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हरियाणा में 4 BJP विधायकों की सदस्यता को खतरा, हाईकोर्ट ने जारी किया फरमान

Sat, 03 Feb 2018 06:01 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 03 Feb 2018 06:01 PM IST
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haryana formar cps assembly membership case in highcourt
हरियाणा कैबिनेट की बैठक​ - फोटो : अमर उजाला
हरियाणा में भाजपा के चार विधायकों की सदस्यता को खतरा पैदा हो गया है। मामले में हाईकोर्ट ने सरकार को सिर्फ तीन महीने की मोहलत दी है। हाईकोर्ट ने हरियाणा में दो साल पहले नियुक्त हुए चार मुख्य संसदीय सचिवों (सीपीएस) की विधानसभा सदस्यता को लेकर मुख्य सचिव को फैसला लेने का आदेश दिया है। इससे पूर्व हाईकोर्ट ने इन चारों की नियुक्ति को गैर संवैधानिक करार दिया था जिसके बाद उन्होंने इस्तीफा दे दिया था।
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हाईकोर्ट ने यह फैसला वकील जगमोहन सिंह भट्टी द्वारा दायर याचिका पर सुनाया था। भट्टी ने ही अब दोबारा याचिका दायर कर दिल्ली के आप विधायकों की तर्ज पर इन चारों पूर्व मुख्य संसदीय सचिवों की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की है। हाईकोर्ट ने याचिका का निपटारा करते हुए हरियाणा के मुख्य सचिव को तीन महीने में याची की मांग पर उचित कदम उठाने को कहा।
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भट्टी ने याचिका दाखिल करते हुए कहा कि संसदीय सचिव पद पर रहने के कारण जब दिल्ली के आप विधायकों की सदस्यता को रद्द कर दी गई तो हरियाणा में भी ऐसा ही किया जाना चाहिए। दिल्ली में विधायक संसदीय सचिव थे जबकि हरियाणा में मुख्य संसदीय सचिव जो एक ही तरह के पद है और लाभ के पद की परिभाषा में आते हैं। एक देश में दो तरह के कानून तो नहीं हो सकते। ऐसे में बड़खल की विधायक सीमा त्रिखा, हिसार के विधायक डा. कमल गुप्ता, असंध के विधायक बख्शीश सिंह विर्क और रादौर के विधायक श्याम सिंह राणा की विधानसभा सदस्यता को समाप्त की जानी चाहिए।
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एक्ट बनाकर सीपीएस को ऑफिस ऑफ प्रोफिट से बाहर किया
पूर्व सीपीएस की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की अपील वाली याचिका पर हरियाणा सरकार ने चारों का बचाव करते हुए कहा कि सरकार ने एक्ट में बदलाव कर मुख्य संसदीय सचिवों को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट के दायरे से बाहर रखा है। सीपीएस को मंत्री या उप मंत्री का दर्जा नहीं दिया गया है। सरकार का दावा है कि सीपीएस खुद से कोई भी फैसले नहीं ले सकते। वह मंत्रियों की मदद करने के लिए हैं। चूंकि वह अन्य विधायकों के मुकाबले अतिरिक्त काम करते हैं, इसलिए उन्हें थोड़ा अतिरिक्त फायदा मिलता है।


दिल्ली के विधायक लाभ का पद होने के कारण अपनी सदस्यता खोने को मजबूर हुए क्यों की दिल्ली सरकार ने जब इन विधायक को नियुक्ति दी उस समय उन पद को लाभ के पद से बाहर नहीं निकाला। बाद में सरकार ने ऐसा करने की कोशिश की थी लेकिन उपराज्यपाल ने सरकार की मांग खारिज कर दी थी। जबकि हरियाणा में इन नियुक्ति से पहले ही सीपीएस को ऑफिस ऑफ प्रॉफिट यानी लाभ के पद से बाहर कर दिया था।







 
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