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यादें 2015: निवेश आकर्षित करने को साल भर जुटी रही सरकार

Mon, 28 Dec 2015 04:33 PM IST
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़
हर्ष कुमार सलारिया/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Mon, 28 Dec 2015 04:33 PM IST
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haryana government investment policy related year ender 2015

हरियाणा की भाजपा सरकार ने 2015 में प्रदेश की वित्त व्यवस्था सुधारने की मंशा से जहां काफी हाथ खींचकर खर्च किया, वहां विदेशी निवेश के लिए पूरी ताकत झोंकी। साल 2015 के दौरान ही सरकार नई उद्योग नीति भी लेकर आई। इस बीच निवेशकों को आकर्षित करने के लिए सीएम मनोहर लाल खट्टर ने अपने प्रमुख मंत्रियों के साथ विदेश दौरा भी किया।

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बहरहाल इस कवायद के तहत साल भर में सरकार ने जितनी मेहनत की, उसके मुकाबले सफलता आंशिक ही मिली है। फिर भी सरकार के प्रयास निरंतर जारी हैं। नए साल में हैपनिंग हरियाणा समिट की तैयारी के साथ प्रदेश सरकार देशी-विदेशी निवेशकों को राज्य में लाने का एक बड़ा प्रयास करने वाली है।
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चार साल में एक लाख करोड़ के निवेश का लक्ष्य:
प्रदेश सरकार ने इस साल नई उद्योग नीति की घोषणा इंटरप्राइजेज इनवेस्टमेंट प्रमोशन पॉलिसी-2015 के रूप में की। मेक इन इंडिया के प्रारूप के अनुसार ही मेक इन हरियाणा पर जोर देते हुए इस पॉलिसी में देशी-विदेशी निवेशकों को प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए प्रोत्साहित करने की मंशा से कई तरह की छूट और सहूलियतों का खाका तैयार किया गया है।
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इसके तहत वैट, स्टांप ड्यूटी, बिजली और ब्याज में रियायत, प्रोजेक्टों की आसान क्लीयरेंस प्रक्रिया शामिल है। वर्ष के मध्य में की गई इस नीति की घोषणा के बाद प्रदेश सरकार ने एचएसआईआईडीसी के सहयोग से पूरे प्रदेश में औद्योगिक विकास के कई कदम उठाए, लेकिन सरकार को विदेशी निवेश की अभी प्रतीक्षा ही करनी पड़ रही है।

वर्ष के आरंभ में विदेश दौरे के दौरान भी प्रदेश सरकार ने अमेरिका और कनाडा की पांच कंपनियों के निवेश के करार किए, जबकि दर्जनों अन्य कंपनियों का दौरा कर उनके मालिकों से मुलाकात भी की थी। जिन कंपनियों से एमओयू साइन किए गए, उनमें अधिकतर के प्लांट पहले ही प्रदेश में लगे हैं और केवल विस्तार के ही समझौते हो सके।

उद्योगों के लिए खोला राहत का पिटारा:

- खट्टर सरकार ने इस साल नई उद्योग नीति के जरिए राज्य में देशी-विदेशी उद्योगपतियों के लिए राहत का पिटारा खोला है।
- अब तक उद्योगपतियों को एचएसआईआईडीसी से प्लाट मिलने के बाद बार-बार प्लाट की कीमत बढ़ने के चलते एन्हांसमेंट से परेशानी होती थी, लेकिन अब सरकार ने फैसला किया है कि जिसे भी एचएसएसआईडीसी का प्लाट मिलेगा, उसे एन्हांसमेंट नहीं देनी होगी।
- प्रदेश में उद्योग लगाने के लिए अब सभी प्रोजेक्ट की स्वीकृति के लिए समय सीमा दो माह तय कर दी गई है।
- एसएमई के लिए पर्यावरण अनुमति छोड़कर सभी अनुमतियां समाप्त कर दी गई हैं।
- पंजाब की तर्ज पर यहां सेक्टर आधार पर इंसेंटिव देने का प्रावधान।
- लेदर और स्टोन इंडस्ट्री को वैट से राहत देने का ऐलान।
- छोटे उद्योगों के लिए 1000 करोड़ का फंड स्थापित, कारोबारियों को कोलेटरल सिक्योरिटी के बिना मिल सकेगा बैंक लोन।
- 100 करोड़ व अधिक के निवेश पर कस्टमाइड पैकेज की व्यवस्था।

राज्य भर में उद्योगों के विस्तार की योजना:

सरकार ने राज्य से उद्योगों का पलायन रोकने के साथ-साथ पड़ोसी राज्यों के उद्योगपतियों को आकर्षित करने की योजना भी नई उद्योग नीति के अंतर्गत तैयार की है। दिल्ली व एनसीआर की आईटी, इलेक्ट्रॉनिक, फार्मा और मेडिकल क्षेत्र की कंपनियों को प्रदेश में कुंडली, मानेसर, पलवल इंडस्ट्रियल कॉरिडोर पर खास रियायत दी जाएगी। यूपी की इंजीनियरिंग, फुटवियर और फूड प्रोसेसिंग इंडस्ट्री को निकटवर्ती फरीदाबाद और पलवल में लाने की योजना बनाई गई है। पंजाब सीमा से सटे जिलों में प्रदेश सरकार ने इंजीनियरिंग, ऑटोपार्ट और लेदर गुड्स से जुड़े उद्योगों को स्थापित करने के लिए टैक्स रियायतों का ऐलान किया ही। जबकि मैटल इंडस्ट्री के लिए हिसार में आधारभूत ढांचा विकसित किया जा रहा है।


अब हैपनिंग हरियाणा समिट:
बड़े उद्योग घरानों और विदेशी निवेशकों को लुभाने की कोशिशों में जुटी रही हरियाणा सरकार लक्ष्य से भटकी नहीं है। नए साल 2016 के शुरू से ही अपने प्रयासों में और तेजी लाते हुए ‘हैपनिंग हरियाणा ग्लोबल इनवेस्टर्स शिखर सम्मेलन 2016’ के आयोजन की तैयारियां जोरशोर से शुरू कर दी गई हैं। इस समिट के लिए न सिर्फ देश भर के उद्योगों को बल्कि अनेक देशों को भी निमंत्रण पत्र भेजे जा रहे हैं। सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी व अन्य केंद्रीय नेताओं की शिरकत ने खट्टर सरकार की उम्मीदों को पंख लगा दिए हैं।

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