हरियाणाः वर्षों से मान्यता प्राप्त स्कूलों पर सरकार ने कसा शिकंजा, संचालकों में मचा हड़कंप
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हरियाणा में सालों से स्थायी मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों पर सरकार ने नकेल कसनी शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी मान्यता प्राप्त स्कूलों से ब्योरा उपलब्ध कराने को कहा है। फार्म नंबर-दो भरकर स्कूलों को भवन सहित मौजूद सभी सुविधाओं की जानकारी मुहैया करानी होगी। सरकार के ब्योरा मांगने से निजी स्कूल संचालकों में हड़कंप मच गया है।
सरकार ने यूटर्न न मारा तो लगभग सौ करोड़ रुपये का राजस्व आएगा। चूंकि, प्रदेश के बहुत से निजी स्कूल आज भी दुकानों में चल रहे हैं। ढांचागत सुविधाएं न के बराबर हैं। सरकार से एनओसी लेकर आज तक बचते रहे। स्कूल शिक्षा विभाग के पास प्रदेश में कितने मान्यता प्राप्त स्कूल हैं, इसका भी पूरा रिकॉर्ड नहीं है।
पहले जिला स्तर पर ही मान्यता दे दी जाती थी, फिर शिक्षा निदेशालय पर दी जाने लगी। आज तक विभाग ने इसका रिकार्ड ही संकलित नहीं किया। अब सरकार ने सभी निजी स्कूलों को फार्म नंबर-दो भरकर पूरी जानकारी मुहैया कराने के निर्देश दिए हैं। जिसका स्कूल कड़ा विरोध कर रहे हैं तो अभिभावकों और स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन ने सरकार की कार्रवाई का स्वागत किया है।
आदेश वापस न लिए तो आंदोलन : कुंडू
हरियाणा प्राइवेट स्कूल संघ के प्रदेशाध्यक्ष सत्यवान कुंडू, संरक्षक तेलूराम व उपप्रधान संजय धतरवाल ने कहा कि शिक्षा विभाग ने प्राइवेट स्कूलों को दोबारा फार्म नंबर-दो भरने संबंधी आदेश वापस न लिए तो बड़ा आंदोलन करने से पीछे नहीं हटेंगे। स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों को पत्र जारी कर दस वर्ष पहले स्थायी मान्यता ले चुके स्कूलों को दोबारा से निर्धारित फीस सहित फार्म नंबर दो भरने के आदेश दिए हैं।
यह प्राइवेट स्कूलों को तंग करने की योजना है। फार्म नंबर-दो भरने से दोबारा जिला स्तरीय कमेटी स्कूलों का निरीक्षण करेगी, सभी शर्तें पूरी करने वाले स्कूल को स्थायी मान्यता दे दी जाएगी। अनेक स्कूल ऐसे भी हैं जो सरकार के वर्तमान नियम व शर्तों को पूरा नहीं करते। अगर उनकी मान्यता रद्द करने की सोची गई तो स्कूल संचालक सड़कों पर उतरेंगे।
स्कूल चल रहे या नहीं, यह देखेगा विभाग : प्रसाद
प्राइवेट स्कूल संघ का प्रतिनिधिमंडल शिक्षा सदन पंचकूला में संयुक्त निदेशक राजीव प्रसाद से मिला। प्रसाद ने कहा कि यह फार्म भरवाकर विभाग देखना चाहता है कि स्थायी मान्यता प्राप्त कितने स्कूल चल रहे हैं, और कितने नहीं। इस पर सत्यवान कुंडू ने कहा कि शिक्षा बोर्ड हर वर्ष स्थायी मान्यता प्राप्त स्कूलों से निरंतरता फीस के रूप में दो हजार रुपये भरवाता है, उससे पता चल जाता है कि स्कूल चल रहे हैं या नहीं। दोबारा फार्म भरवाने की बजाए शपथपत्र लेकर भी स्कूलों की स्थिति स्पष्ट की जा सकती है। संयुक्त निदेशक ने आश्वासन दिया कि इस प्रक्रिया को सरल किया जाएगा।
सरकार की पहल का स्वागत : परमार
स्वास्थ्य शिक्षा सहयोग संगठन के प्रदेशाध्यक्ष बृजपाल परमार, महासचिव भारत भूषण बंसल और सचिव सलाऊद्दीन ने कहा कि स्कूल शिक्षा विभाग ने देर से सही मगर उचित कदम उठाया है। स्थायी मान्यता के बाद रिन्यूअल की प्रक्रिया कभी शुरू ही नहीं हुई। अनेक निजी स्कूल आज भी एक-दो कमरों में चल रहे हैं।