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आरक्षण आंदोलन: जाट आज मना रहे हैं काला दिवस, इंटरनेट बैन
ब्यूरो/अमर उजाला, रोहतक(हरियाणा)
Updated Sun, 26 Feb 2017 09:32 AM IST
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यशपाल मलिक
- फोटो : अमर उजाला
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आरक्षण व अन्य मांगें मनवाने के लिए आंदोलन कर रहे जाट आज काला दिवस मना रहे हैं। इसके चलते इंटरनेट बैन कर दिया गया है और सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। आईपीसी की धारा 1973 की धारा 144 आदेश जारी कर इन्टरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी गई है। यह आदेश आज शाम 5 बजे तक लागू रहेंगे। आदेशों में कहा गया है कि असमाजिक तत्व सोशल मीडिया का दुरूपयोग करके अफवाहें फैला सकते हैं।
इसी को ध्यान में रखते हुए जिला में कानून व्यवस्था बनाये रखने के उद्देश्य से इंटरनेट पर रोक लगाई गई है। करनाल में भी धारा 144 लगा दी गई है। प्रशासन अलर्ट है। हाईवे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, नहरों व शहरों में सुरक्षा बलों के जवान तैनात हैं। नाकेबंदी व गश्त बढ़ा दी गई है। सोनीपत व रोहतक में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी है, जबकि पानीपत, भिवानी सहित कई जिलों में यह देर रात बाद बंद की जा सकती है।
जिलों में ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। ड्रोन कैमरों से भी नजर रखी जा रही है। भाषणबाजी की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। एहतियात के तौर पर कई बस रूट बंद रखने व कई डायवर्ट करने का फैसला लिया है। रोहतक से गोहाना तक हाईवे बंद रहेगा। गोहाना व पानीपत जाने वाले वाहनों को वाया लाखनमाजरा या खरखौदा से भेजा जाएगा।
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रोहतक में कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने कहा कि जाट आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला आने पर इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में डालने के लिए केंद्र सरकार को अनुमोदन भेजा जाएगा।
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इसी को ध्यान में रखते हुए जिला में कानून व्यवस्था बनाये रखने के उद्देश्य से इंटरनेट पर रोक लगाई गई है। करनाल में भी धारा 144 लगा दी गई है। प्रशासन अलर्ट है। हाईवे, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, नहरों व शहरों में सुरक्षा बलों के जवान तैनात हैं। नाकेबंदी व गश्त बढ़ा दी गई है। सोनीपत व रोहतक में मोबाइल इंटरनेट सेवा बंद कर दी है, जबकि पानीपत, भिवानी सहित कई जिलों में यह देर रात बाद बंद की जा सकती है।
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जिलों में ड्यूटी मजिस्ट्रेट तैनात किए गए हैं। ड्रोन कैमरों से भी नजर रखी जा रही है। भाषणबाजी की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। एहतियात के तौर पर कई बस रूट बंद रखने व कई डायवर्ट करने का फैसला लिया है। रोहतक से गोहाना तक हाईवे बंद रहेगा। गोहाना व पानीपत जाने वाले वाहनों को वाया लाखनमाजरा या खरखौदा से भेजा जाएगा।
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रोहतक में कैबिनेट मंत्री कविता जैन ने कहा कि जाट आरक्षण पर हाईकोर्ट का फैसला आने पर इसे संविधान की 9वीं अनुसूची में डालने के लिए केंद्र सरकार को अनुमोदन भेजा जाएगा।
यशपाल मलिक ने एक नई शर्त रखी
जाट आरक्षण आंदोलन
- फोटो : अमर उजाला
28 दिन से धरने पर बैठे जाटों के साथ बातचीत की राह में नया मोड़ आ गया है। यशपाल मलिक ने आक्रामक तेवर दिखाते हुए एक नई शर्त रखी है। अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति की ओर से प्रदेश में लगातार 27वें दिन धरने जारी रहे। समिति के कार्यकर्ता अब 26 फरवरी को काला दिवस मनाने की तैयारी में जुटे है।
वहीं इस बीच अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति और सरकार की ओर से गठित ढेसी कमेटी के बीच बातचीत की राह में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। गत 20 फरवरी को पानीपत में दूसरे दौर की वार्ता के बाद समिति ने सरकार को सात दिन का समय दिया था, लेकिन अब समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने साफ कह दिया है कि सरकार बार-बार वार्ता कर रही है, लेकिन वार्ता करने वाली कमेटी को समझौते के अधिकार नहीं दिए जाते।
बिना अधिकारों वाली कमेटी के साथ अब कोई वार्ता नहीं होगी। हालांकि वे तीसरी बार वार्ता को भी तैयार हैं, लेकिन इस बार वार्ता सीधे सरकार से होगी। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुक्रवार को दिल्ली बाईपास स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। मलिक ने कहा कि पिछले साल फरवरी में हुए आंदोलन के बाद सरकार और समिति के बीच समझौते हुए थे, लेकिन सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया।
इसी वजह से प्रदेश भर में फिर से धरने शुरू किए गए। अब बार-बार सरकार वार्ता कर रही है, लेकिन वार्ता के लिए जो कमेटी बनाई गई है, उन्हें कोई अधिकार ही नहीं दिए गए। यही कारण है कि वार्ता विफल हो रही है। सरकार मृतकों के परिवारों को नौकरी देकर झूठे मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करे तो धरनों पर लोगों की संख्या कम कर दी जाएगी। धरने तभी खत्म होंगे, जब मांग पूरी हो जाएंगी।
वहीं इस बीच अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति और सरकार की ओर से गठित ढेसी कमेटी के बीच बातचीत की राह में शुक्रवार को नया मोड़ आ गया। गत 20 फरवरी को पानीपत में दूसरे दौर की वार्ता के बाद समिति ने सरकार को सात दिन का समय दिया था, लेकिन अब समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष यशपाल मलिक ने साफ कह दिया है कि सरकार बार-बार वार्ता कर रही है, लेकिन वार्ता करने वाली कमेटी को समझौते के अधिकार नहीं दिए जाते।
बिना अधिकारों वाली कमेटी के साथ अब कोई वार्ता नहीं होगी। हालांकि वे तीसरी बार वार्ता को भी तैयार हैं, लेकिन इस बार वार्ता सीधे सरकार से होगी। समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष शुक्रवार को दिल्ली बाईपास स्थित एक रेस्टोरेंट में पत्रकारों से वार्ता कर रहे थे। मलिक ने कहा कि पिछले साल फरवरी में हुए आंदोलन के बाद सरकार और समिति के बीच समझौते हुए थे, लेकिन सरकार ने अपना वादा पूरा नहीं किया।
इसी वजह से प्रदेश भर में फिर से धरने शुरू किए गए। अब बार-बार सरकार वार्ता कर रही है, लेकिन वार्ता के लिए जो कमेटी बनाई गई है, उन्हें कोई अधिकार ही नहीं दिए गए। यही कारण है कि वार्ता विफल हो रही है। सरकार मृतकों के परिवारों को नौकरी देकर झूठे मुकदमे वापस लेने की प्रक्रिया शुरू करे तो धरनों पर लोगों की संख्या कम कर दी जाएगी। धरने तभी खत्म होंगे, जब मांग पूरी हो जाएंगी।