हरियाणा नगर निगम चुनावः भाजपा की अग्निपरीक्षा, कांग्रेस-इनेलो की साख का सवाल
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हरियाणा के आठ में से पांच नगर निगमों में होने जा रहे चुनाव में जीत दर्ज करना राजनीतिक दलों के लिए नाक का सवाल रहेगा। चार साल से अधिक समय से सत्ता पर काबिज भाजपा के लिए यह चुनाव किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं है। हालांकि, फरीदाबाद व गुरुग्राम नगर निगम भाजपा अपने चुनाव चिह्न पर लड़कर कब्जा चुकी है। गुरुग्राम में गणित गड़बड़ाया था, लेकिन निर्दलीयों के सहारे बाजी मार ली। अब सरकार हर हाल में पांचों निगमों पर भी काबिज होना चाहेगी।
चूंकि, 2019 में विधानसभा चुनाव होने हैं। यह चुनाव लोकसभा के साथ भी हो सकते हैं। इसलिए सरकार पांचों निगमों में अपने मेयर-डिप्टी मेयर बनवाकर चुनावी लहर बनाना चाहेगी। प्रयास रहेगा कि शहर की सरकार बनाकर शहरी मतदाताओं के भाजपा के साथ होने का संदेश दिया जा सके। जीत से भाजपा सरकार के चार साल के कार्यकाल पर भी मुहर लगेगी। पार्टी पूरे उत्साह और जोश से लबरेज होकर चुनाव मैदान में ताल ठोकेगी।
वहीं, कार्यकर्ताओं का मनोबल और बढ़ेगा। यह चुनाव कांग्रेस और इनेलो की साख से भी जुड़ा हुआ है। चूंकि, दोनों ही दल वर्तमान में अंदरूनी कलह से जूझ रहे हैं। इनेलो जहां दोफाड़ हुई है, वहीं चौटाला परिवार भी टूटा है। डॉ. अजय चौटाला, दुष्यंत व दिग्विजय चौटाला को बाहर का रास्ता दिखाने से पार्टी पर कहीं न कहीं असर पड़ा है। कार्यकर्ता भी मंझधार में है। ऐसे में इनेलो को निगम चुनावों की रणनीति बेहद सटीक बनानी होगी ताकि सत्ता पक्ष और कांग्रेस से लोहा ले सकें।
चुनाव में जीत से इनेलो नेताओं और कार्यकर्ताओं में नए रक्त का संचार होगा। पार्टी दोफाड़ होने के बाद विधानसभा चुनाव में पूरे दमखम के साथ उतर सकेगी। क्योंकि, इनेलो 14 साल से सत्ता से दूर चल रही है। उधर, कांग्रेस के लिए भी यह चुनाव बेहद अहम है। सत्ता वापसी का सपना देख रही कांग्रेस को इस चुनाव में बेहतर प्रदर्शन करना ही होगा। गुटबाजी से जूझ रही कांग्रेस ने अगर धड़ों में बंटकर चुनाव लड़ा तो विरोधियों को फायदा मिलेगा। इसलिए पूर्व सीएम भूपेंद्र हुड्डा और कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष अशोक तंवर को मनमुटाव दूर कर निगम चुनावों में एक साथ ताल ठोकनी होगी।
नतीजे पक्ष में न आने पर विधानसभा चुनाव की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। साथ ही नेताओं और कार्यकर्ताओं को जो सत्ता वापसी की किरण दिखाई दे रही है, उसे झटका लगेगा। निगम चुनावों के परिणाम निसंदेह ही विधानसभा चुनावों से पहले सत्ता का सेमीफाइनल हैं। हरियाणा में चुनाव लड़ने का निर्णय ले चुकी आप और निर्दलीय भी निगम चुनावों में तीनों प्रमुख दलों के समीकरण गड़बड़ा सकते हैं।
तीनों दल चुनाव चिह्न पर ठोकेंगे ताल
भाजपा, कांग्रेस और इनेलो निगम चुनाव अपने चुनाव चिह्न पर लड़ने का मन बना चुके हैं। भाजपा की ओर से सीएम मनोहर लाल, प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला, इनेलो की ओर से नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। अशोक तंवर भी चुनाव चिन्ह पर चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं। दो-तीन दिन के भीतर औपचारिक घोषणा होगी। चुनाव वाले जिलों में पार्टी कार्यकर्ताओं की राय जानने के निर्देश पर्यवेक्षकों को दे दिए गए हैं।