{"_id":"59f095974f1c1b68678b7905","slug":"haryana-government-passed-land-consolidation-special-provisions-bill-2017","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"परियोजनाओं के आड़े आ रहे भूमि अधिग्रहण का सरकार ने निकाला तोड़, जानिए क्या?","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
परियोजनाओं के आड़े आ रहे भूमि अधिग्रहण का सरकार ने निकाला तोड़, जानिए क्या?
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Thu, 26 Oct 2017 09:11 AM IST
विज्ञापन
Haryana Assembly Manohar Lal Khattar
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हरियाणा सरकार ने विकास परियोजनाओं के आड़े आ रहे भूमि अधिग्रहण का तोड़ निकाल लिया है। सरकार प्रदेश में किसी भी किसान की भूमि का अधिग्रहण जबरन नहीं करेगी।
नए विकास प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित क्षेत्र में किसानों की भूमि आने पर जमीन के बदले जमीन दी जाएगी। बुधवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन इस फार्मूला को सिरे चढ़ाने के लिए सरकार ने हरियाणा परियोजना भूमि समेकन विशेष उपबंध विधेयक 2017 पारित कर दिया। हालांकि, कांग्रेस और इनेलो ने विधेयक का विरोध किया और इसे विवादास्पद बताया। विपक्ष ने इसे चहेतों को लाभ पहुंचाने वाला विधेयक बताया है।
विपक्ष के शोरशराबे के बावजूद सरकार ने विधेयक पारित कर विकास प्रोजेक्ट के लिए भूमि लेने का रास्ता साफ कर लिया। नए कानून में प्रावधान है कि प्रोजेक्ट के एक या अधिक राजस्व संपदा में आने वाली परियोजना के कुल क्षेत्र की सत्तर फीसदी या अधिक भूमि पर सरकार का स्वामित्व होना चाहिए। बाकि भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने केलिए सरकार कुल परियोजना भूमि की चकबंदी कर सकती है। चकबंदी कर किसानों को जमीन के बदले उसी राजस्व संपदा में या आसपास की राजस्व संपदा में सरकार जमीन ही मुहैया कराएगी। इसके लिए किसानों को समान मूल्य की जमीन दी जाएगी। समान मूल्य की जमीन न होने पर कलेक्टर रेट जमा बीस प्रतिशत किसान को दिया जाएगा। इस फार्मूले के तहत जमीन देने वाले किसानों को सरकार प्रोत्साहन के तौर पर इंसेंटिव भी देगी। यह राशि जल्दी तय की जाएगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
नए विकास प्रोजेक्ट के लिए चिन्हित क्षेत्र में किसानों की भूमि आने पर जमीन के बदले जमीन दी जाएगी। बुधवार को विधानसभा के शीतकालीन सत्र के अंतिम दिन इस फार्मूला को सिरे चढ़ाने के लिए सरकार ने हरियाणा परियोजना भूमि समेकन विशेष उपबंध विधेयक 2017 पारित कर दिया। हालांकि, कांग्रेस और इनेलो ने विधेयक का विरोध किया और इसे विवादास्पद बताया। विपक्ष ने इसे चहेतों को लाभ पहुंचाने वाला विधेयक बताया है।
विज्ञापन
विपक्ष के शोरशराबे के बावजूद सरकार ने विधेयक पारित कर विकास प्रोजेक्ट के लिए भूमि लेने का रास्ता साफ कर लिया। नए कानून में प्रावधान है कि प्रोजेक्ट के एक या अधिक राजस्व संपदा में आने वाली परियोजना के कुल क्षेत्र की सत्तर फीसदी या अधिक भूमि पर सरकार का स्वामित्व होना चाहिए। बाकि भूमि की उपलब्धता सुनिश्चित करने केलिए सरकार कुल परियोजना भूमि की चकबंदी कर सकती है। चकबंदी कर किसानों को जमीन के बदले उसी राजस्व संपदा में या आसपास की राजस्व संपदा में सरकार जमीन ही मुहैया कराएगी। इसके लिए किसानों को समान मूल्य की जमीन दी जाएगी। समान मूल्य की जमीन न होने पर कलेक्टर रेट जमा बीस प्रतिशत किसान को दिया जाएगा। इस फार्मूले के तहत जमीन देने वाले किसानों को सरकार प्रोत्साहन के तौर पर इंसेंटिव भी देगी। यह राशि जल्दी तय की जाएगी।
विज्ञापन
किसी प्राइवेट व्यक्ति को फायदा नहीं : मनोहर
Haryana Assembly
विधेयक पारित करने पर विपक्ष का वॉकआउट
विधानसभा सत्र के अंतिम समय में पारित किए गए परियोजना भूमि समेकन विशेष उपबंध विधेयक के विरोध में कांग्रेस और इनेलो विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। विपक्षी दल इस विधेयक को संशोधनों के साथ बजट सत्र में लाने की मांग कर रहे थे। कांग्रेस की तरफ से किरण चौधरी, रघुवीर कादियान व इनेलो की तरफ से परमिंद्र ढुल, जसविंद्र संधू और अन्य विधायकों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। साथ ही विधेयक के साथ भूमि न मिलने के कारण लंबित प्रोजेक्ट की सूची भी संलग्न करने की मांग उठाई।
किसी प्राइवेट व्यक्ति को फायदा नहीं : मनोहर
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि नया कानून किसी निजी व्यक्ति या कंपनी को फायदा नहीं पहुंचाएगा। इससे विकास कार्यों के लिए भूमि सुनिश्चित होगी। पुराने प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत हो चुकी जमीन को भविष्य में मिलने वाली जमीन से नहीं बदला जाएगा। कुछ परियोजनाएं संकट में पड़ जाती हैं व किसान जमीन देने को तैयार नहीं होते। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि किसानों को जमीन के बदले जमीन दें या फिर अगर वह प्रतिपूर्ति के लिए तैयार हैं तो वह की जाए।
विधानसभा सत्र के अंतिम समय में पारित किए गए परियोजना भूमि समेकन विशेष उपबंध विधेयक के विरोध में कांग्रेस और इनेलो विधायकों ने वॉकआउट कर दिया। विपक्षी दल इस विधेयक को संशोधनों के साथ बजट सत्र में लाने की मांग कर रहे थे। कांग्रेस की तरफ से किरण चौधरी, रघुवीर कादियान व इनेलो की तरफ से परमिंद्र ढुल, जसविंद्र संधू और अन्य विधायकों ने कड़ा विरोध दर्ज कराया। साथ ही विधेयक के साथ भूमि न मिलने के कारण लंबित प्रोजेक्ट की सूची भी संलग्न करने की मांग उठाई।
किसी प्राइवेट व्यक्ति को फायदा नहीं : मनोहर
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि नया कानून किसी निजी व्यक्ति या कंपनी को फायदा नहीं पहुंचाएगा। इससे विकास कार्यों के लिए भूमि सुनिश्चित होगी। पुराने प्रोजेक्ट के लिए अधिगृहीत हो चुकी जमीन को भविष्य में मिलने वाली जमीन से नहीं बदला जाएगा। कुछ परियोजनाएं संकट में पड़ जाती हैं व किसान जमीन देने को तैयार नहीं होते। ऐसे में यह जरूरी हो जाता है कि किसानों को जमीन के बदले जमीन दें या फिर अगर वह प्रतिपूर्ति के लिए तैयार हैं तो वह की जाए।