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हरियाणा ने दिलाया IAS संजीव को मैग्सेसे, देखिए कैसे?

Thu, 30 Jul 2015 12:40 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 30 Jul 2015 12:40 PM IST
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haryana connection of rayman magesses award winner sanjeev chaturvedi

प्रतिष्ठित मैग्सेसे अवार्ड के लिए चुने गए संजीव चतुर्वेदी का हरियाणा से बेहद खास जुड़ाव रहा। वे हरियाणा में 2002 बैच के आईएफएस अफसर रहे और केंद्र में इन दिनों संजीव की बिना विभाग नियुक्ति से यह साबित हो चुका है कि सरकार ने इस अधिकारी की कोई कद्र नहीं की है।

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हरियाणा में हुड्डा सरकार के कार्यकाल के दौरान संजीव चतुर्वेदी की नियुक्ति जिस विभाग में भी हुई, उन्होंने उस विभाग में जारी भ्रष्टाचार को उजागर करते हुए दोषियों पर कार्रवाई के आदेश किए। ताज्जुब है कि पांच साल के कार्यकाल में संजीव चतुर्वेदी का बारह बार तबादला हुआ।
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राजनेताओं को रास नहीं आए संजीव

haryana connection of rayman magesses award winner sanjeev chaturvedi

आईएफएस अफसर बनने के बाद चतुर्वेदी की पहली नियुक्ति कुरुक्षेत्र में हुई थी। वहां उन्होंने हांसी-बुटाना नहर बनाने वाले ठेकेदारों पर घटिया निर्माण सामग्री के लिए एफआईआर दर्ज कराई थी। इसके बाद उन्हें वन विभाग में भेजा गया तो उन्होंने वन विभाग में भी करोड़ों रुपये के घोटाले को बेनकाब किया।

मामला सियासी नेताओं की जमीनों पर हर्बल पार्क के नाम पर पौधरोपण की आड़ में करोड़ों के घोटाले था, इसलिए संजीव चतुर्वेदी हुड्डा सरकार के निशाने पर आ गए। उनका तत्कालीन मंत्री किरण चौधरी के साथ तो सीधा विवाद रहा।

होना तो यह चाहिए था कि ईमानदार अधिकारी को सरकार पुरस्कृत करती, लेकिन हुड्डा सरकार ने संजीव चतुर्वेदी के खिलाफ तबादले के साथ कई तरह की जांच के आदेश जारी कर दिए। कई बार जांच कराई गई, मगर हर बार वे बेकसूर साबित हुए। हुड्डा सरकार ने संजीव चतुर्वेदी को तीन बार चार्जशीट भी किया, पर तीनों बार राष्ट्रपति ने सरकार की चार्जशीट को निरस्त कर दिया।

हरियाणा के बाद केंद्र सरकार ने भी कर दिया किनारे

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संजीव चतुर्वेदी ने साल 2012 में केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी, लेकिन हुड्डा सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी। जबकि केंद्र सरकार ने भी हरियाणा सरकार से उन्हें अनुमति देने को कहा। आखिरकार केंद्र ने उन्हें एम्स में सीवीओ के पद पर नियुक्ति दी तो उनके सामने मामला झज्जर में बनाए जाने वाले एम्स का आया।

मामले में भी चतुर्वेदी ने घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का भंडाफोड़ किया। एम्स में बतौर सीवीओ अपने दो साल के कार्यकाल में चतुर्वेदी ने 150 से ज्यादा भ्रष्टाचार के मामले उजागर किए। साल 2014 में हालांकि तत्कालीन स्वास्थ्य सचिव ने उन्हें ईमानदार अधिकारी का तमगा दिया, पर केंद्र में भाजपा की सरकार आते ही उन्हें पद से हटा दिया गया।

वे अब तक बिना विभाग के केंद्र में नियुक्त हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार से संजीव चतुर्वेदी को दिल्ली सरकार में भेजने की मांग की थी। बावजूद इसके करीब एक साल से केंद्र ने इस पर कोई फैसला नहीं लिया है।

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हरियाणा में यह बीती संजीव चतुर्वेदी पर

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साल 2009 में झज्जर में लगभग पांच करोड़ रुपये का वन घोटाला उन्होंने उजागर किया। इसमें कागजों में मजदूरी पर पांच करोड़ खर्च किए जाने की बात कही गई थी। जिले को हरा-भरा करने का आश्वासन दिया गया था। बावजूद इसके जब जांच हुई तो न जिले में हरियाली देखने को मिली और न ही मजदूरों को मेहनताना मिला था।

इसके साथ ही चतुर्वेदी ने अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों की ओर से पौधारोपण के लिए भेजे गए अनुदान में गोलमाल का मामला भी उजागर कर दिया। उसमें लिप्त पांच रेंज अफसरों समेत 40 कर्मचारियों को निलंबित किया गया। चूंकि झज्जर रोहतक संसदीय क्षेत्र का हिस्सा है और यह मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा का क्षेत्र होने के कारण राज्य सरकार को यह सब रास नहीं आया।

सरकार ने चतुर्वेदी के खिलाफ आरोपपत्र में कहा कि हरियाणा में नियुक्ति के दौरान चतुर्वेदी को पौधरोपण की जो जिम्मेदारी दी गई थी, उसमें वह विफल रहे, लेकिन हरियाणा सरकार का यह आरोप पत्र संजीव चतुर्वेदी द्वारा राष्ट्रपति के समक्ष ले जाए जाने के बाद ठहर नहीं पाया। राष्ट्रपति ने इसे निरस्त कर दिया था।

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