेक्टर की आपस में मारपीट हुई तो अचानक भगदड़ मच गई। वहां मौजूद फोर्स को यह समझ नहीं आया कि आखिर पुलिस कर्मी एक दूसरे के पीछे कैसे भाग रहे हैं। उन्होंने सोचा की पुलिस पीछे हट रही है। इसलिए सैकड़ों पुलिस जवान अपनी अपनी गाड़ियों में भरकर बिना उच्च अधिकारियों को बताए ही पीछे हट गए। आपॅरेशन के दौरान पुलिस कर्मचारी एक दूसरे को गालियां देते भी नजर आए।

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