Haryana Civic Body Election: दिग्गजों को खानी पड़ी मात, सीएम के जिले करनाल में चार में से एक सीट पर ही जीती भाजपा
उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला खुद अपने हलके उचाना से जजपा के प्रत्याशी अनिल को जीत दिलाना तो दूर बल्कि वे मुकाबले में भी नहीं ला पाए। यहां जजपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे और एक निर्दलीय ने बाजी मारी।
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हरियाणा निकाय चुनाव में राजनीति की बिसात में दिग्गजों को अपने ही गढ़ों में मात खानी पड़ी। प्रदेश के मुख्यमंत्री मनोहर लाल के जिले करनाल में चार में से मात्र एक स्थान घरौंडा में ही कमल खिल सका, जबकि तीन नगर पालिकाओं असंध, निसिंग और तरावड़ी में निर्दलीयों ने जीत के झंडे गाड़े।
इसके साथ ही उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला खुद अपने हलके उचाना से जजपा के प्रत्याशी अनिल को जीत दिलाना तो दूर बल्कि वे मुकाबले में भी नहीं ला पाए। यहां जजपा प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहे और एक निर्दलीय ने बाजी मारी। इसी प्रकार, नरवाना में जजपा की प्रत्याशी छवि बंसल को मात्र 627 वोट ही मिल पाए और छठे स्थान पर रहीं। यहां से विधायक भी जजपा के रामनिवास सुरजाखेड़ा हैं। जींद को जजपा का गढ़ माना जाता है।
हरियाणा के मंत्रियों की बात करें तो कई मंत्री भी अपने हलकों में पार्टी के उम्मीदवारों को जीत का स्वाद नहीं चखवा पाए। बावल में सहकारिता मंत्री डा. बनवारीलाल भाजपा के प्रत्याशी शिवनारायण को जीत नहीं दिला पाए। शिवनारायण तीसरे स्थान पर रहे। रानियां में बिजली मंत्री रणजीत सिंह अपने समर्थक निर्दलीय दीपक गाबा को नहीं जीता पाए। यहां इनेलो समर्थित मनोज सचदेवा जीते हैं। गौर हो यहां पर जजपा और भाजपा ने अपने प्रत्याशी न उतार कर दीपक गाबा का समर्थन किया था।
निकाय चुनावों के लेकर भाजपा का संकल्प पत्र जारी करने वाले निकाय मंत्री डा. कमल गुप्ता अपने ही जिलों में दोनों स्थानों पर भाजपा को जीत नहीं दिला पाए। हांसी में भाजपा दूसरे और बरवाला में जजपा को दूसरे स्थान पर रहकर हार का सामना करना पड़ा।
टोहाना में जजपा के रमेश चंद्र दूसरे स्थान पर रहे, जबकि यहां से देवेंद्र सिंह बबली पंचायत मंत्री हैं। यहीं से भाजपा के पूर्व विधायक और पूर्व प्रदेशाध्यक्ष सुभाष बराला भी हैं, लेकिन गठबंधन को हार का सामना करना पड़ा। इसी प्रकार, शाहबाद में सीएम मनोहर लाल के राजनीतिक सलाहकार कृष्ण बेदी के बेटे को हार का सामना करना पड़ा। यहां जजपा विधायक रामकरण काला के समर्थक ने जीत दर्ज की है। रतिया में भाजपा तीसरे स्थान पर रही। भाजपा के विधायक लक्षण हैं। भिवानी में भाजपा तीसरे स्थान पर रही और भाजपा के विधायक घनश्याम सर्राफ मतदाताओं को नहीं लुभा पाए।
हुड्डा और कांग्रेस के विधायक भी नहीं दिला पाए समर्थकों को जीत
इसी प्रकार कांग्रेस की बात करें तो खुद नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा अपने गढ़ महम, झज्जर, बहादुरगढ़, गोहाना में समर्थित प्रत्याशियों को जीत की दहलीज तक नहीं ला पाए। इसी तरह नूंह जिले की तीनों विधानसभा क्षेत्रों में कांग्रेस के विधायक हैं, लेकिन यहां तीनों सीटों फिरोजपुर झिरका, पुन्हाना और नूंह में कांग्रेस समर्थकों को हार झेलनी पड़ी।
रणदीप सुरजेवाला के कैथल और नरवाना में उम्मीदवार थे, लेकिन जीत नहीं पाए। असंध में विधायक शमशेर गोगी ने राजेंद्र सिंह को खड़ा किया था, लेकिन पूर्व विधायक जिलेराम शर्मा के समर्थक सतीश कटारिया को यहां जीत मिली।