{"_id":"60e218578ebc3e09cd5c96a6","slug":"haryana-news-electricity-consumption-increased-due-to-indifference-of-monsoon-paddy-transplantation-done-in-two-lakh-hectares-only","type":"story","status":"publish","title_hn":"हरियाणा : मानसून की बेरुखी से बढ़ी बिजली खपत, दो लाख हेक्टेयर में ही हो पाई धान रोपाई","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
हरियाणा : मानसून की बेरुखी से बढ़ी बिजली खपत, दो लाख हेक्टेयर में ही हो पाई धान रोपाई
Mon, 05 Jul 2021 10:02 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
अमर उजाला नेटवर्क, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Mon, 05 Jul 2021 10:02 AM IST
सार
- आधा रोपाई सीजन बीता, अब तक हो जानी चाहिए थी 6 से 7 लाख हेक्टेयर में रोपाई
- पिछले चार दिन से रात में बढ़ रही है बिजली की 10 हजार मेगावाट से अधिक मांग
- 12 लाख हेक्टेयर में धान रोपाई का कृषि विभाग ने रखा है लक्ष्य
विज्ञापन
धान की फसल
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
मानसून की बेरुखी से हरियाणा में गहराये बिजली संकट के कारण धान की रोपाई बुरी तरह प्रभावित हो गई है। रोपाई का आधा सीजन बीत जाने के बाद भी राज्य में अभी तक दो लाख हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो पाई है। बिजली निगम जहां कृषि के लिए 8 घंटे बिजली आपूर्ति का दावा कर रहा है वहीं किसान सिर्फ चार से छह घंटे ही बिजली मिलने की बात कह रहे हैं। यदि बिजली और मानसून की यही स्थिति रही तो धान के बड़े रकबे पर इसका असर पड़ सकता है।
विज्ञापन
कृषि विभाग ने हरियाणा में सीजन में 12 लाख हेक्टेयर जमीन पर धान की रोपाई का लक्ष्य रखा है। भूजल बचाने के लिए सरकार ने साठी धान लगाने पर प्रतिबंध लगाया हुआ है और 15 जून से 30 जुलाई तक प्रदेश में धान रोपाई का समय दे रखा है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, 15 जुलाई तक धान की रोपाई का उचित समय है। अब तक औसतन 6 से 7 लाख हेक्टेयर में धान की रोपाई हो जानी चाहिए थी। लेकिन कम बारिश और बिजली संकट ने धान की रोपाई को बुरी तरह प्रभावित किया है।
विज्ञापन
पीक आवर्स में बढ़ती बिजली की मांग
प्रदेश में 1 जुलाई को सबसे अधिक 11732 मेगावाट बिजली की खपत हुई। इसके बाद से पीक आवर्स में लगातार बिजली की मांग जारी है। चार दिन से शाम 7 बजे से बढ़ती मांग 8 हजार मेगावाट से होती हुई 10 से 11 हजार मेगावाट तक पहुंच रही है। क्योंकि खेतों के लिए अधिकतर समय रात को ही बिजली दी जाती है। ऐेसे में रात 10 से 11 बजे के बीच सबसे अधिक लोड होता है। वहीं, इंडस्ट्री समेत घरों में एसी रात के समय ही अधिक चलते हैं।
विज्ञापन
निगम का दावा 8 घंटे, भाकियू बोली 6 घंटे मिल रही
घोषित शेड्यूल के अनुसार, खेतों के लिए बिजली निगम दावा करते हैं कि 8 घंटे सप्लाई दी जा रही है, लेकिन यह कुछ ही जिलों में संभव हो पाता है। अधिकतर जगह से शिकायतें आ रही हैं कि ओवरलोड होने या फिर अन्य कारणों से खेतों को मात्र 6 घंटे ही बिजली मिल रही है। इससे न केवल धान की रोपाई प्रभावित हो रही है, बल्कि जो धान लगाई गई है, वो भी अब सूखने लगी है। भाकियू की मांग है कि सीजन के समय खेतों को अधिक बिजली दी जाए। - रतन मान, प्रदेशाध्यक्ष, भाकियू
मानसून से रोपाई की गति बढ़ेगी
बारिश नहीं होने के कारण अभी 2 लाख हेक्टेयर में ही धान की रोपाई हो सकी है। लेकिन अभी किसानों के पास काफी समय है। 15 जुलाई धान रोपाई कोई देरी नहीं है। वैसे 30 जुलाई तक धान रोपाई की जा सकती है। उम्मीद है कि इस सप्ताह मानसून दस्तक देगा तो धान रोपाई गति पकड़ेगी। - डा. जगराज सिंह, डिप्टी डायरेक्टर, कृषि विभाग।
घग्गर के पानी का समुचित प्रबंध करें : रणजीत सिंह
हरियाणा के बिजली मंत्री रणजीत सिंह ने कहा कि घग्गर नदी के पानी का समुचित प्रबंध किया जाए, ताकि इसका लाभ क्षेत्र के खेतों में सिंचाई के लिए अधिक से अधिक मिल सके। बिजली मंत्री ने घग्गर नदी और चैनलों पर किए जा रहे प्रबंधों व व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने के बाद अधिकारियों को निर्देश दिए कि नदी के लिंक चैनलों की सफाई करवाना भी सुनिश्चित करें। इससे चैनलों में पानी बहाव की क्षमता बढ़ सके। अगर कहीं मरम्मत की जरूरत है तो वो जल्दी कराएं। इस कार्य में किसी प्रकार की ढिलाई न बरतें।