हरियाणा में खिला बीजेपी का कमल, कांग्रेस ने ईवीएम पर उठाए सवाल, पढ़ें किसने क्या कहा
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पांच नगर निगमों में भाजपा का कमल खिल गया है। हिसार, रोहतक, पानीपत, करनाल, यमुनानगर में भाजपा के मेयर प्रत्याशियों ने जीत हासिल की है। सीएम सिटी में पंजाबियत का कार्ड खेलने के बावजूद भाजपा प्रत्याशी सबसे कम अंतर से विजयी रहा है। जबकि पानीपत में भाजपा के मेयर प्रत्याशी ने सबसे बड़े अंतर से जीत हासिल की है।
दूसरी ओर, पार्षदों की जीत कुछ और कहानी की ओर संकेत कर रही है। पानीपत, करनाल और यमुनानगर में अधिकतर भाजपा पार्षद जीते हैं, जबकि हिसार और रोहतक में अधिकतर निर्दलीय और कांग्रेस समर्थित पार्षद विजयी रहे हैं। इस वजह से मेयर प्रत्याशियों की जीत पर सवाल उठने लगे हैं। वहीं, कैथल की पूंडरी नगर पालिका में सभी निर्दलीय विजयी हुए हैं। जबकि फतेहाबाद की जाखल नगर पालिका में कांग्रेस समर्थित पार्षद अधिक विजयी हुए हैं।
उधर, मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने मेयर प्रत्याशियों कीजीत को अपनी सरकार के कार्यों पर लगी मुहर बताया है। जबकि पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा का कहना है कि ईवीएम में गड़बड़ी से इनकार नहीं किया जा सकता है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अशोक तंवर का कहना है कि कांग्रेस का कोई प्रत्याशी नहीं हारा है। यदि कांग्रेस सिंबल पर चुनाव लड़ती तो सभी मेयर कांग्रेस के होते।
बता दें कि पहली बार मेयर के प्रत्याशी को जनता ने सीधे चुना है। इस चुनाव में कांग्रेस ने सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ा जबकि उसके कुछ नेताओं ने मेयर प्रत्याशियों का अपना समर्थन दिया था। लेकिन वे अपने समर्थित प्रत्याशी को विजयश्री नहीं दिलवा पाए। वहीं, हारने वाले अधिकतर प्रत्याशियों ने चुनाव में गड़बड़ी की आशंका जाहिर की है।
उधर, पांचों मेयर पदों पर जीत हासिल करने से भाजपा उत्साहित है। इस जीत से भाजपा को विधानसभा चुनावों में भी अपनी स्थिति मजबूत नजर आने लगी है। लेकिन पांच में से दो निगमों में अधिकतर निर्दलीय प्रत्याशियों के जीतने से सवाल भी उठने लगे हैं। इससे यह संकेत भी मिलता है कि यदि कांग्रेस सिंबल पर चुनाव लड़ती तो निकाय चुनाव का परिणाम कुछ और हो सकता था।
इस तरह मिली मेयर पद पर जीत
करनाल में भाजपा की रेणु बाला 9348 वोटों से आशा वधवा को हराया है। रेणु को 69960 वोट मिले जबकि आशा को 60612 वोट मिले हैं। पानीपत में भाजपा की अवनीत कौर ने 74940 वोटों से अंशु पाहवा को हराया है। अवनीत कौर को 126321 वोट मिले हैं। जबकि अंशु पाहवा को 74940 वोट मिले हैं।
यमुनानगर में भाजपा के मदन सिंह चौहान ने 40678 वोटों से राकेश कुमार को हराया है। मदन सिंह को कुल 196447 वोट मिले जबकि कांग्रेस समर्थित राकेश को 50964 वोट मिले हैं। तीसरे नंबर पर इनेलो-बसपा प्रत्याशी संदीप गोयल रहे। उन्हें 32315 वोट मिले हैं।
हिसार में भाजपा के मेयर प्रत्याशी गौतम सरदाना 28091 वोटों से रेखा एरेन को हराया है। सरदाना को कुल 68196 वोट मिले हैं जबकि रेखा को 40105 वोट मिले हैं। रोहतक में भाजपा के मनमोहन गोयल ने 14776 वोटों से सीताराम सचदेव को हराया है। गोयल को 65822 वोट मिले जबकि सीताराम सचदेवा को 51046 वोट मिले हैं। तीसरे नंबर पर इनेलो प्रत्याशी संचित नांदल रहे। नांदल को 32775 वोट मिले हैं।
खास बातें
- बंटा वोट : कांग्रेस ने सिंबल पर नहीं लड़ा था चुनाव। इस वजह से कई निर्दलीय प्रत्याशी सामने आए और कांग्रेस का वोट बंट गया। भाजपा ने सिंबल पर चुनाव लड़ा इस वजह से मतदाताओं के सामने उसके प्रत्याशी और चुनाव चिह्न स्पष्ट था। इसका फायदा भाजपा को मिला है।
- गुटबंदी ले डूबी : कांग्रेस के दिग्गजों ने अलग अलग शहरों में अलग प्रत्याशियों को अपना समर्थन दिया। मसलन रोहतक में पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने सीताराम सचदेवा को समर्थन दिया था जबकि प्रदेश अध्यक्ष अशोक तंवर उनका विरोध कर रहे थे। इसका खामियाजा सचदेवा को भुगतना पड़ा। वहीं, इसका लाभ भाजपा प्रत्याशी को मिला है। इसी तरह हिसार में जिंदल और बिश्नोई परिवार ने ऐन मौके पर भाजपा के बागी प्रत्याशी को अपना समर्थन दिया।
- भाजपा को संजीवनी : पांचों नगर निगमों में मेयर का पद जीतने के बाद भाजपा के हौसले बुलंद होंगे। इसे वह अपनी सरकार के कार्यों के बल पर मिली जीत के रूप में प्रचारित करेगी। विधानसभा चुनाव से पहले मिली यह जीत भाजपा का मनोबल बढ़ाएगी। अब वह पूरी ताकत से विधानसभा और लोकसभा चुनाव में उतर सकेगी। वहीं, कांग्रेस और दूसरे दलों को काफी मशक्कत करनी पड़ेगी।
- विस-लोस में बदल जाएंगे मुद्दे : पांच नगर निगमों में मेयर प्रत्याशी जीतने का मतलब यह नहीं है कि भाजपा की राह विधानसभा और लोकसभा चुनावों में आसान होने जा रही है। एक तो कांग्रेस ने सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ा था। दूसरे नगर निगम चुनाव स्थानीय मुद्दों पर लड़े जाते हैं। विधानसभा और लोकसभा चुनाव में बड़े मुद्दे प्रभावी होंगे। वहां पर हार जीत के लिए मुद्दे बदल जाते हैं। इस तरह भाजपा मेयर का पद जीत कर खुश हो सकती है, लेकिन विधानसभा और लोकसभा में इससे उसकी राह आसान नहीं होने वाली है।
- ईवीएम शक के दायरे से बाहर नहीं है। निकाय चुनाव बैलेट पेपर पर ही कराए जाने चाहिए। वैसे भी निकाय चुनाव सरकार के पक्ष में जाते हैं। - भूपेंद्र सिंह हुड्डा, पूर्व सीएम
हार का जवाब वे लोग दें जिन्होंने सिंबल पर चुनाव नहीं लड़ने दिया। अगर कांग्रेस सिंबल पर चुनाव लड़ती तो पांचों मेयर कांग्रेस के होते। कांग्रेस का कोई प्रत्याशी चुनाव नहीं हारा है न ही हारता। - अशोक तंवर, कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष
यह जीत भाजपा की नीतियों की है। सरकार ने जनता के लिए काम किया जिस पर अब मुहर लग गई है। हम हमेशा जनता का कार्य करते रहेंगे। - मनोहर लाल, मुख्यमंत्री
पांच शहरों में पार्षदों की स्थिति
रोहतक 22 वार्ड
भाजपा के 8 पार्षद जीते
कांग्रेस समर्थक 5 जीते
निर्दलीय 9 विजयी रहे
पानीपत 26 वार्ड
भाजपा पार्षद 22 जीते
कांग्रेस समर्थित एक जीता
तीन पार्षद निर्दलीय जीते
यमुनानगर 22 वार्ड
भाजपा के 13 पार्षद जीते
कांग्रेस समर्थित 5 जीते
निर्दलीय के रूप में 3 जीते
एक पार्षद इनेलो का जीता
हिसार में 20 वार्ड
भाजपा के 7 पार्षद जीते
निर्दलीय 13 विजयी रहे
करनाल में 20 वार्ड
भाजपा के 12 पार्षद जीते
निर्दलीय 07 विजयी रहे
एक कांग्रेस समर्थित जीता