मिलिए, देश की पहली बेस्ट एनसीसी महिला कैडेट से
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कुमुदनी भूटानी, यह सिर्फ एक नाम नहीं है बल्कि रेवाड़ी शहर के साथ ही पूरे हरियाणा के लिए यह वह नाम है जिसने पूरे हरियाणा का गर्व से सिर ऊंचा करने का मौका दिया है।
रेवाड़ी शहर स्थित सती कालोनी में रहने वाली कुमुदनी ने देश के कई एनसीसी कैडेट का मुकाबला करते हुए रिपलब्लिक-डे कैंप के दौरान देश की बेस्ट महिला कैडेट होने का खिताब हासिल किया है।
खास बात यह है कि प्रदेश में एनसीसी के 50 साल के इतिहास में वह पहली महिला कैडेट हैं, जिन्हें यह पुरस्कार मिला है। बारहवीं तक की शिक्षा शहर स्थित जैन पब्लिक स्कूल से हासिल करने वाली कुमुदनी इस समय चंडीगढ़ के कॉलेज में ग्रेजुएशन सेकेंड ईयर की छात्रा हैं।
इस खिताब के लिए प्रधानमंत्री और एनसीसी हेड मिलकर चयन करते हैं। कुमुदनी इस साल दिल्ली में आयोजित गणतंत्र दिवस के दौरान परेड में भी शामिल हुई थी।
मां की प्रेरणा बनी कुम्मू की शक्ति
कुमुदनी को घर में माता-पिता और परिवार के अन्य लोग प्यार से कुम्मू बुलाते हैं। एक छोटी बहन जाह्नवी है। प्रेरणा कहां से मिली, इस सवाल के जवाब पर कुम्मू कहती हैं कि मां अंजली की बचपन से इच्छा थी कि अन्य लड़कियों की तरह घर में ही बैठकर न रहूं, बल्कि बोल्ड और ब्रेव बेटी बनूं। मां ने ही एनसीसी में दाखिला करवाया, इसके बाद गोपाल सर ने ट्रेंड किया। कुमुदनी की रोल मॉडल देश की पहली महिला आईपीएस किरन बेदी हैं।
पीएम के हाथ से होना था पुरस्कृत
देश की बेस्ट कैडेट होने का खिताब हासिल करने वाली कुमुदनी का रास्ता इतना आसान नहीं था। इस खिताब के लिए उनके अलावा 17 पुरुष एनसीसी कैडेट और 17 ही महिला एनसीसी कैडेट थे।
सभी को पीछे छोड़ते हुए कुमुदनी ने यह खिताब हासिल किया। हालांकि उसे इस बात का थोड़ा मलाल है कि इस खिताब को वह पीएम मोदी की व्यस्तता के चलते उनके हाथ से हासिल नहीं कर पाईं। कुमुदनी का सपना डिफेंस ज्वाइन कर देश सेवा करने का है।
जिले की बेटी कुमुदनी ने जिला ही नहीं, पूरे प्रदेश का नाम रोशन किया है। सम्मानित करने के लिए प्रशासन की ओर से रिकमंडेशन भेजा जाएगा।
- डॉ. यश गर्ग, उपायुक्त, जिला रेवाड़ी