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स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशें, हरियाणा में सी-टू फार्मूले के तहत फसल का रेट तय नहीं होगा
Fri, 18 Sep 2020 10:58 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Fri, 18 Sep 2020 10:58 AM IST
सार
- सरकार ने इन सिफारिशों को लागू करने का मन बनाया
- एक को छोड़ लागू होंगी आयोग की 201 सिफारिशें
- जमीन के आधार पर फसल रेट तय करने से किनारा
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सीएम मनोहर लाल, मंत्री अनिल विज
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विस्तार
स्वामीनाथन आयोग की सिफारिशों में सी-टू फार्मूले से हरियाणा ने किनारा कर लिया है। इस फार्मूले को प्रदेश सरकार न तो तर्कसंगत मानती है और न ही सूबे में इसे लागू किया जाएगा। इसके अलावा आयोग की 201 सिफारिशों को हरियाणा सरकार ने प्रदेश में लागू करने का मन बना लिया है। सरकार का दावा है कि किसानों के हित में हर सिफारिश और फैसला प्रदेश में लागू किया जाएगा।
बताते चलें कि स्वामीनाथन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में किसानों से जुड़ी दो सौ से अधिक सिफारिशें की हैं। इन सिफारिशों को लागू करने को लेकर बरसों से राजनीति चल रही है। प्रदेश सरकारें इन सिफारिशों को लागू करने के लिए स्वतंत्र हैं। हरियाणा में भी ये मुद्दा किसानों को लेकर की जाने वाली विभिन्न दलों की राजनीति का केंद्र बना रहा। हरियाणा सरकार ने इन सिफारिशों को लागू करने का मन तो बना लिया है और इस पर काम भी चल रहा है। इन्हीं सिफारिशों में सी-टू फार्मूला भी एक है।
जिसके तहत किसानों की जमीनों के रेट के आधार पर फसल का रेट तय करने की सिफारिश की गई है। मगर सरकार का दावा है कि इस सिफारिश को राज्य में लागू करना संभव ही नहीं है। हरियाणा की भौगोलिक स्थिति यदि देखें तो प्रदेश में जमीन का रेट 10 से 12 लाख रुपये प्रति एकड़ से लेकर 10 करोड़ प्रति एकड़ तक है। हर क्षेत्र के स्थानीय फैक्टर वहां जमीनों के रेट को प्रभावित करते हैं। इसलिए इस फार्मूले का हरियाणा में लागू करना सरकार तर्कसंगत नहीं मानती।
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बताते चलें कि स्वामीनाथन आयोग ने अपनी रिपोर्ट में किसानों से जुड़ी दो सौ से अधिक सिफारिशें की हैं। इन सिफारिशों को लागू करने को लेकर बरसों से राजनीति चल रही है। प्रदेश सरकारें इन सिफारिशों को लागू करने के लिए स्वतंत्र हैं। हरियाणा में भी ये मुद्दा किसानों को लेकर की जाने वाली विभिन्न दलों की राजनीति का केंद्र बना रहा। हरियाणा सरकार ने इन सिफारिशों को लागू करने का मन तो बना लिया है और इस पर काम भी चल रहा है। इन्हीं सिफारिशों में सी-टू फार्मूला भी एक है।
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जिसके तहत किसानों की जमीनों के रेट के आधार पर फसल का रेट तय करने की सिफारिश की गई है। मगर सरकार का दावा है कि इस सिफारिश को राज्य में लागू करना संभव ही नहीं है। हरियाणा की भौगोलिक स्थिति यदि देखें तो प्रदेश में जमीन का रेट 10 से 12 लाख रुपये प्रति एकड़ से लेकर 10 करोड़ प्रति एकड़ तक है। हर क्षेत्र के स्थानीय फैक्टर वहां जमीनों के रेट को प्रभावित करते हैं। इसलिए इस फार्मूले का हरियाणा में लागू करना सरकार तर्कसंगत नहीं मानती।
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सी-टू फार्मूले से फिलहाल किनारा ही रहेगा
इसी के चलते प्रदेश सरकार ने निर्णय लिया है कि स्वामीनाथन आयोग की 201 सिफारिशों को हरियाणा में लागू किया जाएगा। मगर सी-टू फार्मूले से फिलहाल किनारा ही रहेगा। इसलिए ये सिफारिश प्रदेश में लागू नहीं की जाएगी। प्रदेश के मुखिया मनोहर लाल ने भी साफ कर दिया है कि सी-टू फार्मूले को सूबे में लागू करना असंभव है। इसलिए हमने ये बिंदु फिलहाल छोड़ दिया है।
उनके अनुसार वैसे भी स्वमीनाथन आयोग की रिपोर्ट एक सिफारिश है, न कि कानून, जिसे मानने के लिए बाध्य हुआ जाए। फिर भी हमने प्रदेश में एक सिफारिश को छोड़कर बाकी सभी लागू करने की पहल सिर्फ और सिर्फ किसान हित के लिए की है। दूसरी ओर, प्रदेश की किसान यूनियनें स्वामीनाथन आयोग की सी टू फार्मूले के तहत फसलों का रेट तय करने पर अड़ी हुई है।
किसान नेता हरकेश सिंह और परमजीत सिंह का कहना है कि यदि सचमुच वर्ष 2022 तक सरकार को किसानों की आय दोगुनी करनी है तो इस सिफारिश को लागू जरूर करना चाहिए, क्योंकि ये किसान हित में है। उनके अनुसार किसानों की ये मांग बुलंद रहेगी।
उनके अनुसार वैसे भी स्वमीनाथन आयोग की रिपोर्ट एक सिफारिश है, न कि कानून, जिसे मानने के लिए बाध्य हुआ जाए। फिर भी हमने प्रदेश में एक सिफारिश को छोड़कर बाकी सभी लागू करने की पहल सिर्फ और सिर्फ किसान हित के लिए की है। दूसरी ओर, प्रदेश की किसान यूनियनें स्वामीनाथन आयोग की सी टू फार्मूले के तहत फसलों का रेट तय करने पर अड़ी हुई है।
किसान नेता हरकेश सिंह और परमजीत सिंह का कहना है कि यदि सचमुच वर्ष 2022 तक सरकार को किसानों की आय दोगुनी करनी है तो इस सिफारिश को लागू जरूर करना चाहिए, क्योंकि ये किसान हित में है। उनके अनुसार किसानों की ये मांग बुलंद रहेगी।