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किसानों को अब ‘भलाई’ गिनवाकर ‘लड़ाई’ खत्म कराने में जुटी हरियाणा सरकार, सीएम ने किये कई दावे
Sun, 13 Dec 2020 02:01 AM IST
दुष्यंत शर्मा
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Sun, 13 Dec 2020 02:01 AM IST
सार
- आंदोलनरत किसानों को मनाने में कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही हरियाणा सरकार
- किसानों के लिए अब तक क्या-क्या किया और आगे क्या किया जाएगा, इसके बारे में बताया जा रहा
- आत्मनिर्भर भारत के तहत हरियाणा ने केंद्र से मांगे हैं कृषि संबंधी परियोजनाओं के लिए करीब 6600 करोड़
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सिंघु बॉर्डर पर बैठे किसान
- फोटो : amar ujala
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विस्तार
किसान आंदोलन को किसी भी तरह खत्म किया जाए, इसके लिए हरियाणा सरकार कोई कसर बाकी नहीं छोड़ रही है। इसी वजह से सरकार अब किसानों को उनकी भलाई के लिए किए गए काम गिनवाकर उनके द्वारा छेड़ी गई ‘लड़ाई’ को खत्म कराने में जुट गई है। सरकार ने अभी तक किसानों के कल्याण के लिए क्या-क्या किया और आगे क्या करने जा रही है, इसकी आंकड़ों सहित जानकारियां केंद्र व हरियाणा सरकार किसानों तक विभिन्न माध्यमों से पहुंचा रही है।
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कोविड काल में सरकार ने कैसे किसानों को लाभ पहुंचाया, कैसे उनकी गेहूं की फसल खरीदने के लिए लॉकडाउन में वैकल्पिक मंडियों की व्यवस्था की और एमएसपी पर उनका सारा गेहूं खरीदा और किस तरह किसानों की पेमेंट सीधे उनके खातों में पहुंचाई इत्यादि जानकारियों से आंदोलन के इस दौर में किसानों को अवगत करवाया जा रहा है।
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आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत किसान संबंधी परियोजनाओं की जानकारी भी किसानों तक पहुंचाई जा रही है। हरियाणा सरकार ने भी इसी योजना के तहत कृषि संबंधी करीब 6600 करोड़ रुपये इसके लिए केंद्र सरकार से बजट मांगा हुआ है। प्रदेश के सीएम मनोहर लाल का दावा है कि इन परियोजनाओं से हरियाणा की किसानों में काफी सुधार आएगा और किसानों की आर्थिक हालत भी सुधरेगी।
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इसी तरह किसानों को यह भी बताया जा रहा है कि आत्मनिर्भर भारत योजना के तहत करीब ढाई करोड़ किसानों के लिए 2 लाख करोड़ के रियायती ऋण की भी व्यवस्था की गई है। किसान क्रेडिट कार्ड के लिए 76.82 लाख आवेदन आ चुके हैं और 58.53 लाख कार्ड किसानों को जारी किए जा चुके हैं। इसी तरह मत्स्य, पशुपालन और बागवानी किसानों को भी काफी अनुदान दिया जा रहा है। किसानों को 45 हजार करोड़ की आंशिक क्रेडिट गारंटी स्कीम और नाबार्ड द्वारा किसानों के लिए की गई 30 हजार करोड़ की अतिरिक्त इमरजेंसी वर्किंग कैपिटल फंड की व्यवस्था के बारे में भी बताया जा रहा है।
‘प्रदर्शनों में जिसने हिंसा की, वो हमारा आदमी नहीं’
किसान संगठनों को अभी तक इस बात का डर सता रहा है कि कुछ असामाजिक तत्व उनके शांतिप्रिय आंदोलन को खराब करने की साजिश कर रहे हैं। इसी वजह से किसान नेताओं ने अब दो टूक कह दिया है कि हमारे शांतिप्रिय प्रदर्शनों में यदि किसी ने भी हिंसा की तो वह हमारा आदमी नहीं होगा। पुलिस उसे तुरंत गिरफ्तार करे। भारतीय किसान यूनियन के प्रदेशाध्यक्ष गुरनाम सिंह चढ़ूनी ने कहा कि किसान संगठनों की संयुक्त संघर्ष समिति आंदोलन को लेकर जो फैसला करेगी, प्रदर्शनकारी किसानों को उसकी तहत कार्रवाई करनी है। अपनी मर्जी से कुछ नहीं करना है। चढ़ूनी ने कहा कि सभी किसान संगठन उपद्रव के बिल्कुल पक्ष में नहीं हैं।
हमने छह फसलें एमएसपी पर खरीदीं, पंजाब के किसान अपनी सरकारी व्यवस्था से परेशान
हरियाणा इकलौता राज्य है, जिसने छह फसलों को एमएसपी पर खरीदा है। प्रदेश सरकार ने मक्के को बाजार भाव से 600 रुपये प्रति क्विंटल अधिक और बाजरा को बाजार से 700 रुपये अधिक दाम पर खरीदा। वहीं एमएसपी पर धान की 56 लाख मीट्रिक टन खरीद हुई और पैसा सीधा किसानों के खाते में भेजा गया। पंजाब के किसान वहां की सरकार की खराब व्यवस्था से नाराज हैं और इसीलिए आंदोलनरत हैं। हम अपील करते हैं कि पंजाब से आए लोग सकारात्मक हैं और उम्मीद करते हैं कि सकारात्मकता बनी रहेगी और कोई असामाजिक तत्व किसान के आंदोलन में न घुसने पाए। दिल्ली बॉर्डर पर 1000 से ज्यादा सिविल प्रशासन के कर्मचारी सेवाएं दे रहे हैं। उनके साथ भी पूरा सहयोग बना रहा। चौधरी देवीलाल किसानों की आवाज थे और मेरी भी जिम्मेदारी है कि मैं किसानों के हक में काम करूं।
- दुष्यंत चौटाला, उप मुख्यमंत्री, हरियाणा