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पलटवार: किसानों के मुद्दे पर हरियाणा और पंजाब सरकार आमने-सामने, अनिल विज बोले- किसानों को भड़का रहे अमरिंदर सिंह

Mon, 13 Sep 2021 07:20 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 13 Sep 2021 07:20 PM IST
सार

कई महीनों से दिल्ली और हरियाणा में कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलनरत हैं। अब किसानों के मुद्दे पर ही पंजाब और हरियाणा सरकार आमने-सामने है। पहले करनाल में लाठीचार्ज, उसके बाद गन्ना मूल्य और अब कैप्टन अमरिंदर सिंह के बयान पर घमासान मचा है। 

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Haryana Minister Anil Vij targets Punjab Chief Minister Captain Amarinder Singh
अनिल विज - फोटो : Twitter : @anilvijminister

विस्तार

पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह ने किसानों से कहा कि उन्हें आंदोलन करना है तो वह पंजाब के बजाय दिल्ली व हरियाणा में जाकर करें। पंजाब की धरती पर वह ऐसा कुछ न करें, जिससे राज्य को आर्थिक नुकसान हो। होशियारपुर में एक कार्यक्रम के दौरान दिए उनके संबोधन के बाद सियासत गरमा गई है और हरियाणा के कई मंत्रियों ने कैप्टन को घेरने की कोशिश की है। 

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हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री ने ही किसानों को भड़काया है तो हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल ने भी इसी बहाने एसवाईएल के मुद्दे को उछाल दिया है। होशियारपुर में एक सरकारी कॉलेज का शिलान्यास करते हुए कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा है कि राज्य में 113 स्थानों पर किसानों का आंदोलन चल रहा है। इससे राज्य की आर्थिक स्थिति पर असर पड़ रहा है। 
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अनिल विज ने कैप्टन को घेरा
हरियाणा के गृहमंत्री अनिल विज ने ट्वीट कर कहा कि पंजाब के मुख्यमंत्री अमरिंदर सिंह जी का बयान बहुत ही गैर जिम्मेदाराना है। इससे साबित होता है कि किसानों को भड़काने का काम अमरिंदर सिंह ने ही किया है। हरियाणा के कृषि मंत्री जेपी दलाल भी इस जुबानी जंग में कूद गए हैं। उन्होंने कहा है कि तमाम किसान संगठन पंजाब के हैं। हम पहले से कहते आ रहे हैं कि यह कांग्रेस द्वारा प्रायोजित आंदोलन है। आज पंजाब के मुख्यमंत्री ने भी इस बात को मान लिया है, इसलिए खुले तौर पर मैं पंजाब के मुख्यमंत्री से अपील करता हूं कि एक देशभक्त परिवार का होने के चलते वे दिल्ली हरियाणा और देश के बारे में सोचें और किसान संगठनों को समझाएं।  

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एसवाईएल का मुददा भी उठाया

जेपी दलाल ने मौका देख एसवाईएल पर भी दावा ठोक दिया है। उन्होंने कहा कि पंजाब ने अपने छोटे भाई हरियाणा के साथ नाइंसाफी की है। इतने सालों से एसवाईएल का पानी रोक रखा है। अब सोनीपत-बहादुरगढ़ के उद्यमी इस आंदोलन से परेशान हैं। वहां के उद्योग धंधे बर्बाद हो रहे हैं। 

जाखड़ पहले दे चुके हैं बयान 
किसान आंदोलन के बारे में कांग्रेस के रुख की एक झलक बीते दिनों प्रदेश कांग्रेस प्रधान पद पर नवजोत सिंह सिद्धू की ताजपोशी के समारोह के दौरान भी दिखाई दी थी, जब पूर्व प्रदेश प्रधान सुनील जाखड़ ने कहा कि हमने किसान आंदोलन का रुख केंद्र की तरफ मोड़ दिया है, जो कि जरूरी भी था। उन्होंने कहा कि पंजाब में किसानों का आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा लेकिन तीन कृषि कानून लाने वाली भाजपा की केंद्र सरकार तक उनकी आवाज नहीं पहुंच रही थी। जैसे ही किसानों ने देश की राजधानी पर दस्तक दी, केंद्र सरकार को अपनी गलती का एहसास तभी से होने लगा था, भले ही अपने अहम के कारण सरकार झुकने को तैयार नहीं है।

हरसिमरत ने भी कैप्टन को घेरा 
शिअद नेता और सांसद हरसिमरत कौर बादल ने पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से ट्वीट कर पूछा है कि कांग्रेस ने अपने मंत्री के खिलाफ विशेषाधिकार प्रस्ताव क्यों नहीं पास किया। जिस मंत्री ने मुख्यमंत्री के पैनल में आपकी तरफ से संसद में कृषि कानूनों की मंजूरी दी थी। उन्होंने कैप्टन को गुटका साहिब की कसम की भी याद दिलाई।

मनोहर लाल पर कैप्टन ने साधा था निशाना
इससे पहले कैप्टन अमरिंदर सिंह ने कहा था कि किसानों में बढ़े आक्रोश और बेचैनी के लिए पंजाब नहीं, बल्कि भाजपा सीधे तौर पर जिम्मेदार है। कैप्टन ने हरियाणा के मुख्यमंत्री के आरोप की निंदा की थी और कहा था कि मनोहर लाल करनाल में किसानों पर हुए हमले से खुद का बचाव कर रहे हैं। कैप्टन ने यह प्रतिक्रिया मनोहर लाल और दुष्यंत चौटाला द्वारा कृषि कानूनों के खिलाफ किसान आंदोलन के पीछे पंजाब का हाथ होने के आरोपों के संदर्भ में कही थी। 

मनोहर लाल ने दी कैप्टन को चुनौती
हाल ही में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कैप्टन अमरिंदर सिंह को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था कि पड़ोसी राज्य ने चुनाव नजदीक देख चार साल बाद गन्ने का भाव बढ़ाया है। अगर कांग्रेस सरकार किसान हितैषी होने का इतना ही दंभ भरती है तो किसानों को हमारी तर्ज पर गन्ने का भाव और पिछला एरियर देकर दिखाए।

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