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हरियाणा: मेडिकल कॉलेजों में ऑनलाइन तबादला नीति पर सरकार ने पीछे खींचे कदम, विधानसभा में कहा- ऐसा कोई प्रस्ताव नहीं

Wed, 25 Aug 2021 12:37 AM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 25 Aug 2021 12:37 AM IST
सार

हरियाणा सरकार ने विधानसभा में स्पष्ट कर दिया है कि मेडिकल कॉलेजों में ऑनलाइन तबादला नीति का कोई प्रस्ताव नहीं है। विधानसभा में विधायक गीता भुक्कल के ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर मंत्री डॉ बनवारी लाल ने यह जवाब दिया। 

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Haryana govt said in assembly there is no proposal for online transfer policy in medical colleges
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सरकारी मेडिकल कॉलेजों में ऑनलाइन तबादला नीति को लेकर हरियाणा सरकार ने अपने कदम पीछे खींच लिए हैं। डॉक्टरों, कर्मचारियों के त्यागपत्र की चेतावनी और विधानसभा में विपक्ष के दबाव के चलते सरकार ने ऐसी कोई नीति होने से इनकार किया है। विधानसभा में विधायक गीता भुक्कल द्वारा लाए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए डॉ. बनवारी लाल ने कहा कि राजकीय विश्वविद्यालयों व संस्थानों के मामले में ऑनलाइन स्थानांतरण की न तो कोई नीति है और न ही इसका कोई प्रस्ताव है।

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पीजीआईएमएस, पंडित बीडी शर्मा स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, रोहतक के ए,बी,सी व डी ग्रुप के कर्मचारियों के ऑनलाइन स्थानांतरण नीति में शामिल करने के संबंध में भी कोई योजना नहीं है। मंत्री ने कहा कि राज्य विश्वविद्यालय स्वायत्त निकाय हैं। प्रत्येक विश्वविद्यालय का अपना कॉडर होता है जिसे किसी अन्य संस्थान अर्थात विश्वविद्यालय में स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। 
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विश्वविद्यालयों को डिजिटल बनाने की पहल, इसलिए डाटा मांगा
मंत्री ने कहा कि राज्य के विश्वविद्यालयों के सभी कर्मचारियों का विस्तृत डाटा प्राप्त करने के लिए सरकार द्वारा एक समान एचआरएमएस प्रणाली शुरू की गई है। यह मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली गतिशील पोर्टल है जिस पर एक कर्मचारी का पूरा लाइफ साइकिल उपलब्ध होता है। यह पोर्टल लगातार अपडेट किया जाता है। राज्य के विश्वविद्यालयों को पूरी तरह से डिजिटल बनाने की दिशा में सरकार का यह एक बड़ा कदम है।

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विश्वविद्यालयों से संबंधित नहीं है पत्र 

डॉ. लाल ने स्पष्ट किया कि सरकार द्वारा 26 जुलाई को जारी पत्र केवल प्रदेश के सभी प्रशासनिक सचिवों, विभागाध्यक्षों और बोर्डों व निगमों के प्रबंध निदेशकों और मुख्य प्रबंधकों को संबोधित है। यह राज्य के किसी भी विश्वविद्यालय और प्रदेश में स्थित केंद्रीय विश्वविद्यालय के प्राधिकरण को संबोधित नहीं है। हालांकि, यह पत्र सभी राजकीय वित्त पोषित सार्वजनिक संस्थानों के लिए एचआरएमएस पोर्टल पर डाटा सुविधा के लिए है। विश्वविद्यालयों के मानव संसाधन प्रबंधन प्रणाली के नोडल अधिकारियों का प्रशिक्षण पोर्टल कर्मचारियों के डाटा को अपडेट करने की प्रक्रिया के बारे में था।

मेडिकल कालेजों में स्थायी निदेशक नहीं का मामला भी विधानसभा में गूंजा
मेडिकल कालेजों में स्थायी निदेशक नहीं होने का मामला भी सदन में गूंजा। कांग्रेस विधायक गीता भुक्कल ने कहा कि कोरोना की तीसरी लहर की संभावना है, जबकि प्रदेश के किसी भी मेडिकल कालेज में स्थायी निदेशक नहीं है। इतना ही नहीं विश्वविद्यालयों में पिछले कई साल से भर्तियां नहीं हो रही हैं। इससे बेरोजगारी बढ़ रही है। गीता भुक्कल ने ये भी आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों में वीसी के तौर पर ऐसे लोगों को लगाया जा रहा है, जिनके खिलाफ कई मामले दर्ज हैं और उनकी जांच लंबित है।

अटल बिहारी मेडिकल कॉलेज के लिए 991 पदों पर जल्द होगी भर्ती
अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, छायंसा (फरीदाबाद) में अगले शैक्षणिक सत्र में प्रवेश के लिए इसे कार्यात्मक बनाया जाएगा। साथ ही यहां के लिए डॉक्टरों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 991 विभिन्न पदों की भर्ती करने की प्रक्रिया जल्द शुरू कर दी जाएगी।

विधानसभा में पृथला से विधायक नयनपाल रावत के सवाल के जवाब में स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज की अनुपस्थिति में मंत्री डॉ. बनवारी लाल ने यह जानकारी दी। कॉलेज में सामान्य ओपीडी की सेवाएं 5 जुलाई, 2021 से शुरू हो गई हैं।

उन्होंने बताया कि गांव छायंसा में तत्कालीन गोल्ड फील्ड इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज एंड रिसर्च 2016 में प्रबंधन ने बंद कर दिया था। राज्य सरकार ने गोल्ड फील्ड शिक्षा संस्थान, फरीदाबाद की संपत्ति की ई-नीलामी में भाग लेते हुए 127.05 करोड़ रुपये में इसे खरीदा है। अब यह संस्थान अटल बिहारी वाजपेयी राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, छायंसा (फरीदाबाद) के नाम से जाना जाता है।

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