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हरियाणाः पदोन्नति का इंतजार कर रहे विधायकों को सीएम की थपकी, आश्वासन की घुट्टी पिलाई
Thu, 21 Nov 2019 09:45 AM IST
खुशबू गोयल
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Thu, 21 Nov 2019 09:45 AM IST
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विधानसभा चुनाव के बाद सबको साथ लेकर चलने की कवायद में भाजपा के दूसरी बार जीते विधायकों को मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने आश्वासन की थपकी दी है। सीएम ने इन विधायकों के साथ बातचीत कर कहा है कि मेहनत के साथ काम करो भविष्य अच्छा होगा। इनमें से अधिकतर वे विधायक हैं जो मंत्री पद की दौड़ में शामिल थे। भाजपा के कुल नौ विधायक ऐसे हैं, जो दूसरी बार जीत कर आए हैं। जिसमें से आठ विधायक मंगलवार शाम को सीएम आवास पर पहुंचे थे। जबकि नांगल चौधरी के विधायक अभय सिंह यादव इस बैठक में शामिल नहीं थे।
मंत्री पद से दूर होने के बाद से ही अभय यादव चंडीगढ़ में नजर नहीं आए हैं। सूत्रों के मुताबिक राजनीति का शिकार हुए यादव मौन धारण कर अपने क्षेत्र में जनता के बीच समय दे रहे हैं। वह इस समय धन्यवादी दौरों में व्यस्त हैं। जो विधायक पहुंचे थे, उनमें असीम गोयल, घनश्याम अरोड़ा, सुभाष सुधा, घनश्याम सर्राफ, सीमा त्रिखा, बिशंभर बाल्मीकि, हरविंद्र कल्याण और डा. कमल गुप्ता शामिल थे। इनमें से अधिकतर विधायक आश्वस्त चल रहे थे कि विधानसभा में इस बार बतौर मंत्री बैठने का मौका मिलेगा, लेकिन गठबंधन की सरकार में इनकी राजनैतिक हसरतें परवान नहीं चढ़ सकीं।
सूबे में भाजपा की चालीस सीटें आने के बाद बाहरी समर्थन की जरूरत पड़ी और पार्टी में एडजस्टमेंट का दौरा शुरू हो गया। कुछ मलाई दुष्यंत के खाते में गई तो कुछ निर्दलीय खा गए। रही बची में भाजपा के विधायकों को संतोष करना पड़ा। ऐसे में सीएम मनोहर लाल ने सभी विधायकों में ऊर्जा का संचार कर नई स्फूर्ति भरी है। विधायकों को यह आश्वासन मिला है कि वे अपने काम की गति को तेज रखें। दोगुने मनोबल के साथ काम करें। जल्द ही उनके साथ कुछ न कुछ बेहतर होगा। आश्वासन की यह घुट्टी पी कर अधिकतर विधायक अपने क्षेत्र की तरफ काम करने के लिए निकल पड़े हैं।
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मंत्री पद से दूर होने के बाद से ही अभय यादव चंडीगढ़ में नजर नहीं आए हैं। सूत्रों के मुताबिक राजनीति का शिकार हुए यादव मौन धारण कर अपने क्षेत्र में जनता के बीच समय दे रहे हैं। वह इस समय धन्यवादी दौरों में व्यस्त हैं। जो विधायक पहुंचे थे, उनमें असीम गोयल, घनश्याम अरोड़ा, सुभाष सुधा, घनश्याम सर्राफ, सीमा त्रिखा, बिशंभर बाल्मीकि, हरविंद्र कल्याण और डा. कमल गुप्ता शामिल थे। इनमें से अधिकतर विधायक आश्वस्त चल रहे थे कि विधानसभा में इस बार बतौर मंत्री बैठने का मौका मिलेगा, लेकिन गठबंधन की सरकार में इनकी राजनैतिक हसरतें परवान नहीं चढ़ सकीं।
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सूबे में भाजपा की चालीस सीटें आने के बाद बाहरी समर्थन की जरूरत पड़ी और पार्टी में एडजस्टमेंट का दौरा शुरू हो गया। कुछ मलाई दुष्यंत के खाते में गई तो कुछ निर्दलीय खा गए। रही बची में भाजपा के विधायकों को संतोष करना पड़ा। ऐसे में सीएम मनोहर लाल ने सभी विधायकों में ऊर्जा का संचार कर नई स्फूर्ति भरी है। विधायकों को यह आश्वासन मिला है कि वे अपने काम की गति को तेज रखें। दोगुने मनोबल के साथ काम करें। जल्द ही उनके साथ कुछ न कुछ बेहतर होगा। आश्वासन की यह घुट्टी पी कर अधिकतर विधायक अपने क्षेत्र की तरफ काम करने के लिए निकल पड़े हैं।
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राजनीति का शिकार हुए यादव धन्यवादी दौरों में व्यस्त
अभय यादव एक एन वक्त पर नाम कटना खुद उन्हें भी चौका गया है। महेंद्रगढ़ जिले में टेल तक पानी ले जाने में यादव की मेहनत का योगदान रहा है। क्षेत्र में इस बात की चर्चा है कि टेल तक पानी पहुंचने के कारण ही जिले में भाजपा की तीन सीटें आई हैं। दक्षिण हरियाणा में इस बात को मुद्दा बनाकर भाजपा ने चुनाव लड़ा था। जिसमें यादव का योगदान अहम था। राजनैतिक विरोधियों से आहत यादव अब कदम फूंक-फूंक कर रख रहे हैं।
किसका लगेगा नंबर
सरकार में इस समय एक केबिनेट और एक राज्यमंत्री का पद खाली है। भविष्य में जब भी इन पदों पर विधायक सत्तासनी होंगे। उसमें जजपा और निर्दलीय भी दबाव बनाएंगे। ऐसे में सरकार अपने विधायकों को कितनी तरजीह देगी यह देखना होग। बहरहाल अभी चेयरमैनी का दौर भी चलेगा। जिसमें कइयों का नंबर लग सकता है।
किसका लगेगा नंबर
सरकार में इस समय एक केबिनेट और एक राज्यमंत्री का पद खाली है। भविष्य में जब भी इन पदों पर विधायक सत्तासनी होंगे। उसमें जजपा और निर्दलीय भी दबाव बनाएंगे। ऐसे में सरकार अपने विधायकों को कितनी तरजीह देगी यह देखना होग। बहरहाल अभी चेयरमैनी का दौर भी चलेगा। जिसमें कइयों का नंबर लग सकता है।