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हरियाणा निकाय चुनावः भाजपा की आंधी में ढेर हुए विरोधी, कांग्रेस के लिए शुभ नहीं संकेत

Thu, 20 Dec 2018 09:18 AM IST
खुशबू गोयल यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़
यशपाल शर्मा, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Thu, 20 Dec 2018 09:18 AM IST
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Haryana municipal election2018 ,BJP's victory in five municipal corporations
हरियाणा नगर निगम चुनावों में बीजेपी की जीत

हरियाणा के निकाय चुनावों में भाजपा ने विरोधी दलों को करारी हार का स्वाद चखाया है। तीन हिंदी भाषी राज्यों में विधानसभा चुनाव हारने के बाद भाजपा के लिए यह बड़ी राहत है। हार से जहां नेताओं और कार्यकर्ताओं का मनोबल थोड़ा गिरा था, वहीं निकाय चुनावों में भारी जीत ने उनमें नए रक्त का संचार किया है। पांचों निगमों में मेयर का चुनाव बड़े अंतर से जीतकर भाजपा ने शहरों में अपना दम दिखा दिया। भाजपा की सटीक रणनीति के सामने विरोधी दल टिक ही नहीं पाए। 

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पार्टी ने चुनाव जीतने के लिए ऐसा चक्रव्यूह रचा कि विरोधी एकजुट होने के बावजूद उसे भेद नहीं पाए। भाजपा ने पांचों निगमों में मेयर पद पर मजबूत प्रत्याशियों को उतारा। इनका आमजन में खासा जनाधार था, जो भाजपा के लिए बड़ा लाभदायक सिद्ध हुआ। इसके अलावा भाजपा कार्यकर्ता और नेता घर-घर पहुंचे और मतदाताओं को अपने पाले में लाने की कोई कसर नहीं छोड़ी। जबकि विपक्षी दलों ने अति उत्साही होकर चुनाव लड़ा, जिससे हार झेलनी पड़ी। 
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मुख्य विपक्षी दल इनेलो ने पार्टी सिंबल पर निकाय चुनाव लड़े जबकि कांग्रेस अपने समर्थक उम्मीदवारों को जिताने के लिए पर्दे के पीछे डटी रही। इनेलो को पार्टी सिंबल पर चुनाव लड़कर शहरों में अपने जनाधार का भलीभांति अहसास हो गया है, जबकि कांग्रेस के लिए भी संकेत अच्छे नहीं हैं। नगर निगमों में कांग्रेस के नेताओं ने भाजपा को हराने के लिए बिसात तो बिछाई थी, मगर मतदाताओं ने भाजपा के प्रत्याशियों पर ही भरोसा जताया।

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पानीपत में धरी रह गई तंवर, शाह, कुंडू की रणनीति

Haryana municipal election2018 ,BJP's victory in five municipal corporations
नगर निगम चुनावों में बीजेपी की जीत

पानीपत नगर निगम में भाजपा ने बड़ी जीत हासिल की है। परिवहन मंत्री कृष्ण लाल पंवार, भाजपा विधायकों रोहिता रेवड़ी और महिपाल ढांडा अपना किला बचाने में कामयाब रहे हैं। यहां कांग्रेस की ओर से प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर, पूर्व विधायक बलबीर पाल शाह और युकां अध्यक्ष सचिन कुंडू ने भाजपा को हराने की रणनीति तैयार की थी, मगर दांव उल्टा पड़ गया। कांग्रेस समर्थक उम्मीदवारों की करारी हार हुई है।

रोहतक में अपने वार्ड में ही हारे कांग्रेसी दिग्गज
रोहतक नगर निगम चुनाव में कांग्रेस दिग्गजों को अपने ही वार्ड में हार का सामना करना पड़ा। पूर्व सीएम हुड्डा, पूर्व सांसद शादी लाल बत्रा और कांग्रेस विधायक शकुंतला खटक के वार्ड-14 में कांग्रेस की हार हुई है। भाजपा ने यहां कांग्रेस को ढेर किया। सहकारिता राज्य मंत्री मनीष ग्रोवर का भी यही वार्ड था। भाजपा प्रत्याशी की जीत से उनका कद बढ़ा है।

कांग्रेस को ले डूबी गुटबाजी
नगर निगम चुनावों में कांग्रेस भले सिंबल पर नहीं लड़ी। लेकिन, समर्थित उम्मीदवारों की हार में बड़ा कारण बड़े नेताओं की गुटबाजी भी रही। हुड्डा व तंवर खेमे में जहां सिंबल पर चुनाव लड़ने को लेकर विरोधाभास था, वहीं एक-दूसरे के समर्थक उम्मीदवारों को जिताने में दोनों ने दिलचस्पी नहीं दिखाई। हुड्डा के उतारे उम्मीदवारों को तो तंवर ने पार्टी का उम्मीदवार मानने से ही इंकार कर दिया था। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले कांग्रेस ने अगर गुटबाजी खत्म कर हाथ और दिल नहीं मिलाए तो नतीजे चौंकाने वाले हो सकते हैं।

करनाल में इनेलो-कांग्रेस की जुगलबंदी भी नहीं आई काम

Haryana municipal election2018 ,BJP's victory in five municipal corporations
मुख्यमंत्री मनोहर लाल

सीएम सिटी करनाल में भाजपा की मेयर प्रत्याशी को हराने के लिए कांग्रेस और इनेलो एक साथ आ गए थे। इनेलो समर्थित मेयर प्रत्याशी आशा वधवा को पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने भी समर्थन दिया था, मगर दोनों मिलकर भी रेणु बाला गुप्ता को हराने में नाकाम रहे। पंजाबी मतदाताओं ने खुलकर भाजपा का साथ दिया। सीएम का गृह क्षेत्र होने का बड़ा फायदा मेयर प्रत्याशी को मिला।

रोहतक में हुड्डा नहीं बचा पाए गढ़
भाजपा ने पूर्व सीएम हुड्डा के गढ़ जाटलैंड रोहतक में भी सेंधमारी की है। पार्टी ने मेयर पद का चुनाव जीतकर हुड्डा को करारी शिकस्त दी। रोहतक जिले का बनयानी गांव सीएम मनोहर लाल का पैतृक गांव है। इसलिए रोहतक नगर निगम में भी पंजाबी कार्ड खूब चला। हुड्डा की प्रतिष्ठा भी मेयर चुनाव से जुड़ी हुई थी। वह अपना गढ़ बचाने में सफल नहीं हो पाए।

कंवर पाल और कमल गुप्ता साख बचाने में कामयाब
यमुनानगर और हिसार में भी भाजपा ने इनेलो-कांग्रेस को करारी शिकस्त देते हुए विपक्ष को पसोपेश में डाल दिया है। यमुनानगर में स्पीकर कंवरपाल गुर्जर तो हिसार में विधायक व सार्वजनिक उपक्रम ब्यूरो के चेयरमैन डॉ. कमल गुप्ता अपनी साख बचाने में कामयाब हो गए। हिसार नगर निगम में जिंदल परिवार का जादू भी नहीं चला। कुल मिलाकर पांचों नगर निगमों के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों के भाजपा विधायकों ने अपने दुर्ग फिलहाल बचा लिए हैं।

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