क्या सुलझेगा एसवाईएल का मुद्दा! अब सीएम मनोहर लाल का बड़ा बयान, बोले-केंद्र की पहल का इंतजार
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मुख्यमंत्री मनोहर लाल का कहना है कि एसवाईएल पर पंजाब के साथ वार्ता कर समाधान निकालने को तैयार हूं। केवल केंद्र सरकार की पहल का इंतजार है। सीएम सोमवार को रोहतक में व्यापारियों की मीटिंग के बाद मीडिया से बातचीत कर रहे थे। सीएम ने कहा कि प्रदेश में वर्ग विशेष नहीं, अपितु हर वर्ग की समस्याओं का समाधान करने का लक्ष्य रखा गया है।
लक्ष्य की ओर तीव्रता से आगे बढ़ते हुए अलग-अलग वर्ग विशेष के साथ विशेष बैठकों का दौर जारी है, ताकि संबंधित वर्ग की समस्याओं एवं मांगों की जानकारी लेकर उन्हें पूरा किया जा सके। एक सवाल के जवाब में मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि विधानसभा चुनावों में तीन माह का समय शेष है, जिसके लिए भाजपा तैयार है।
अपने संकल्प पत्र में प्रदेश के हर वर्ग की हर कठिनाई को दूर करने का संकल्प शामिल किया जाएगा, जिसके लिए सरकार अभी से प्रभावी कदम उठा रही है। जल संकट के संदर्भ में पूछे गए प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बड़ा विषय है, जिसे केंद्र व प्रदेश सरकार गंभीरता से समझ रही है। जल संकट से निपटने के लिए भूजल स्तर को ऊंचा उठाने के लिए एकजुट प्रयास करने होंगे।
उन्होंने कहा कि 15 अगस्त के बाद प्रदेश में जन आशीर्वाद यात्रा निकाली जाएगी, जो 10 सितंबर तक पूरी हो जाएगी। क्योंकि इसके तुरंत बाद चुनाव आयोग प्रदेश के विधानसभा चुनाव की घोषणा कर सकता है। एसवाईएल पर सीएम ने कहा कि मामला सुप्रीम कोर्ट में है। आगामी तारीख 30 सितंबर लगाई है। जल्द ही एसवाईएल पर निर्णय आ जाएगा। एसवाईएल पर केंद्र को पहल करनी होगी। वे पंजाब के साथ बातचीत कर मामले को सुलझाने के लिए तैयार हैं।
पौधे की देखभाल करने पर छात्र को मिल रहा 50 रुपये का इनाम
सीएम ने कहा कि जल संरक्षण के लिए पौधरोपण अभियान चलाया जा रहा है। छठी से 12वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए पौधरोपण की योजना चलाई गई है। छह माह बाद पौधे की समीक्षा की जाएगी जिसके आधार पर विद्यार्थियों को 50-50 रुपये की पुरस्कार राशि प्रदान की जाएगी। जल संरक्षण को लेकर हर कोई चिंतित है, जिसमें छात्र वर्ग विशेष रूप से शामिल है। उन्होंने कहा कि बड़ी इमारतों के लिए तो नॉर्म्स हैं कि वे वर्षा जल की रिचार्जिंग करें, लेकिन खुद भी लोग जल संरक्षण के लिए पहल करें।