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बुजुर्ग का दर्दः ‘मेरी बनाई ट्रालियों में ही लोग हमें मारने आए थे’

Sun, 28 Feb 2016 11:09 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, गोहाना
ब्यूरो/अमर उजाला, गोहाना Updated Sun, 28 Feb 2016 11:09 AM IST
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haryana jat protest and voilence story by an old man of gohana

जाट आंदोलन के दौरान उपद्रवियों ने तबाही का जो मंजर दिखाया, उसका आंखों देखा हाल बता रहे हैं मोहाना निवासी 92 वर्षीय दपचंद। सोनीपत से 42 किमी दूर 1.40 लाख की आबादी वाले गोहाना शहर में फैले उपद्रव में सिर्फ दुकानें ही नहीं बल्कि दिल भी जल उठे।

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उपद्रव से आहत ट्राली बनाने वालों ने कहा कि उन्हें सबसे बड़ी टीस यही सालती है कि उनकी बनाई ट्रालियों में ही उपद्रवी उन्हें मारने आए थे। हालत देखकर लग रहा था कि 21वीं सदी का गोहाना फिर से मुगलकाल की ओर लौट गया है।
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जब यहां सुरक्षा के लिए गलियों में बड़े-बड़े द्वार होते थे। इस बार भी उपद्रव के दौरान सैनी बहुल कालोनी इंद्रगढ़ी में गलियों के मुहाने पर सुरक्षा गेट बनने लगे। उपद्रव के बाद से कालोनी के लोग खौफ के साये में जी रहे हैं।
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पुलिस ने छोड़ दिया था लावारिस

haryana jat protest and voilence story by an old man of gohana

शहर में तीन कालोनियां सैनी बाहुल्य है और अधिकतर लोग पंजाबी समुदाय के हैं। खेती कार्य के लिए गोहाना में बनने वाली ट्रालियां अलग पहचान रखती हैं। इन ट्रालियों की न केवल शहर बल्कि आसपास के गांवों के साथ दूसरे जिलों तक बड़ी डिमांड है।

ट्राली निर्माण में महम रोड पर स्थित दीपचंद ट्राली बिल्डर किसी पहचान के मोहताज नहीं है। इस उपद्रव से सहमे 92 साल के दीपचंद ने बताया कि ऐसा पहले कभी नहीं देखा। देश का बंटवारा हुआ था तब भी पुलिस कहीं-कहीं दिख जाती थी। इस बार तो उन्हें लावारिस छोड़ दिया।

दीपचंद ने बताया कि, बच्चों को साफ बोल दिया था कि प्रॉपर्टी का चाहे कुछ हो, अपनी जान बचाओ। दुख इस बात का है कि मैंने कभी धर्म देखकर ट्रालियां नहीं बनाईं। उपद्रवी मेरी बनाई ट्रालियों में ही हम पर हमला करने पहुंचे थे। परिवार ने खुद को घर में बंद कर अपनी जान बचाई।

बच्चे पड़ोस के घर में, खुद रोड पर

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इंद्रगढ़ी निवासियों ने बताया कि अफवाह फैली कि सैकड़ों युवक हाथों में लाठी, डंडे, जैली और दूसरे हथियार लेकर सैनी बहुल कालोनी इंद्रगढ़ी की ओर बढ़ रहे हैं। तभी जाति विशेष के नारे लगाते युवक बरोदा और महम रोड से गुजरे। घना अंधेरा हो गया था।

बच्चों को पड़ोसियों के घर भेज दिया, जो दूसरी जाति से थे। छत पर ईंट और पत्थर जमा किए और सड़क पर आ गए। हर घर से लोग बाहर आकर पहरा दे रहे थे। किसी तरह रात कटी। अगले दिन गलियों के सामने ट्रालियां खड़ी कर दीं ताकि उपद्रवी अंदर न घुस सकें।

सेना आई तब लगा सुरक्षित हैं

कालोनी के युवक राजेश कुमार ने बताया कि दहशत भरा दिन और रात काटने के बाद सुबह सेना के जवान गोहाना पहुंचे। एक टुकड़ी को इंद्रगढ़ी की धर्मशाला में ठहराया गया, तब जाकर एहसास हुआ कि अब सुरक्षित हैं। अब पता नहीं, कब तक सेना रहेगी। सरकार को कोई ठोस कदम उठाने चाहिए क्योंकि स्थानीय पुलिस पर तो कोई भरोसा नहीं रहा।

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