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हरियाणाः नीति निर्माण में बढ़ेगी विधायकों की भागीदारी, प्रशिक्षण कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों से सीखे गुर

Fri, 07 Aug 2020 10:43 AM IST
खुशबू गोयल अमर उजाला, चंडीगढ़
अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Fri, 07 Aug 2020 10:43 AM IST
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Haryana MLA will take part into policy framing process, training session
फाइल फोटो
हरियाणा के विधायकों की नीति निर्माण में भूमिका बढ़ने वाली है। विधानसभा अध्यक्ष ज्ञान चंद गुप्ता ने इसका पूरा खाका तैयार कर लिया है। इस सिलसिले में वीरवार को विधानसभा सचिवालय में विधायकों के लिए प्रशिक्षण कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया। सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के तत्वावधान में हुई कॉन्फ्रेंस के पहले चरण में 10 विधायकों ने हिस्सा लिया। कोविड-19 के कारण सामाजिक दूरी संबंधित नियमों के पालन के लिए सभी विधायकों को एक साथ नहीं बुलाया गया।
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ज्ञान चंद गुप्ता की अध्यक्षता में हुई कॉन्फ्रेंस का संचालन सेंटर फॉर सिविल सोसाइटी के सीईओ के. यतीश राजावत ने किया। इस पर गहन विमर्श हुआ कि गुरुग्राम ने विकास की बुलंदियों को कैसे छुआ, बड़े औद्योगिक ढांचे वाले फरीदाबाद में विकास की गति अपेक्षाकृत कम कैसे रही। गुरुग्राम की तर्ज पर हरियाणा के दूसरे शहरों के लिए विकास की योजनाएं क्यों नहीं तलाशी गईं। ज्ञान चंद गुप्ता ने कहा कि दुनिया जिस रफ्तार से आगे बढ़ रही है, उसी रफ्तार से नीतियां भी बनानी पड़ रही हैं।
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जाहिर है इन सभी नीतियों का समग्रता से अध्ययन करना हर जनप्रतिनिधि के लिए संभव नहीं है। इनके निहित उद्देश्यों को समझना और फिर उनके प्रभावी क्रियान्वयन की रूपरेखा तय करना भी आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जितनी बड़ी जिम्मेदारी होती है, उतने ही व्यापक प्रशिक्षण और अनुभव की आवश्यकता रहती है। विधायकों का अधिकतर समय जन सामान्य के बीच गुजरता है। अनेक तरह की समस्याओं का अंबार उनके सामने होता है। उन्हें हल करने की जिम्मेदारी उनकी होती है।
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इसलिए की गई प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत

गुप्ता ने कहा कि इन समस्याओं के समाधान के साथ-साथ विधानपालिका का मुख्य कार्य नीति निर्माण करना है। यह विडंबना है कि कालांतर में नीति निर्माण में विधायकों की भूमिका कम होती गई और इस कार्य के लिए भी तंत्र अफसरशाही पर निर्भर हो गया। उन्होंने कहा कि जनता जिन लोगों को अपना प्रतिनिधि चुनती है, उन्हें ही उसके लिए नीतियां बनानी चाहिए।

नीतियों के निर्माण और उनके क्रियान्वयन में जनप्रतिनिधियों की भूमिका बढ़ाने के लिए इस प्रशिक्षण कार्यक्रम की शुरुआत की गई है। जिनके लिए नीतियां बनाई जाती हैं, उनमें संबंधित पक्षों की राय लेनी आवश्यक है। इसके साथ ही नीतियों की समयावधि तय होनी चाहिए और यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि इनका पुनर्मूल्याकंन कब होगा।

उन्होंने इस बात पर चिंता व्यक्त की है कि विधायकों में अध्ययन की प्रवृत्ति कम होने के कारण विधायिकी तंत्र कमजोर हुआ है। विशेषज्ञों ने इस पर सुझाव दिया कि विधायकों के पहले 3 वर्ष विधि निर्माण व्यवस्था के लिए ही समर्पित होने चाहिए। बाद के 2 वर्ष वे अपने क्षेत्र के लिए लगाएं।

माइक्रो फाइनेंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क के सीईओ हर्ष श्रीवास्तव ने गुरुग्राम और फरीदाबाद महानगरों के विकास का तुलनात्मक ब्योरा दिया। उन्होंने हरियाणा के दूसरे शहरों के लिए भी औद्योगिक विकल्प सुझाए। विधायकों ने अपने अपने विधान सभा क्षेत्रों में विकास की संभावनाओं पर भी जानकारी हासिल की।
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