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Haryana: दस जिलों में हुए 10618 करोड़ के वैट घोटाले को हरियाणा सरकार ने नकारा, ईडी ने कहा-जांच जरूरी

Mon, 21 Nov 2022 10:30 PM IST
निवेदिता वर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: निवेदिता वर्मा Updated Mon, 21 Nov 2022 10:30 PM IST
सार

हरियाणा सरकार  ने बताया कि इस घोटाले में 10000 करोड़ तो बिल्डरों से जुड़ा है और बिल्डरों के कर को लेकर हाईकोर्ट कई मामलों में वैट रिकवरी पर रोक लगा चुका है। हरियाणा सरकार ने सीधे तौर पर इस घोटाले की राशि को नकार दिया है।

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Haryana government denied VAT scam of 10618 crores
scam - फोटो : फाइल फोटो

विस्तार

हरियाणा के दस जिलों में हुए वैट रिफंड घोटाले के मामले में 10618 हजार करोड़ के घोटाले के दावे को जहां हरियाणा सरकार ने नकार दिया है वहां ईडी ने हर मामले की जांच को जरूरी बताया है। ईडी ने बताया कि इस मामले में 74 एफआईआर दर्ज की गई थी और इनमें से 7 में कैंसिलेशन रिपोर्ट दाखिल की गई हैं और 20 में चालान पेश किया जा चुका है। 

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इसी मामले में याचिकाकर्ता ने एक अर्जी देकर कोर्ट को बताया था कि हरियाणा सरकार वैट घोटाले में छोटे व्यापारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई कर रही है लेकिन जिनके खिलाफ लोकायुक्त ने सीबीआई जांच की सिफारिश की थी उनको सरकार बचा रही थी। सरकार छोटे व्यापारियों के खिलाफ काफी संख्या में एफआईआर दर्ज कर रही है ताकि असली दोषियों को बचाया जा सके। हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार से जब यह पूछा था कि उसने लोकायुक्त की एसआईटी की जांच रिपोर्ट पर क्या कार्रवाई की हैं तो इस पर सरकार ने जवाब दायर कर कहा था कि लोकायुक्त की एसआईटी ने इस मामले में सनसनी फैलाने के लिए बढ़ा चढ़ा कर पेश किया जबकि ऐसा कुछ नही हुआ था। 
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इस पर याचिकाकर्ता के वकील प्रदीप रापिड़या ने कोर्ट को कहा कि इस मामले में हरियाणा सरकार का जवाब संदेह पैदा करता है क्योंकि खुद हरियाणा सरकार यह कह चुकी है कि इस मामले में 2000 करोड़ रूपये से ज्यादा की रिकवरी की जा चुकी है तो ऐसे में लोकायुक्त की एसआईटी पर सरकार की ऐसी टिप्पणी उचित नही है। हरियाणा में वर्ष 2004 से चर्चित वैट घोटाले की जांच हाईकोर्ट के आदेश पर विशेष रूप से गठित कमेटी ने की थी। इस जांच में 10000 करोड़ के घोटाले का खुलासा हुआ था और इसमें अनेक बड़े व्यापारियों और बिल्डरों के शामिल होने के संकेत मिले थे। 
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हरियाणा सरकार  ने बताया कि इस घोटाले में 10000 करोड़ तो बिल्डरों से जुड़ा है और बिल्डरों के कर को लेकर हाईकोर्ट कई मामलों में वैट रिकवरी पर रोक लगा चुका है। हरियाणा सरकार ने सीधे तौर पर इस घोटाले की राशि को नकार दिया है। ईडी ने कहा कि इस मामले में हर एफआईआर की अलग-अलग जांच जरूरी है। गुरुग्राम में 26, फरीदाबाद में 17, सिरसा में 16, झज्जर में 4, कैथल, हिसार और पानीपत में 3 -3 और रेवाड़ी में 2 एफआईआर दर्ज हैं। हरियाणा का एक्साइज एंड टेक्सेशन विभाग अपने ही कर्मचारियों के खिलाफ केस दर्ज कर रहा है और ऐसे में अभी जांच का पूर्ण स्वरूप बताया नहीं जा सकता। हाईकोर्ट ने इस मामले में ईडी की रिपोर्ट को रिकार्ड पर लेते हुए सुनवाई स्थगित कर दी है।

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