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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana CM Manohar Lal shared three stories related to his life in Amar Ujala Medhavi Chhatra Samman Samaroh

सम्मान समारोह: आप जानते हैं हरियाणा CM से जुड़े ये 3 किस्से, खुद किया साझा, रोचक है कैलेंडर बनाने की कहानी

Wed, 16 Aug 2023 10:39 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Wed, 16 Aug 2023 10:39 PM IST
सार

10वीं में मेरे 66 प्रतिशत अंक थे और मैं पूरे ब्लॉक में पहले स्थान पर आया था। उस समय तो जो 60 के ऊपर चला जाता था तो वह मेधावी माना जाता था। कोई नहीं सोचता था कि 80-85 नंबर आएंगे। अगर किसी के आते थे तो तो सोचते थे कि कोई गड़बड़ हो गई लेकिन अब बच्चों के 100 प्रतिशत तक अंक आते हैं।

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Haryana CM Manohar Lal shared three stories related to his life in Amar Ujala Medhavi Chhatra Samman Samaroh
मेधावी छात्र-छात्राओं के साथ मौजूद सीएम मनोहर लाल। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर उजाला मेधावी छात्र समारोह का आयोजन हरियाणा के पंचकूला में किया गया। इस दौरान हरियाणा के सीएम मनोहर लाल ने मेधावी छात्र-छात्राओं को सम्मानित किया। उन्होंने मेधावियों को जीवन की कई सीख दी। अपने जीवन के तीन किस्से भी साझा किए।  छात्र जीवन में मेधावी से लेकर शोधार्थी बनने, कारोबार करने व राजनीति में आने तक के तीन किस्सों से मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कार्यक्रम को चार चांद लगा दिए। आइये जानते हैं इन किस्सों को...

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मुख्यमंत्री को याद आया अपना बचपन

मनोहर लाल ने मन संवाद के दौरान बताया कि बात 1969 की है। उस समय वह कक्षा नौवीं में थे। सरकार के एक आदेश के बाद स्कूल के सभी अध्यापकों को तबादला हो गया। नए विज्ञान अध्यापक पीडी शर्मा (प्रभुदयाल शर्मा) को एक किलोमीटर दूर बस स्टैंड अपने साइकिल पर लाने की जिम्मेदारी उन्हें दी गई। रास्ते में बातचीत के दौरान पता चला कि विज्ञान की भी दो धाराएं होती हैं।

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एक है फिजिक्स-केमिस्ट्री वाली साइंस और दूसरी जनरल साइंस। वे तो जनरल साइंस के छात्र थे। अध्यापक ने कहा कि उनका भविष्य तो खत्म हो गया। इसके बाद उन्होंने बाकी छात्रों से बात की। उनको बताया कि हम सभी का भविष्य तो खत्म हो गया है। हमें फिजिक्स-केमिस्ट्री वाली साइंस लेनी है। अध्यापक से बात की तो उन्होंने कहा कि कम से कम 15 छात्र होने जरूरी हैं। जैसे-तैसे करके बाकी छात्रों को तैयार किया और तब जाकर विज्ञान में दाखिला मिला। उन्होंने कहा कि जरूरी नहीं है कि विज्ञान ही लेना है, हर फील्ड में संभावनाएं हैं। इसलिए विद्यार्थी को अपनी रुचि के अनुसार विषय चुनने चाहिए।

मैं अपने ब्लॉक में प्रथम आया था

10वीं में मेरे 66 प्रतिशत अंक थे और मैं पूरे ब्लॉक में पहले स्थान पर आया था। उस समय तो जो 60 के ऊपर चला जाता था तो वह मेधावी माना जाता था। कोई नहीं सोचता था कि 80-85 नंबर आएंगे। अगर किसी के आते थे तो तो सोचते थे कि कोई गड़बड़ हो गई लेकिन अब बच्चों के 100 प्रतिशत तक अंक आते हैं।

खुद तैयार किया जीवन पर्यंत चलने वाला कैलेंडर

सीएम ने जीवन के एक किस्से की उदाहरण देकर बताया कि प्रैक्टिकल का जीवन में कितना योगदान होता है। कहा, 10वीं के बाद आगरा गए थे। वहां लाल किले के सामने एक कैलेंडर बिकता देखा। वह 20 साल का कैलेंडर था। उसे देख काफी हैरानी हुई। उस समय पैसे नहीं थे तो खरीद नहीं पाए, लेकिन प्रैक्टिकल वहां देखा और डेढ़ साल बाद मैंने एक ऐसा कैलेंडर तैयार किया जो हमेशा यानी जीवन पर्यंत चलता।



किसी भी साल की तारीख बता देता था। मैंने इसे इलाहाबाद के ममफोर्डगंज के शिक्षक आर गुप्ता को भेजा। उन्होंने काफी सराहना की लेकिन एक लाइन नीचे लिख दी कि ऐसा कैलेंडर वे 1912 में बना चुके हैं। उस दिन उनकी खोज बर्बाद हो गई लेकिन वे निराश नहीं हुए, क्योंकि उनको एक नई सीख मिली।

12वीं के बाद छोड़ दी थी पढ़ाई, शुरू किया व्यापार

सीएम मनोहर लाल ने कहा कि 16 अगस्त उनके जीवन का अहम दिन है। 51 साल पहले आज के ही दिन 1972 में उन्होंने 12वीं करने के बाद पढ़ाई छोड़कर दिल्ली में अपना कपड़े का कारोबार शुरू किया था। उस समय अपने पार्टनर को मैंने फोन करके बात की और कहा कि 51 साल की कहानी कैसे निकल गई, पता ही नहीं चला। मैंने जीवन में ठान लिया था, कुछ करना है और विशेष करना है। क्या करना ये नहीं पता था। समय और भाग्य के साथ यह सफर आगे बढ़ता गया।

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