हरियाणा में पानीपत फिल्म पर बढ़ा सियासी उबाल, गृह मंत्रालय अलर्ट, सीएम ने कही ये बात
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हरियाणा में ‘पानीपत’ को लेकर अब सियासी उबाल भी बढ़ने लगा है। विभिन्न संस्थाओं के साथ-साथ राजनेताओं ने भी इस पर कड़ी नाराजगी जताई है। नेताओं का कहना है कि निर्माताओं को इस तरह की ऐतिहासिक फिल्म बनाने से पहले तथ्य की ठीक से जांच करना चाहिए। फिल्म को लेकर किसी प्रकार की हिंसा प्रदेश में न हो, इसे लेकर हरियाणा गृह मंत्रालय भी अलर्ट हो गया है।
किसी की भावना को ठेस न पहुंचे ऐसा निर्णय करेंगे : सीएम
पानीपत फिल्म पर प्रदेश में चल रहे विवाद पर प्रदेश के सीएम मनोहर लाल ने मधुबन अकादमी में पत्रकारों से बातचीत में कहा कि पानीपत फिल्म को लेकर उनके पास बहुत से विचार आ रहे हैं। संदेश पहुंच रहे हैं। इस मामले में संबंधित लोगों से बातचीत की जाएगी। लोगों से बातचीत करके ऐसा निर्णय किया जाएगा कि किसी की भावना को ठेस न पहुंचे।
लोगों की भावनाएं आहत करना ठीक नहीं: विज
गृहमंत्री अनिल विज ने कहा कि फिल्म निर्माताओं को इतिहास का ठीक ढंग से अध्ययन करना चाहिए, उसके बाद ही ऐसी फिल्म बनानी चाहिए। इस तरह बिना मतलब फिल्म के जरिए लोगों में जो नाराजगी पैदा की जा रही है, वो ठीक नहीं है। विज के अनुसार फिल्म बैन करनी है या नहीं, इसका निर्णय तो फिल्म देखने के बाद ही लिया जाएगा।
फिल्म बनाने से पहले निर्माताओं को इतिहासकारों से भी राय ले लेनी चाहिए। इस प्रकार से इतिहास को तोड़ मरोड़कर नहीं दिखाना चाहिए। इससे लोगों की भावनाएं आहत होती है। 'पानीपत' फिल्म को लेकिर प्रदेश में किसी प्रकार हिंसात्मक घटनाएं न हो, इसके लिए मैंने निर्देश दे दिए हैं। किसी को कानून-व्यवस्था हाथ में नहीं लेने दिया जाएगा। गृहमंत्रालय पूरी तरह अलर्ट है।
महाराजा सूरजमल की कूटनीति का मुकाबला नहीं था: बीरेंद्र
भाजपा नेता चौधरी बीरेंद्र सिंह ने कहा कि मैंने फिल्म तो नहीं देखी, मगर हां, पता चला है कि फिल्म में महाराजा सूरजमल की भूमिका को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है। वैसे तो इतिहास हमारी कौम के प्रति व किसानों के प्रति ठीक नहीं रहा, मगर इस फिल्म में महाराजा सूरजमल के बारे में जो गलत भूमिका दिखाई है, वो उचित नहीं है।
पिछले साढ़े पांच सौ साल का इतिहास देखें तो तीन बड़े शासक हुए हैं, जिन्हें हम कूटनीतिक स्टे्टसमैन की संज्ञा दे सकते है। उन तीनों में अकबर द ग्रेट, महाराजा रणजीत सिंह और महाराजा सूरजमल हैं। तीनों शासकों की कूटनीति का कोई सानी नहीं था। बीरेंद्र सिंह ने कहा कि जब मराठा सेनाएं अहमद शाह अब्दाली से लड़ने के लिए आई तो उन्हें पता था कि उत्तरी भारत में भरतपुर के राजा सूरजमल ही सशक्त शासक हैं, इसलिए उनसे उन्होंने मदद मांगी।
इस पर महाराजा सूरज मल ने मराठा सेनापति से कहा कि आपकी सेना परिवार के साथ आ गई है, इसलिए परिवारों को यहीं भरतपुर छोड़िए और आगे बढ़िए। दूसरा सूरजमल ने उन्हें सलाह देते हुए कहा कि आप मराठा सैनिक गुरिल्ला वार में एक्सपर्ट हैं, पानीपत में आमने-सामने की लड़ाई आपके लिए ठीक नहीं रहेगी। लिहाजा मैं आपको सलाह देता हूं कि आप गुरिल्ला लड़ाई करें, ताकि अब्दाली को मात दे सकें।
मगर इन दोनों बातो को मराठाओं ने नहीं माना। उस वक्त सदाशिव भाऊ उनके मुख्य सेनापति थे। इस वजह से जब उन्होंने बात नहीं मानी तो महाराजा सूरजमल ने उनका साथ नहीं दिया। चौधरी बीरेंद्र ने कहा कि इसलिए जरूरी है कि जो भी फिल्म निर्माता इस तरह की फिल्म बनाता है, तो उसकी जिम्मेदारी बनती है कि वे इतिहास का पूरी तरह से अध्ययन करें।
इससे सही तथ्य सामने आ जाते हैं। अब इससे जाट समुदाय आहत है, मैं फिल्म देख लूं, उसके बाद और स्पष्टता होगी। मैं चाहूंगा कि विभिन्न संस्थाएं इस चीज को उठाती रहे। हम चाहते है महाराजा सूरजमल को लेकर फिल्म में जो गलत धारणा बनाने की जो कोशिश की गई है, उसे हटाया जाए।
विवादित हिस्सों को हटाया जाए: बिश्नोई
कुलदीप बिश्नोई ने ट्वीट कर कहा कि फिल्म के माध्यम से किसी भी समाज की भावनाओं का अपमान करना निदंनीय है। पानीपत फिल्म से विवादित हिस्सों को हटाने तक इन पर बैन लगाना चाहिए। तुरंत सरकार इस बारे में कदम उठाए। फिल्म बनाने से पहले किसी को भी किसी के व्यक्तित्व को सही परिप्रेक्ष्य में दिखाना सुनिश्चित करना चाहिए।
सरकार से 'पानीपत' फिल्म पर रोक लगाने की मांग
अखिल भारतीय जाट आरक्षण संघर्ष समिति के राष्ट्रीय सचिव प्रताप दहिया ने कहा कि हाल ही में आशुतोष गोवारीकर की फिल्म पानीपत में महाराजा सूरजमल के बारे में गलत तथ्य दिखाकर उनके उच्च चरित्र व सम्मान को नीचा दिखाने के लिए तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर दर्शाया गया है। फिल्म निर्माता व निर्देशक द्वारा ऐसा गलत कार्य करने से सिर्फ जाट समाज ही नही बल्कि समस्त उत्तरी भारत के लोगों में भारी रोष है।
उन्होनें कहा कि वे केंद्र व प्रदेश सरकार से मांग करते है कि इस फिल्म पर तुरंत बैन लगाया जाए। वहीं महाराजा सूरजमल के को लेकर ऐतिहासिक तथ्यों को तोड़ मरोड़ कर पेश करने पर निर्माता व निर्देशक के खिलाफ केस भी दर्ज किया जाए। प्रताप दहिया मंगलवार को लायर्स चैंबर में पत्रकारों से बतचीत कर रहे थे।