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हरियाणा: मुख्यमंत्री ने जलभराव वाले क्षेत्रों से जल्द पानी निकासी कराने के दिए निर्देश, सभी उपायुक्तों के साथ की वर्चुअल बैठक
Fri, 15 Oct 2021 12:17 AM IST
भूपेंद्र सिंह
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
अमर उजाला ब्यूरो, चंडीगढ़
Published by: भूपेंद्र सिंह
Updated Fri, 15 Oct 2021 12:17 AM IST
सार
मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये सभी उपायुक्तों के साथ वर्चुअल बैठक की। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल निकासी के लिए आवश्यकता हो तो और पंपों की व्यवस्था करें। समय से खेतों से पानी निकालना जरूरी है।
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Haryana CM Manohar Lal Khattar
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने जलभराव वाले क्षेत्रों में से पानी निकासी जल्द करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहा कि किसान समय से अगली फसल की बुआई कर सकें, इसलिए खाद की पर्याप्त उपलब्धता भी सुनिश्चित कराएं। बरसात के कारण टूटी सड़कों, सिंघू और टिकरी बॉर्डर के आसपास के संपर्क मार्गों की स्थिति जल्दी सुधारी जाए।
मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये गुरुवार को सभी डीसी के साथ समीक्षा बैठक में ये कार्य तय समय सीमा में पूरा करने को कहा। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने भी बैठक में अपने सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल निकासी के लिए आवश्यकता हो तो और पंपों की व्यवस्था करें। समय से खेतों से पानी निकालना जरूरी है। जल निकासी के बाद पानी ड्रेन में डालने की बजाय रिचार्जिंग के लिए इस्तेमाल किया जाए, इससे जलस्तर में सुधार होगा।
सभी डीसी को उन्होंने विभागों, निगमों, सोसायटी एवं कमेटियों की बैठक निर्धारित समय अवधि में नियमित रूप से करने के निर्देश दिए। साथ ही पराली जलाने की घटनाओं के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट प्रतिदिन भेजने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल निकासी के लिए इलेक्ट्रिक पंपों का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने बिजली विभाग को प्राथमिकता के आधार पर कनेक्शन देने और 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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यह भी पढ़ें: बच्ची को मिला न्याय: तीन वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म के दोषी को 20 साल की सजा, 1.30 लाख जुर्माना
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मुख्यमंत्री ने वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिये गुरुवार को सभी डीसी के साथ समीक्षा बैठक में ये कार्य तय समय सीमा में पूरा करने को कहा। उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला एवं कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल ने भी बैठक में अपने सुझाव दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल निकासी के लिए आवश्यकता हो तो और पंपों की व्यवस्था करें। समय से खेतों से पानी निकालना जरूरी है। जल निकासी के बाद पानी ड्रेन में डालने की बजाय रिचार्जिंग के लिए इस्तेमाल किया जाए, इससे जलस्तर में सुधार होगा।
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सभी डीसी को उन्होंने विभागों, निगमों, सोसायटी एवं कमेटियों की बैठक निर्धारित समय अवधि में नियमित रूप से करने के निर्देश दिए। साथ ही पराली जलाने की घटनाओं के भौतिक सत्यापन की रिपोर्ट प्रतिदिन भेजने को कहा। मुख्यमंत्री ने कहा कि जल निकासी के लिए इलेक्ट्रिक पंपों का इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने बिजली विभाग को प्राथमिकता के आधार पर कनेक्शन देने और 24 घंटे बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
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मेरी फसल-मेरा ब्योरा पोर्टल 17 तक खोला
बैठक में बताया गया कि कुछ क्षेत्रों में किसानों को आ रही दिक्कतों को देखते हुए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल को खोला गया है। इस पोर्टल पर किसान 17 अक्तूबर तक रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने डीसी को निर्देश दिए कि धान खरीद के दौरान किसानों को मंडियों में बारदाना, लिफ्टिंग और लेबर आदि की कोई समस्या नहीं आनी चाहिए। बाजरे की फसल पर दी जाने वाली भावांतर योजना का लाभ छोटी जोत के किसानों को प्राथमिकता से दिया जाए। भावांतर भरपाई की राशि जल्द किसानों के खातों में जमा कराएं।
पराली प्रबंधन के लिए बनाएं कमेटी
मौजूदा समय में धान की फसल के अवशेषों के प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री ने स्थानीय स्तर पर समितियां बनाने के निर्देश दिए। ये पराली प्रबंधन के लिए उचित व्यवस्था बनाएंगी। किसानों को पराली की एवज में आर्थिक लाभ देने की अधिक से अधिक योजनाएं बनाएं।
बैठक में बताया गया कि कुछ क्षेत्रों में किसानों को आ रही दिक्कतों को देखते हुए मेरी फसल-मेरा ब्यौरा पोर्टल को खोला गया है। इस पोर्टल पर किसान 17 अक्तूबर तक रजिस्ट्रेशन करवा सकते हैं। मुख्यमंत्री ने डीसी को निर्देश दिए कि धान खरीद के दौरान किसानों को मंडियों में बारदाना, लिफ्टिंग और लेबर आदि की कोई समस्या नहीं आनी चाहिए। बाजरे की फसल पर दी जाने वाली भावांतर योजना का लाभ छोटी जोत के किसानों को प्राथमिकता से दिया जाए। भावांतर भरपाई की राशि जल्द किसानों के खातों में जमा कराएं।
पराली प्रबंधन के लिए बनाएं कमेटी
मौजूदा समय में धान की फसल के अवशेषों के प्रबंधन के लिए मुख्यमंत्री ने स्थानीय स्तर पर समितियां बनाने के निर्देश दिए। ये पराली प्रबंधन के लिए उचित व्यवस्था बनाएंगी। किसानों को पराली की एवज में आर्थिक लाभ देने की अधिक से अधिक योजनाएं बनाएं।