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कृषि कानूनों पर मचा बवाल, ऐसे किसानों को रिझाने में जुटी सरकार, गिना रही नफा-नुकसान
Thu, 10 Dec 2020 04:04 AM IST
ajay kumar
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: ajay kumar
Updated Thu, 10 Dec 2020 04:04 AM IST
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किसान आंदोलन। (फाइल फोटो)
- फोटो : अमर उजाला
किसान आंदोलन के बीच सरकार हर उस संभव प्रयास में जुटी है, जिससे किसानों का गुस्सा शांत हो और वे आंदोलन की राह छोड़ घर वापसी करें। इसी कड़ी में हरियाणा सरकार विभिन्न प्लेटफार्म पर किसानों को सरकारी योजनाओं के सहारे रिझाने का भरसक प्रयास कर रही है।
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अफसरों की ओर से किसानों को यह बताने का प्रयास किया जा रहा है कि सरकार उनकी आय बढ़ाने के संदर्भ में कितनी गंभीरता से आगे बढ़ रही है और ऐसी कौन सी योजनाएं हैं, जिसका सीधा लाभ लेने के बाद किसानों के लिए खेती व उससे जुड़े व्यवसाय फायदे का सौदा साबित होंगे।
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मगर इससे उल्ट आंदोलनरत किसान संगठनों ने यह साफ कर दिया है कि उनका आंदोलन इन योजनाओं से अलग कृषि कानूनों के मुद्दे पर है और वे अपनी इन कानूनों को वापस लेने की मांग पर पूरी तरह अडिग हैं। हरियाणा, पंजाब समेत विभिन्न राज्यों के किसान पिछले चौदह दिनों से दिल्ली के विभिन्न बॉर्डर पर अपनी मांगों के समर्थन में डटे हुए हैं।
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आंदोलनरत किसानों में सबसे ज्यादा पंजाब और हरियाणा के हैं। पंजाब सरकार जहां किसानों की मांग का खुला समर्थन कर रही है, वहीं हरियाणा सरकार अपने कुछ अलग प्रयासों से किसानों को मनाने में जुटी है। प्रदेश सरकार आंदोलन के बीच किसानों को उनकी आय दोगुनी करने संबंधी फार्मूलों, सरकारी योजनाओं और इन कृषि कानूनों के फायदे बताने में जुटी है।
किसानों के बीच किया जा रहा यह प्रचार
- नए कृषि सुधार कानूनों से आएगी किसानों के जीवन में समृद्धि, विघटनकारी और अराजकतावादी ताकतों द्वारा फैलाए जा रहे भ्रामक प्रचार से बचें, सच जानें और देशभर के किसान इनके एजेंडे से सतर्क रहें।
- सरकार ने पिछले वर्ष 279.91 लाख मीट्रिक टन की तुलना में इस वर्ष 336.67 लाख मीट्रिक टन से अधिक धान खरीदा है। इससे करीब 33 लाख किसान लाभान्वित हुए हैं और उन्हें 63563 करोड़ से अधिक का भुगतान हुआ है। कुल खरीद में पंजाब का योगदान 60 प्रतिशत से अधिक रहा।
- किसानों को व्यापारियों, कंपनियों, खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों व निर्यातकों से जोड़ा जाएगा।
- कांट्रैक्ट फार्मिंग के माध्यम से बुआई से पूर्व ही किसानों को उसकी उपज के दाम निर्धारित किए जाएंगे।
- बुआई से पूर्व किसान को मूल्य का आश्वासन, दाम बढ़ने पर न्यूनतम मूल्य के साथ अतिरिक्त लाभ मिलेगा।
- सोशल मीडिया पर ऐसे किसान नेताओं के वीडियो वायरल किए जा रहे हैं, जो इस नई व्यवस्था को किसानों के हित में बता रहे हैं।
- टपका सिंचाई प्रणाली में किसानों को 85 से 100 फीसदी तक सब्सिडी दी जा रही है।
- हैफेड के आउटलेट पर किसानों के उत्पादक बेचे जाएंगे, मत्स्य पालन, सूकर पालन, पशु पालन व बागवानी संबंधी योजनाओं में किसानों को भारी अनुदान दिया जाएगा।
कृषि संबंधी योजनाएं और कृषि कानून को लेकर सरकारी दलीलें अलग बात हैं। मगर किसानों का आंदोलन कृषि कानूनों को वापस कराने को लेकर है। किसान नेताओं ने केंद्र सरकार के संशोधन प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। सभी किसान संगठन तीनों कृषि कानूनों को रद्द कराने और एमएसपी (न्यूनतम समर्थन मूल्य) गारंटी कानून लागू करवाने पर अडिग हैं। - अभिमन्यु कोहाड़, प्रवक्ता, राष्ट्रीय किसान महासंघ।