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सरकारों ने राम रहीम के डेरे को जमकर बांटी 'रेवड़ियां', नियमों की अनदेखी हुई
यशपाल शर्मा/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Fri, 22 Sep 2017 12:43 PM IST
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Ram rahim
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राम रहीम के डेरा सच्चा सौदा के आगे हर सरकार नतमस्तक रहती थी। जो भी पार्टी सत्ता में आई, उसने डेरे को जमकर 'रेवड़ियां' बांटी, नियमों की अनदेखी खूब हुई। चाहे वह पूर्व हुड्डा सरकार हो या प्रदेश की वर्तमान भाजपा सरकार। राजनीतिक लाभ पाने के चक्कर में डेरे को फायदा पहुंचाने के लिए सभी ने नियम-कायदों को ताक पर रखा। डेरे की 11 बड़ी संपत्तियों को बिना सीएलयू नियमित करना इसका बड़ा उदाहरण है।
डेरे को अनुचित लाभ पहुंचाने का काम हुड्डा सरकार में शुरू हुआ। 12 अगस्त 2014 को सरकार ने अधिसूचना जारी कर शाह सतनामपुरा के नाम से अलग पंचायत बनाई। इसमें गांव माजरा, शाह सतनाम पुरा, सुखचैन पुरा, नई बस्ती और शाह सतनाम पुरा धाम को ग्राम पंचायत शाहपुरा बेगू जिला सिरसा से अलग कर नई पंचायत में शामिल कर दिए। इसके बाद हुड्डा सरकार बदल गई और डेरे के समर्थन से सत्ता में आई भाजपा सरकार ने गुरमीत राम रहीम पर कृपा बरसानी शुरू कर दी।
चार नवंबर 2015 को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 1682 एकड़ भूमि चिह्नित कर शाह सतनाम पुरा नई राजस्व संपदा घोषित कर दी। इसके बाद नई पंचायत की भूमि का चकबंदी कार्य शुरू हुआ। इसमें पहले से निर्मित घरों व आबादी क्षेत्र को लाल डोरे में शामिल कर बाकी गतिविधियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र चिह्नित किए जाने थे।
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चकबंदी के दौरान सिरसा के ग्राम एवं नगर आयोजना विभाग के अधिकारियों ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अफसरों को बताया कि उनके पास सीएलयू के आवेदन भी आए हुए हैं, उन्हें अंतिम निर्णय के लिए मुख्यालय को भेजा जाना है, इसलिए लाल डोरा तय कर राजस्व प्लान जल्दी भेजा जाए।
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डेरे को अनुचित लाभ पहुंचाने का काम हुड्डा सरकार में शुरू हुआ। 12 अगस्त 2014 को सरकार ने अधिसूचना जारी कर शाह सतनामपुरा के नाम से अलग पंचायत बनाई। इसमें गांव माजरा, शाह सतनाम पुरा, सुखचैन पुरा, नई बस्ती और शाह सतनाम पुरा धाम को ग्राम पंचायत शाहपुरा बेगू जिला सिरसा से अलग कर नई पंचायत में शामिल कर दिए। इसके बाद हुड्डा सरकार बदल गई और डेरे के समर्थन से सत्ता में आई भाजपा सरकार ने गुरमीत राम रहीम पर कृपा बरसानी शुरू कर दी।
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चार नवंबर 2015 को राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग ने 1682 एकड़ भूमि चिह्नित कर शाह सतनाम पुरा नई राजस्व संपदा घोषित कर दी। इसके बाद नई पंचायत की भूमि का चकबंदी कार्य शुरू हुआ। इसमें पहले से निर्मित घरों व आबादी क्षेत्र को लाल डोरे में शामिल कर बाकी गतिविधियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र चिह्नित किए जाने थे।
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चकबंदी के दौरान सिरसा के ग्राम एवं नगर आयोजना विभाग के अधिकारियों ने जिला प्रशासन के वरिष्ठ अफसरों को बताया कि उनके पास सीएलयू के आवेदन भी आए हुए हैं, उन्हें अंतिम निर्णय के लिए मुख्यालय को भेजा जाना है, इसलिए लाल डोरा तय कर राजस्व प्लान जल्दी भेजा जाए।
11 संपत्तियों को भी लाल डोरे में ही दिखा दिया
राम रहीम
जिला प्रशासन ने 31 दिसंबर 2015 को डेरे के प्रभाव के चलते घरों के साथ ही हॉस्टल, शेड, स्टेडियम, सिनेमा हॉल व औद्योगिक इकाईयों सहित करोड़ों रुपये की 11 संपत्तियों को भी लाल डोरे में ही दिखा दिया। इससे यह सीएलयू मुक्त हो गईं। जबकि चकबंदी का कार्य चला हुआ था।
इसके तहत वाणिज्यिक व औद्योगिक संपदाएं लाल डोरे में शामिल नहीं हो सकती थी। लेकिन, डेरे को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए यह संपत्तियां आबादी वाले इलाके में दिखाई गईं। इससे डेरे को करोड़ों रुपये का लाभ हुआ। लाल डोरे में न दिखाने पर इनका सीएलयू कराना पड़ता।
राजस्व नियमों की हुई अनदेखी
पंचायत एवं विकास विभाग और राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिला प्रशासन ने लाल डोरा घोषित करने में जल्दबाजी दिखाई। घरों के अलावा स्टेडियम, औद्योगिक इकाईयां, सिनेमा हॉल को आवासीय क्षेत्र में शामिल नहीं कर सकते। इसका सीएलयू होना जरूरी था। यह सीधा राजनीतिक रसूख से जुड़ा मामला है।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग देखेगा मामला
हरियाणा के गृह सचिव एसएस प्रसाद ने कहा कि नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग सीएलयू संबंधी मामले देखता है। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ तो विभाग जांच का निर्णय लेगा।
इसके तहत वाणिज्यिक व औद्योगिक संपदाएं लाल डोरे में शामिल नहीं हो सकती थी। लेकिन, डेरे को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए यह संपत्तियां आबादी वाले इलाके में दिखाई गईं। इससे डेरे को करोड़ों रुपये का लाभ हुआ। लाल डोरे में न दिखाने पर इनका सीएलयू कराना पड़ता।
राजस्व नियमों की हुई अनदेखी
पंचायत एवं विकास विभाग और राजस्व व आपदा प्रबंधन विभाग के अधिकारियों के अनुसार जिला प्रशासन ने लाल डोरा घोषित करने में जल्दबाजी दिखाई। घरों के अलावा स्टेडियम, औद्योगिक इकाईयां, सिनेमा हॉल को आवासीय क्षेत्र में शामिल नहीं कर सकते। इसका सीएलयू होना जरूरी था। यह सीधा राजनीतिक रसूख से जुड़ा मामला है।
नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग देखेगा मामला
हरियाणा के गृह सचिव एसएस प्रसाद ने कहा कि नगर एवं ग्राम आयोजना विभाग सीएलयू संबंधी मामले देखता है। अगर नियमों का उल्लंघन हुआ तो विभाग जांच का निर्णय लेगा।