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हरियाणा की पुरानी कैबिनेट ने बताए नई सरकार चलाने के गुर, पढ़ें हार-जीत पर क्या बोले दिग्गज

Fri, 01 Nov 2019 11:18 PM IST
ajay kumar न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: ajay kumar Updated Fri, 01 Nov 2019 11:18 PM IST
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Haryana CM Manohar Lal's Old Cabinet Meeting In Chandigarh
हरियाणा की पुरानी कैबिनेट - फोटो : फाइल फोटो

हरियाणा सरकार की पुरानी कैबिनेट ने विधानसभा चुनाव में कद्दावर नेताओं की हार से सबक लेते हुए भविष्य की सरकार का खाका खींचा। पुरानी कैबिनेट ने नई कैबिनेट के होने वाले सदस्यों पर मंथन किया। इसके साथ ही आगामी सरकार को प्रभावी ढंग से चलाने के गुर बताए। जिससे पांच साल सरकार चलाने के बाद आने वाले विधानसभा चुनाव में बहुमत का सपना सरकार अपने बूते तय करे।

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ऐसे में खुले मन से बहुमत से पीछे रहने की चर्चा हुई मंत्रियों ने भीतरघातियों की भी चर्चा की और बताया जिन लोगों ने भितरघात कर उन्हें चुनाव हराया है। इस दौरान गठबंधन को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई, क्योंकि गठबंधन का फैसला आलाकमान का था। सभी पूर्व मंत्री इस दौरान चुप्पी साधे रहे। सुभाष बराला सहित आठ हारे हुए मंत्री और दो जीते हुए पूर्व मंत्री भी कैबिनेट की बैठक में पहुंचे थे। इसके अलावा विपुल गोयल और राव नरबीर भी पहुंचे।
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भाजपा की बैठक के बाद पूर्व राज्यमंत्री कृष्ण बेदी ने बताया कि चुनावी समीक्षा के साथ भावी सरकार कैसे काम करे कुछ ऐसे विचार रखे गए थे। पिछली कैबिनेट में हमारे लंबित रह गए मुद्दों को इस सरकार में गति प्रदान की जाएगी। इस दौरान रामबिलास शर्मा, कैप्टन अभिमन्यु और ओपी धनखड़ समेत सभी के साथ मिलकर विचारविमर्श किया गया। बेदी ने कहा बहुत सी चीजें इस चुनाव में उत्साहजनक है। पार्टी का 3 प्रतिशत वोट प्रतिशत बढ़ा जबकि 8 प्रतिशत कम मतदान हुआ है।

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हुड्डा सरकार 67 से 40 पर आई थी हमारी केवल 7 सीटें कम हुई हैं। खुले मन से हार के पीछे के कारणों को लेकर चर्चा की गई है। हालांकि उन्होंने भितरघात से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि हार के पीछे आपसी फूट का कारण कहीं नहीं है। जो भी कारण थे सामूहिक थे। हरियाणा की जनता ने जो फैसला लिया सोच समझकर लिया है।

कैबिनेट ने कहा कार्यकर्ताओं की नब्ज पर नजर रखना जरूरी
कैबिनेट के सदस्यों ने कहा कि जहां पर भाजपा चुनाव हारी है और जजपा जीती है। वहां पर कार्यकर्ताओं में यह संदेश नहीं जाना चाहिए कि उनके काम नहीं हो रहे। ऐसे विधानसभा क्षेत्रों में कार्यकर्ताओं के कार्यों पर ध्यान देना बहुत आवश्यक है। कार्यकर्ताओं को यह महसूस नहीं होना चाहिए कि वे उपेक्षित हैं।

जातीय समीकरण भी रहे हावी
बैठक में कुछ नेताओं ने यहा भी कहा कि हमारे किए गए कार्यों से जनता संतुष्ट है। 75 पार का नारा जनता के ऊपर अधिक प्रभाव नहीं छोड़ पाया। चुनाव में कई स्थानों पर जातीय समीकरण भी हावी रहे। इस दौरान मुख्यमंत्री ने सभी सदस्यों से बात करने के बाद उन्हें आश्वासन दिया कि भविष्य में भी इस तरह की बैठके होती रहेंगी। भले ही कुछ लोग हार गए हैं, लेकिन वे पार्टी के बडे़ नेता हैँ और उनको पूरा सम्मान दिया जाएगा।

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