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इस बार आरक्षण की आग में नहीं जलेंगे लोग, सरकार ने बनाई रणनीति
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 11 Oct 2016 09:55 PM IST
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पंचकूला में एक कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री खट्टर
- फोटो : अमर उजाला
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इस बार जाट आरक्षण आंदोलन की आग में लोग नहीं जलेंगे। इससे निपटने के लिए सरकार ने विशेष रणनीति बना ली है। सोमवार देर शाम मुख्यमंत्री खट्टर के आवास पर रोहतक रेंज के आला पुलिस अधिकारी, प्रदेश के डीजीपी, इंटेलिजेंस विभाग के आईजी, गृह सचिव समेत अनेक अधिकारियों के साथ मुख्यमंत्री ने बैठक की।
माना जा रहा है कि राज्य सरकार जाटों के पूर्व हिंसक आंदोलन जैसा कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती। बैठक में आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए कड़े उपाय करने पर विचार किया गया। इस साल फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के चलते प्रदेश के कई जिलों में अराजकता, हिंसा, आगजनी और लूटपाट की वारदातों ने सरकार की काफी किरकिरी करवाई थी।
हालांकि सरकार ने इसके बाद विधानसभा सत्र में जाटों समेत छह जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग के रूप में नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में आरक्षण देकर इस पूरे मामले को शांत कर दिया था, लेकिन आरक्षण की इस व्यवस्था को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती मिलने के बाद हाईकोर्ट ने आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी। यह मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन पिछली कुछ सुनवाइयों के दौरान राज्य सरकार बैकफुट पर दिखाई देने के कारण जाटों में आरक्षण को लेकर अविश्वास पनपने लगा है।
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माना जा रहा है कि राज्य सरकार जाटों के पूर्व हिंसक आंदोलन जैसा कोई खतरा मोल नहीं लेना चाहती। बैठक में आंदोलन को शांतिपूर्ण ढंग से निपटाने के लिए कड़े उपाय करने पर विचार किया गया। इस साल फरवरी माह में जाट आरक्षण आंदोलन के चलते प्रदेश के कई जिलों में अराजकता, हिंसा, आगजनी और लूटपाट की वारदातों ने सरकार की काफी किरकिरी करवाई थी।
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हालांकि सरकार ने इसके बाद विधानसभा सत्र में जाटों समेत छह जातियों को विशेष पिछड़ा वर्ग के रूप में नौकरियों और शैक्षणिक संस्थाओं में आरक्षण देकर इस पूरे मामले को शांत कर दिया था, लेकिन आरक्षण की इस व्यवस्था को पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट में चुनौती मिलने के बाद हाईकोर्ट ने आरक्षण पर अंतरिम रोक लगा दी। यह मामला अभी हाईकोर्ट में लंबित है, लेकिन पिछली कुछ सुनवाइयों के दौरान राज्य सरकार बैकफुट पर दिखाई देने के कारण जाटों में आरक्षण को लेकर अविश्वास पनपने लगा है।
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हाईकोर्ट में मामला, अगली सुनवाई 21 अक्तूबर को
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर
- फोटो : फाइल फोटो
हाईकोर्ट में जाट आरक्षण के मुद्दे पर आगामी 21 अक्तूबर को सुनवाई होनी है। तकरीबन हर सुनवाई पर प्रदेश भर से हाईकोर्ट पहुंचने वाले जाट नेता इस बात से खफा हैं कि सरकार न तो मजबूती से अपना पक्ष रख पा रही है और न ही यह मामला खिंचने के कारण इस साल जाटों व अन्य पांच जातियों के युवाओं को नौकरियों और पढ़ाई में आरक्षण मिल पाया।
हाईकोर्ट में अब तक हुई सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा कानून बनाकर जाटों को दिए गए आरक्षण पर सवाल उठाया गया है। हाईकोर्ट की ओर से पूछा गया है कि आखिर सरकार ने किन आंकड़ों के आधार पर जाटों को आरक्षण दिया है। चिंताजनक पहलु यह भी है कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के समक्ष ऐसे कोई भी आंकड़े प्रस्तुत करने में नाकाम रही है।
सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में उस रणनीति पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने जाट समुदाय द्वारा जून माह में किए गए आंदोलन को जिस सख्ती से रोका गया था। चूंकि प्रदेश सरकार इस साल राज्य का स्वर्ण जयंती समारोह भी मना रही है, ऐसे में सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता किसी बड़े आंदोलन की शुरुआत से प्रदेश को बचाने की भी है।
हाईकोर्ट में अब तक हुई सुनवाई के दौरान सरकार द्वारा कानून बनाकर जाटों को दिए गए आरक्षण पर सवाल उठाया गया है। हाईकोर्ट की ओर से पूछा गया है कि आखिर सरकार ने किन आंकड़ों के आधार पर जाटों को आरक्षण दिया है। चिंताजनक पहलु यह भी है कि राज्य सरकार हाईकोर्ट के समक्ष ऐसे कोई भी आंकड़े प्रस्तुत करने में नाकाम रही है।
सोमवार को मुख्यमंत्री आवास पर हुई बैठक में उस रणनीति पर भी चर्चा हुई, जिसके तहत राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन ने जाट समुदाय द्वारा जून माह में किए गए आंदोलन को जिस सख्ती से रोका गया था। चूंकि प्रदेश सरकार इस साल राज्य का स्वर्ण जयंती समारोह भी मना रही है, ऐसे में सरकार के लिए सबसे बड़ी चिंता किसी बड़े आंदोलन की शुरुआत से प्रदेश को बचाने की भी है।