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बड़ा झटका: हरियाणा सरकार ने 2200 से अधिक स्वास्थ्य ठेका कर्मचारियों को नौकरी से हटाया, कोरोना काल में किया था भर्ती

Mon, 04 Apr 2022 09:23 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Mon, 04 Apr 2022 09:23 PM IST
सार

सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने नौकरी से निकाले गए सभी कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लेने की मांग की है। उन्होंने सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को कौशल रोजगार निगम के बजाय विभाग के पे-रोल पर लेकर पक्का करने और पक्का होने तक समान काम-समान वेतन व सेवा सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। 

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Haryana government removed more than 2212 health contract employees from jobs
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

हरियाणा सरकार ने 2200 से अधिक स्वास्थ्य ठेका कर्मचारियों को नौकरी से हटा दिया गया है। इनमें 1584 स्टाफ नर्स, 307 लैबोरेटरी तकनीशियन, 197 रेडियोग्राफर, 92 फार्मासिस्ट, 20 नर्सिंग सिस्टर, 5 ओटीए, 5 मेडिकल ऑफिसर, एक परामर्शदाता शामिल हैं। इन्हें कोरोना के समय मेडिकल व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी को पूरा करने के लिए कोविड अस्पतालों में आउटसोर्सिंग पॉलिसी पार्ट-दो के तहत लगाया गया था।

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स्वास्थ्य विभाग ने पहली अप्रैल को बिना किसी सूचना एवं पूर्व नोटिस के ठेका कर्मियों को नौकरी से निकाल दिया। इन कर्मियों में विभाग के अधिकारियों के खिलाफ रोष है। इससे पहले वर्ष 2021 में आउटसोर्सिंग पॉलिसी-1 के तहत लगे 500 से ज्यादा सपोर्टिंग स्टाफ कर्मियों को नौकरी से हटाया जा चुका है। उसके बाद 1472 सुरक्षा गार्ड की जगह होमगार्ड के जवान लगाने का सैद्धांतिक फैसला लिया गया। 
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नौकरी बहाली की मांग को लेकर सात अप्रैल को स्वास्थ्य ठेका कर्मचारी यूनियन का सामूहिक प्रतिनिधिमंडल महानिदेशक स्वास्थ्य सेवाएं पंचकूला के कार्यालय पर प्रदर्शन कर स्वास्थ्य मंत्री के नाम ज्ञापन सौंपेगा। बावजूद इसके नौकरी से निकाले गए कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर नहीं लिया गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा। 
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यूनियन के संयोजक मंगत राम व राज्य कमेटी सदस्य सुमित ऋषि ने कहा कि प्रदेश में जब कोरोना संक्रमण तेजी से फैल रहा था तो ठेके पर भर्ती मेडिकल, पैरामेडिकल व सपोर्टिंग स्टाफ ने अपनी जान हथेली पर रखकर जनता की दिन रात सेवा की। इनमें से कई कर्मी खुद भी संक्रमित हुए। पक्की नौकरी देना तो दूर सरकार ने इन्हें बाहर का रास्ता ही दिखा दिया।

सकसं ने मोर्चा खोला
सर्व कर्मचारी संघ के प्रदेशाध्यक्ष सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने नौकरी से निकाले गए सभी कर्मचारियों को वापस ड्यूटी पर लेने की मांग की है। उन्होंने सभी आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को कौशल रोजगार निगम के बजाय विभाग के पे-रोल पर लेकर पक्का करने और पक्का होने तक समान काम-समान वेतन व सेवा सुरक्षा प्रदान करने की मांग की है। 


उन्होंने कहा कि सरकार धीरे-धीरे सभी 15 हजार ठेका कर्मचारियों को नौकरी से हटाती जा रही है। सरकार एक तरफ प्रचार करती है कि ठेका प्रथा खत्म कर दी गई है। दूसरी ओर स्वास्थ्य जैसे अहम विभाग में पक्की नौकरी देने के बजाय रोजगार निगम के माध्यम से केवल 11 महीने के लिए ही काम दिया जा रहा है। निगम ने विभाग को कर्मचारियों को नियुक्ति पत्र तक देने पर भी लिखित रूप से रोक लगा दी है। 

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