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Haryana: विधानसभा चुनाव से पहले कच्चे कर्मचारियों के लिए पॉलिसी लाएगी हरियाणा सरकार, यहां फंसा है पेंच
Wed, 29 May 2024 04:08 PM IST
निवेदिता वर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: निवेदिता वर्मा
Updated Wed, 29 May 2024 04:08 PM IST
सार
हरियाणा में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनाने को लेकर भाजपा ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेश में तीसरी बार कमल खिलाने की जिम्मेदारी अब नायब सिंह सैनी के पास आ गई है। लोकसभा चुनाव के मतदान के बाद से ही सैनी ने अधिकारियों के साथ बैठकों के दौर शुरू कर दिए हैं।
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हरियाणा के सीएम नायब सैनी
- फोटो : twitter @NayabSainiBJP
विस्तार
लोकसभा चुनाव में कड़ी मेहनत के बाद सामने आई कच्चे और पक्के कर्मचारियों की नाराजगी को हरियाणा सरकार ने गंभीरता से लिया है। मतदान के बाद से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कच्चे और पक्के कर्मचारियों का डाटा तलब किया है।
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हरियाणा सरकार विधानसभा चुनावों से पहले कच्चे कर्मचारियों को लिए बड़ी घोषणा कर सकती है। वहीं, पक्के कर्मचारियों को मनाने के लिए भी रणनीति तैयार की जा रही है। आचार संहिता हटने के बाद दोनों मामलों को लेकर कर्मचारियों के प्रतिनिधिमंडल के साथ बैठकों के दौर होंगे।
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हरियाणा में तीसरी बार भाजपा की सरकार बनाने को लेकर भाजपा ने अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। प्रदेश में तीसरी बार कमल खिलाने की जिम्मेदारी अब मनोहर लाल के बजाय नायब सिंह सैनी के पास आ गई है। लोकसभा चुनाव के मतदान के बाद से ही सैनी ने अधिकारियों के साथ बैठकों के दौर शुरू कर दिए हैं। शुरुआत में कच्चे कर्मचारियों को लिए पॉलिसी लाने पर विचार किया गया है। इनमें अभी सरकार यह तय नहीं कर पाई है कि पांच साल सेवा वालों को मौका दिया जाए या फिर 7 साल सेवा वालों को। इसको लेकर सीएमओ के अधिकारी भी दो अलग-अलग राय रखते हैं। पहली, अगर पांच साल सेवा वालों को पक्का किया गया है तो इनकी संख्या डेढ़ लाख के पास जाएगी। जबकि सात साल वाले कर्मचारियों की संख्या 80 हजार से 90 हजार के बीच है। दूसरी, सीएमओ के आला अधिकारी चुनाव को देखते हुए पांच साल वालों तक के लिए पॉलिसी के लिए अपनी राय दे चुके हैं।
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कच्चे कर्मियों को पक्का कराने के लिए कई बार हो चुके हैं आंदोलन
कच्चे कर्मचारियों को पक्का कराने को लेकर कर्मचारी संघ और कच्चे कर्मचारी कई बार आंदोलन कर चुके हैं। खासकर नगर पालिका, राजस्व विभाग, शिक्षा विभाग, हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण, स्वास्थ्य विभाग में कच्चे कर्मचारियों की संख्या अधिक है। सबसे अधिक लंबा आंदोलन सफाई कर्मचारियों का रहा है। ठेकेदारों के माध्यम से लगे कर्मचारी पिछले पांच साल से लगातार सड़कों पर हैं और कई बार शहरी स्थानीय निकाय मंत्री के आवास पर धरना तक दे चुके हैं। इसके अलावा 12,500 अतिथि अध्यापक भी 14 साल से पक्का होने की बाट जोह रहे हैं। हालांकि, सरकार की तरफ से कई बार उनके वेतन में बढ़ोतरी की जा चुकी है और अन्य सेवाएं देने पर भी विचार चल रहा है। बावजूद इसके पक्की नौकरी के लिए आज भी अतिथि अध्यापक सड़कों पर हैं।
कौशल निगम में समायोजित हो चुके 1.13 लाख कर्मचारी
फिलहाल ठेकेदारी के माध्यम से नौकरी पर लगे कच्चे कर्मचारियों को हरियाणा सरकार ने हरियाणा कौशल रोजगार निगम में समायोजित किया है। करीब 1.13 लाख कर्मचारियों को यहां पर समायोजित किया गया है। जबकि काफी संख्या में ऐसे कर्मचारी हैं, जो अभी तक इस योजना से नहीं जुड़ पाए हैं। पॉलिसी के तहत हरियाणा में आउटसोर्सिंग पालिसी-1 और पालिसी-2 के तहत भर्ती हुए हैं। प्रदेश के मुख्य सचिव की ओर से दो बार विभागों से कच्चे कर्मचारियों का डाटा मांगा जा चुका है। पहले उन कर्मचारियों का ब्यौरा मांगा गया था, जिनको सेवा में सात साल हो गए हों, बाद में जिनकी सेवाएं पांच साल हो गई हैं, उनका ब्योरा भी मांगा गया है। अब पेंच ये फंसा है कि कौशल निगम में समायोजित कर्मचारियों का क्या होगा। क्योंकि इनका सालाना एक साल तक कार्यकाल बढ़ाया जाता है।
पक्के कर्मचारी कर रहे ओपीएस की मांग
हरियाणा में 2.70 अधिक पक्के कर्मचारी हैं। ये सभी ओपीएस (ओल्ड पेंशन स्कीम) को लेकर मांग कर रहे हैं, लेकिन सरकार की तरफ से अभी तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। हरियाणा कर्मचारी संघ, महासंघ और ओल्ड पेंशन संघर्ष समिति के बैनर तले कई बार आंदोलन और विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। छह माह पहले हरियाणा सरकार ने मुख्य सचिव की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन था। कमेटी और कर्मचारियों की एक ही बैठक हो पाई है और फिलहाल यह मामला लंबित पड़ा है। पक्के कर्मचारियों को साधने के लिए भी सरकार रणनीति तैयार कर रही है।