SC का झटकाः हरियाणा पंचायत चुनाव स्थगित
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हरियाणा सरकार को बड़ा झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने पंचायत चुनाव स्थगित करने का फरमान सुनाया है। अब सुप्रीम कोर्ट की अगली सुनवाई तक चुनाव प्रक्रिया रुकी रहेगी। सुनवाई 7 अक्टूबर को है। कोर्ट ने कहा है कि सुनवाई के बाद नया नोटिफिकेशन जारी करके फिर से प्रक्रिया शुरू की जाए।
बता दें कि पंचायत चुनाव में शैक्षणिक योग्यता लागू करने का मामला सुप्रीम कोर्ट मे चल रहा है। कोर्ट ने सरकार को आज शैक्षणिक योग्यता पर अपना रुख स्पष्ट करने को कहा था। सरकार की ओर से कोर्ट में अटॉनी जनरल ने पेश्ा हुए।
सरकार ने स्पष्ट किया कि वह शैक्षणिक योग्यता की शर्त नहीं हटा सकती। जिसके बाद कोर्ट ने यह फैसला सुना दिया। बता दें कि बीते पांच दिन में इस मामले की तीन सुनवाई हो चुकी हैं। सोमवार को कोर्ट ने सरकार के संशोधन को नकार दिया था।
पंचायती राज में संशोधन कर लगाई थी शर्त
जून महीने में हरियाणा सरकार ने पंचायती राज 1994 में संशोधन कर सामान्य वर्ग के लिए 10वीं पास और अनुसूचित जाति के उम्मीदवार के लिए 8वीं पास की शर्त लगा दी थी।
इस पर हाल ही में गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा प्रदेश सरकार से चार सप्ताह में जवाब मांगा था, वहीं सरकार ने अगले ही दिन सुप्रीम कोर्ट में इस मामले में अर्जी लगाई थी। इसके बाद तय सोमवार की सुनवाई में हरियाणा सरकार को सुप्रीम कोर्ट से कोई राहत नहीं मिली।
साफ तौर पर कहा गया कि या तो चुनाव रोके जाएं या फिर पुराने नियमों के आधार पर चुनाव कराने होंगे। इस पर हरियाणा सरकार की तरफ से इसी सप्ताह कोर्ट में अपना जवाब दाखिल करने को कहा गया था।
मंगलवार को हरियाणा सरकार की तरफ से कहा गया कि इस चुनाव को चार सप्ताह के लिए टाल देना ही बेहतर है। तब तक सुप्रीम कोर्ट का अंतिम फैसला आ जाएगा, लेकिन संशोधन करके लगाई गई शर्तों को नहीं हटाया जाएगा।
यह बात भी वर्णनीय है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद प्रदेश में पढ़े-लिखे और अनपढ़ दोनों वर्गों से 94128 नामांकन दर्ज करवा चुके हैं, जिनकी आज छंटनी होनी है। साथ ही दूसरे चरण का नामांकन भी शुरू होना था। अब यह सारी प्रक्रिया रोक दी गर्ठ है।
सुप्रीम कोर्ट ने इसी सवाल पर दिया था स्टे
इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने हरियाणा सरकार को नोटिस जारी करके 22 सितंबर का अपना पक्ष रखने को कहा था। सुप्रीम कोर्ट ने कमलेश की याचिका पर स़ुनवाई करते हुए स्टे लगाया था। दो बार चुनाव लड़ चुकी कमलेश को उम्मीद है कि सुप्रीम कोर्ट उनके हक में फैसला 83 प्रतिशत दलित महिलाओं को चुनाव लड़ने के लिए राहत प्रदान करेगा।
कमलेश कैमरी ने कहा कि अगर कोई पढा लिखा नहीं तो क्या वह काम नहीं कर सकता। समाज के काम करने के लिए पढा लिखा ही बेहतर हो सकता है क्या। ऐसे में तो अब सरपंच भी सरकार ही चुनेगी। यही सवाल उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में अपनी वकील कीर्ती सिंह के जरिए रखे। जिस पर सुप्रीम कोर्ट ने स्टे आर्डर जारी किए हैं।
कमलेश ने कहा वह दो बार चुनाव लड़ चुकी है। वर्ष 2004 में सरपंच पद का और पिछली बार ब्लाक समिति सदस्य का चुनाव लड़ा था। ब्लाक समिति सदस्य का चुनाव वह करीब 15 वोटों से हार गई थी। इस बार उन्हें जीत की पूरी उम्मीद थी। क्षेत्र के लोगों ने उन्हें पंचायती उम्मीदवार बनाने का फैसला लिया था। नई शर्तों के चलते वह नामांकन की दौड़ से ही बाहर हो गई।
पिछले पंद्रह साल से समाजसेवा कर रही हूं। सरकार ने आनन फानन में ऐसी शर्त तय कर दी जिससे दलित वर्ग की 83 प्रतिशत महिलाएं चुनाव की दौड़ से बाहर हो गई। सामान्य वर्ग की 71 प्रतिशत महिलाएं चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। सामान्य वर्ग के 55 प्रतिशत लोग चुनाव प्रक्रिया से बाहर हो गए हैं।
वेदवंती ने भी दी थी चुनौती....
इससे पहले हाईकोर्ट में हिसार के मुकलान गांव की 7 वीं पास वेदवंती देवी ने चुनाव लडने के लिए शैक्षिक योग्यता की शर्त के फैसले को चुनौती दी थी। जिसमें हाईकोर्ट से राहत नहीं मिल सकी। उस मामले में अगली सुनवाई 8 अक्तूबर है।
पहली बार बड़े बदलावों के साथ होंगे चुनाव
हरियाणा में पहली बार कई बड़े बदलावों के साथ चुनाव हो रहे थे। ऐसे में शैक्षणिक योग्यता के मामले ने सब बिगाड़ दिया। इस बार सरपंच व जिला परिषद के सदस्यों के लिए मतदान इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन (ईवीएम) से करवाया जाएंगे, जबकि पंचों व पंचायत समिति के सदस्यों के लिए मतदान में बैलेट पेपर का प्रयोग किया जाएगा।
राज्य में कुल 21475 मतदान केंद्र बनाए गए हैं, जिनमें 4123 संवेदनशील और 4265 अतिसंवेदनशील केंद्र घोषित किए गए। चुनाव प्रक्रिया संपन्न करवाने के लिए एक लाख से अधिक कर्मचारियों को चुनाव ड्यूटी पर लगाया जाएगा। चुनाव आयुक्त राजीव शर्मा ने बताया कि पहली बार पंचकूला व रेवाड़ी जिलों में पंचायत समिति के सदस्यों के लिए भी चुनाव में इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीन का प्रयोग किया जाएगा।
कुल 46 हजार 500 इलेक्ट्रोनिक वोटिंग मशीनों का प्रबंध किया गया। जिला सोनीपत में जिला परिषद के चुनाव फिलहाल नहीं करवाए जा रहे, क्योंकि सोनीपत में नगर निगम बन जाने के बाद कुछ गांव नगर निगम में शामिल हो गए हैं। ऐसे में जिला परिषद के लिए नए सिरे से वार्डबंदी होगी।
सी प्रकार जो गांव नगर निगम में शामिल हुए हैं, वह सोनीपत के 8 ब्लॉक में से 3 ब्लॉक के गांव हैं। इन ब्लॉक में राई, मुरथल व सोनीपत शामिल हैं। अत: इन तीन ब्लॉक में ब्लॉक समिति के सदस्यों का चुनाव भी नहीं होंगे क्योंकि ब्लॉक समितियों की भी नए सिरे से वार्डबंदी होनी है।
इससे अलग सोनीपत जिले के 5 ब्लॉक में पंचायत समिति और उन गांवों को छोड़कर जो नगर निगम में शामिल हुए हैं, शेष गांवों में पंच और सरपंचों के चुनाव करवाए जाएंगे। उधर, हरियाणा प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष डॉ. अशोक तंवर ने कहा कि पंचायत चुनाव को लेकर टालमटोल करने वाली भाजपा को सबक सिखाने के लिए प्रदेश की जनता के पास अब एक बेहतरीन अवसर है।
ये था पंचायत चुनाव का शेड्यूल
चुनाव कार्यक्रम------------------पहला चरण----------दूसरा चरण-------तीसरा चरण
आवेदन आमंत्रित-----------------9 सितंबर-----------16 सितंबर----------24 सितंबर
नामांकन पत्र दाखिल करना--------15-19 सितंबर------22-29 सितंबर------1-7 अक्तूबर
नामांकन पत्रों की जांच-------------21 सितंबर----------30 सितंबर---------8 अक्तूबर
नामांकन वापसी-------------------24 सितंबर----------3 अक्तूबर---------10 अक्तूबर
चुनाव चिह्न आवंटन---------------24 सितंबर----------3 अक्तूबर----------10 अक्तूबर
पद-------------------- पहले-------------अब
पंच--------------------5000-----------10,000
सरपंच(15 वार्ड तक)----15000----------30000
सरपंच (15 वार्ड से अधिक)25000--------50000
पंचायत समिति सदस्य-------50000--------100000
जिला परिषद सदस्य---------100000-------200000
राज्य में कुल जिला परिषद-------21
चुनाव होंगे---------------------20 (सोनीपत को छोड़कर)
राज्य में कुल ब्लॉक-------------126
चुनाव होंगे---------------------123
कुल जिला परिषद सदस्य----------419
चुनाव होंगे---------------------393
(सोनीपत जिला परिषद के अलावा मुरथल, राई और सोनीपत पंचायत समिति के चुनाव नहीं होंगे)