Haryana Budget: सीएम मनोहर लाल ने दिखाई ‘बाजीगरी’, चादर से बाहर नहीं पसारे पांव, नो टैक्स
- मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने पेश किया बजट
- बतौर वित्त मंत्री सीएम का पहला बजट
- सूटकेस की जगह टैब लेकर पहुंचे विधानसभा
- कोई नया टैक्स नहीं लगाया
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विस्तार
कर्ज तले डूबी हरियाणा की गठबंधन सरकार ने अपने पहले बजट में हर वर्ग को लुभाने की कोशिश की है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बतौर वित्त मंत्री शुक्रवार को अपना पहला कर मुक्त बजट पेश किया। इसमें हर वर्ग पर सौगातों की बौछार की गई। किसान, नौजवान, महिलाओं, गांव, शिक्षा, स्वास्थ्य और सामाजिक सुरक्षा को सरकार ने टॉप एजेंडे में रखा है।
किसानों को तीन शर्तों के साथ तीन लाख रुपये तक ब्याज रहित फसली ऋण मिलेगा। आर्थिक गतिविधियों के लिए किसानों को नए वित्तीय वर्ष में 7.50 रुपये प्रति यूनिट की बजाए 4.75 रुपये प्रति यूनिट की दर से बिजली मिलेगी। हजारों किसानों का बिजली का बिल प्रति यूनिट 2.75 रुपये कम हो जाएगा। प्रदेश में आठवीं की अब फिर से बोर्ड परीक्षा होगी।
नो डिटेंशन पॉलिसी लागू होने के बाद पांचवीं और आठवीं का बोर्ड खत्म कर दिया गया था। सरकार ने हरियाणा और प्रदेश से बाहर दो साल में एक लाख सरकारी नौकरियां व निजी क्षेत्र में एक साल में 25 हजार रोजगार देने का लक्ष्य रखा है। तीन से पांच आयु वर्ग के बच्चों के लिए 4000 प्ले वे स्कूल खोले जाएंगे। कामकाजी महिलाओं के बच्चों के लिए पांच सौ नाए क्रेच खोले जाएंगे।
सरकार किसानों की आय दोगुनी करने, नौजवानों को रोजगार, गांवों में विकास की नई बयार, अच्छी शिक्षा, बेहतर स्वास्थ्य सेवाओं और सामाजिक सुरक्षा बढ़ाने के उद्देश्य के साथ आगे बढ़ेगी। बीते वर्ष की तुलना वर्तमान बजट 7.70 प्रतिशत अधिक है।
एक नजर में बजट
- 2020-21 का अनुमानित बजट 142343.78 करोड़ रुपये।
- 2019-20 का अनुमानित बजट 1.32 लाख करोड़, संशेाधित 1.41 लाख करोड़।
- वर्तमान बजट का संभावित घाटा 15373.95 करोड़ रुपये।
- 2020-21 में प्रदेश पर कर्ज 198700 करोड़।
- 2019-20 में प्रदेश पर कर्ज 176832 करोड़।
- राजस्व प्राप्तियां- 1 लाख 19 हजार 751 करोड़।
- कुल खर्च- 1 लाख 19 हजार 751 करोड़।
- वेतन एवं पेंशन पर खर्च - 36012 करोड़।
बजट की बड़ी घोषणाएं-
- हर ब्लॉक में पराली खरीद केंद्र बनेंगे।
- सब्जी मंडियों में महिला किसानों के लिए अलग से 10 फीसदी स्थान आरक्षित।
- किसान कल्याण प्राधिकरण में विशेष महिला सेल बनेगा।
- सभी बड़ी मंडियों में क्रॉप ड्रायर।
- 3 साल में एक लाख एकड़ क्षेत्र में जैविक व प्राकृतिक खेती का विस्तार करेंगे।
- अल्प बजट प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देंगे।
- किन्नू, अमरूद व आम के बगीचे लगाने पर 20 हजार रुपये प्रति एकड़ अनुदान।
- मोबाइल पशु चिकित्सा इकाइयां शुरू होंगी।
- दुग्ध उत्पादकों की सब्सिडी 4 रुपये से बढ़ाकर 5 रुपये प्रति लीटर की।
- प्रदेश में पहला सहकारी टेट्रा पैक सयंत्र स्थापित किया जाएगा।
- 98 खंडों में एक-एक नया मॉडल संस्कृति वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय।
- विज्ञान पढ़ने वालों को भी निशुल्क बस सुविधा।
- मिडडे मील में एक दिन लड्डू, बेसन व पिन्नी व प्रतिदिन दूध मिलेगा।
- सभी स्कूलों में आरओ लगेंगे।
- विज्ञान प्रोत्साहक भर्ती किए जाएंगे।
- छात्रावासों में एससी छात्रों के लिए 20 फीसदी सीटें आरक्षित होंगी।
- कॉलेज, यूनिवर्सिटी में 1.80 लाख आय वाले परिवारों की बेटियों का शिक्षण शुल्क नहीं।
- इंटरनेट युक्त 24 नए आदर्श आईटीआई स्थापित होंगे।
- सिरसा के पन्नीवाला मोटा राजकीय अभियांत्रिकी कॉलेज में अत्याधुनिक आदर्श कौशल केंद्र खुलेगा।
- पंजाबी भाषा एनएसक्यूएसएफ के अधीन लाई जाएगी।
- बैशाखी पर नया रोजगार पोर्टल शुरू होगा।
- खिलाड़ियों का खुराक भत्ता 250 रुपये होगा।
- खिलाड़ियों के लिए उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा।
- सभी अस्पतालों में कैंसर मरीजों के लिए कीमोथरेपी शुरू होगी।
- दिल का दौरा जानलेवा न हो, इसलिए सार्वजनिक स्थानों पर सोर्बिट्रेट की गोली मुफ्त मिलेगी।
- मेवात फीडर नहर का निर्माण किया जाएगा।
- छात्राओं की सुरक्षा के लिए 2000 सीसीटीवी लगेंगे।
हरियाणा के बजट में ऐसा पहली बार
- अटैची, थैली में बजट लाने की प्रथा खत्म, टैब लेकर पहुंचे मुख्यमंत्री
- देश में पहली बार किसी विधानसभा में बजट टैब से प्रस्तुत किया
- संसद में भी ऐसा नहीं। सभी विधायकों को भी टैब में बजट अपलोड करके दिया
- किसी सीएम ने बतौर वित्त मंत्री हरियाणा में पहला बजट प्रस्तुत किया
- वित्त मंत्री का सबसे लंबा बजट भाषण, वित्त मंत्री संपत्त सिंह ने लगभग दो घंटे में पढ़ा था
- 302 बिंदुओं पर आधारित सबसे विस्तृत बजट
- -बजट में विधायक के सुझाव नाम सहित शामिल
मधुमक्खी फूल न चूसे तो शहद कैसे बनेगा : मनोहर
हरियाणा सरकार भविष्य में अप्रत्यक्ष रूप से करों का बोझ जनता पर डाल सकती है। मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने इसके संकेत भी दिए। उन्होंने कहा कि मधुमक्खी जिस दिन फूल चूसना बंद कर देगी उस दिन शहद बनना बंद हो जाएगा। विकास दर बनाए रखने के लिए निवेश बढ़ाना जरूरी है। सरकार जीएसडीपी का 25 प्रतिशत व जीडीपी का 3 प्रतिशत तक कर्ज ले सकती है।
प्रदेश का कर्ज दोनों सीमाओं के भीतर है। केंद्र सरकार ने पत्र लिखकर तीन प्रतिशत से अधिक कर्ज लेने की पेशकश की थी, लेकिन हमने मना कर दिया। जनता पर कर्ज का बोझ नहीं डालना चाहते। हमारा उद्देश्य सीमा के भीतर कर्ज लेकर विकास पर जोर देना है। कर्ज उतना ही लिया है जितना अदा कर सकते हैं। सीएम के प्रधान सचिव आरके खुल्लर ने कर्ज को लेकर अमेरिका, जापान व चीन के आंकड़े भी प्रस्तुत किए।
बजट पर प्रतिक्रिया-
बजट से घोर निराशा लगी हाथ : सैलजा
हरियाणा कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा सांसद कुमारी सैलजा ने कहा है कि बजट से प्रदेश के हर वर्ग को घोर निराशा हाथ लगी है। इस सरकार ने सिर्फ प्रदेश को कर्ज में डुबोने का कार्य किया है। यह सिर्फ खानापूर्ति वाला बजट है। प्रदेश का कर्ज आज 1 लाख 98 हजार करोड़ तक जा पहुंचा है। वर्ष 1966 से लेकर 2014 तक 48 वर्षों में प्रदेश पर जो कर्जा 70 हजार करोड़ था, सरकार के 5 सालों में 2 लाख करोड़ तक पहुंच गया। ये सरकार की नाकामियों की पोल खोलता है।
जीरो परफॉर्मेंस, ज़ीरो रिज़ल्ट वाला बजट : रणदीप
एआईसीसी मीडिया विभाग के चेयरमैन रणदीप सुरजेवाला ने बजट को जीरो परफार्मेंस, जीरो रिजल्ट वाला बजट बताया है। उन्होंने कहा कि भाजपा ने हरियाणा को आर्थिक दिवालिएपन की ओर धकेल दिया है। 5 साल में हरियाणा का कर्ज़ 280 प्रतिशत बढ़ा है।
हुड्डा बोले : एफएम, फेल्ड मिनिस्टर
नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने मुख्यमंत्री के बजट भाषण खत्म करते ही चुटकी ली। उन्होंने कहा कि सीएम ने लंबा बजट पढ़ा। यह बजट जनता का नहीं, मोदी के लिए है। सीएम से कॉमन मैन तो ठीक है, लेकिन एफएम मेरी नजर में फेल्ड मिनिस्टर हैं।
साफ आबोहवा का सपना न ही देखें तो अच्छा
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने बजट भाषण में कहा कि बच्चों में पर्यावरण के प्रति जागरूकता उत्पन्न करने के लिए स्कूलों में स्थापित इको क्लब को अब जिला परिषदों के माध्यम से आगे बढ़ाया जाएगा। सभी 22 जिलों में कुल 5250 ईको क्लब बनाए गए हैं। आईएमटी मानेसर में पर्यावरण प्रशिक्षण संस्थान, पंचकूला में रणनीतिक ज्ञान केंद्र व वेटलैंड के संरक्षण एवं प्रबंधन के लिए स्थापित राज्य वेटलैंड प्राधिकरण के लिए उपयुक्त प्रावधान किए जा रहे हैं।
राज्य में वृक्ष आवरण जोकि वर्तमान में 6 प्रतिशत है, उसको 10 प्रतिशत तक बढ़ाया जाएगा। इसके लिए वन विभाग द्वारा एकत्रित राजस्व को उपयोग में लाया जाएगा। सरकार पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए शिवालिक की पहाड़ियों में प्राचीन महत्व के स्थलों जैसे आदि बद्री और लोहगढ़ का विकास करेगी। प्रदेश में सार्वजनिक निजी सहभागिता के तहत एक मैगा एक्वेरियम भी स्थापित किया जाएगा।
दक्षता आधारित शिक्षा
कुल एक लाख अतिरिक्त युवाओं को संबद्ध उद्योगों में रोजगार सक्षम बनाने के लिए कौशल विकास किया जाएगा। सभी महिला औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानों में अंग्रेजी माध्यम से प्रशिक्षण का विकल्प दिया जाएगा। यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि सभी औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थानो के हर स्नातक को संस्थान छोड़ने से पहले निशुल्क पासपोर्ट प्रदान किया जाए। मेधावी युवाओं की पहचान कर उन्हें हरियाणा की सरकारी नौकरियों के साथ-साथ केंद्र सरकार के कर्मचारी चयन आयोग, सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों, भारतीय रेलवे समेत केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में भी नौकरियों के लिए प्रतियोगी परीक्षा पास करने में सक्षम बनाने के लिए विशेष कोचिंग और प्रशिक्षण दिया जाएगा।
कर्मियों के लिए व्यापक प्रशिक्षण कार्यक्रम
2020-21 में सरकार कर्मचारियों, अधिकारियों इनके प्रशिक्षण के लिए व्यापक कार्यक्रम चलाएगी। हर नए भर्ती हुए कर्मचारी को समग्र रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा। हर कार्यरत कर्मचारी को अगले तीन वर्षों में उसकी आवश्यकता अनुसार प्रशिक्षित करने की योजना तैयार की गई है। पदोन्नति पर कार्यभार संभालने से पहले भी सभी को प्रशिक्षण लेना होगा। हरियाणा लोक प्रशासन संस्थान को शीर्ष संस्थान के रूप में यह दायित्व सौंपा गया है। इसी प्रकार, पंचायती राज संस्थाओं व नगर निकायों के सदस्यों को भी नियमित रूप से प्रशिक्षित किया जाएगा ।
अंतिम वर्ष के कॉलेज छात्रों के बनेंगे निशुल्क पासपोर्ट
विदेशों में शिक्षा और रोजगार के लिए जाने वाले छात्रों के पासपोर्ट अब सरकार बनवाएगी। कॉलेजों में पढ़ने वाले अंतिम वर्ष के सभी छात्रों के निशुल्क पासपोर्ट बनाए जाएंगे। सरकार ने पासपोर्ट सहायता योजना शुरू कर दी है।
सुरक्षित, किफायती, कुशल और विश्वसनीय परिवहन प्रणाली
वर्ष 2020-21 में बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा करने वाली 867 स्टैंडर्ड नॉन-ए.सी. बसों की खरीद भी पाइपलाइन में है। इसके अलावा, विभाग ने ऑनलाइन बोली प्रणाली आधार पर किलोमीटर स्कीम के तहत भी सैकड़ों बसों को बेड़े में शामिल किया है।
सीएम मनोहर लाल ने कहा कि विभाग ने साथ-साथ मैनुअल टिकटिंग प्रणाली को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से बूट मॉडल पर इलेक्ट्रॉनिक टिकट इश्यूइंग मशीनों, आरएफआईडी आधारित बस पास सिस्टम और जीपीएस सिस्टम के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके सितंबर, 2020 तक पूरी तरह से लागू हो जाने की संभावना है।
जीएसटी में 18.44 प्रतिशत की कुल वृद्धि
राज्य ने जुलाई से दिसंबर 2019 के बीच वर्ष 2018-19 की इसी अवधि की तुलना में राज्य जीएसटी में 30.15 प्रतिशत की वृद्धि और अप्रैल से दिसंबर 2019 के दौरान 18.44 प्रतिशत की कुल वृद्धि दर्शाई है। इसी अवधि के दौरान अखिल भारतीय आंकड़े ने जीएसटी संग्रहण में 4.28 प्रतिशत की वृद्धि दर्शाई है।
बजट सत्र में वित्तमंत्री मनेाहर लाल ने बताया कि जीएसटी लागू होने के बाद करदाताओं का आधार 1.92 लाख से बढ़ कर 4.51 लाख हो गया है, जो पहले की तुलना में अढ़ाई गुना से अधिक है। नए पंजीकृत डीलरों के भौतिक सत्यापन के एक विशेष अभियान के फलस्वरूप, 16,966 फर्जी डीलरों का पता चला और उन्हें विपंजीकृत किया गया।
190 व्यावसायिक संस्थाओं से जुड़े धोखाधड़ी के पंजीकरण और आईटीसी के फर्जी दावे के मामलों में 102 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। जीएसटी के तहत पंजीकृत व्यापारियों के लिए मुख्यमंत्री व्यापारी सामूहिक निजी दुर्घटना बीमा योजना शुरू की है। जिसमें कुल 3.13 लाख पंजीकृत कर दाताओं से जुड़े 3.86 लाख व्यक्ति लाभार्थी होंगे।
इस योजना में दुर्घटना में मृत्यु या स्थाई दिव्यांगत होने पर पांच लाख रुपये का बीमा कवर होगा। एक दूसरी योजना मुख्यमंत्री व्यापारी क्षतिपूर्ति बीमा योजना शुरू की है, जिसमें 3.13 लाख व्यापारियों के स्टॉक या फर्नीचर के नुकसान की भरपाई करने के लिए 5 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक का बीमा किया गया है। इन दोनों स्कीमों के लिए संपूर्ण प्रीमियम का भुगतान सरकार ने किया है।
सामाजिक सुरक्षा
उन्होंने कहा कि कानूनी सहायता स्कीम नागरिक अधिकार संरक्षण अधिनियम, 1955 के तहत सभी अनुसूचित जातियों के लोगों को उनके खिलाफ हुए विभिन्न उत्पीड़नों के विरूद्ध दर्ज मुकद्दमों की पैरवी करने के लिए कानूनी वित्तीय सहायता की राशि 11000 रुपये से बढ़ाकर 22000 रुपये की जाएगी। इस स्कीम के प्रचार-प्रसार के लिए आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के लोकसभा सदस्यों द्वारा 10-10 तथा आरक्षित निर्वाचन क्षेत्रों के विधान सभा के सदस्यों की सहायता से 5-5 सेमीनार व जागरूकता अभियान आयोजित किये जाएंगे।
इस वित्त वर्ष अनुसूचित जाति एवं पिछड़े वर्ग के उम्मीदवारों को उच्च प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी हेतु आर्थिक सहायता योजना के अर्न्तगत अनुसूचित जाति एंव पिछड़े वर्ग के अभ्यार्थियों को प्रतिष्ठित/चयनित संस्थानों के माध्यम से विभिन्न प्रतियोगी एवं प्रवेश परीक्षाओं की तैयारी करने के लिये एक लाख रुपये या 75 प्रतिशत (जो भी कम हो) का भुगतान किये जाने का प्रस्ताव है।
ई पंचायत व्यवस्था होगी लागू, ई-टेंडर से होंगे विकास कार्य
पंचायतों में मृत पशुओं के निपटान की समस्या के समाधान के लिए वर्ष 2020-21 में प्रत्येक जिला परिषद को पशुसंख्या आधार पर एक या दो वाहन उपलब्ध करवाए जाएंगे। एक टोल फ्री नंबर दिया जाएगा जिस पर फोन कर मृत पशु की सूचना दी जा सकेगी और उसके निपटान की व्यवस्था सुनिश्चित होगी। पशुपालकों की सुविधा के लिए यह निर्णय लिया गया है कि भविष्य में प्रत्येक जिले में पहले से निश्चित स्थानों के अलावा कम से कम एक अन्य स्थान पर प्रति माह पशु मेले का आयोजन किया जाएगा।
इस वर्ष निदेशक, विकास एवं पंचायत विभाग, डीसी की पंचों, सरपंचों, पंचायतों, और पंचायत समितियों संबंधित प्रशासनिक और वित्तिय शक्तियां अब मुख्य कार्यकारी अधिकारी, जिला परिषद को हस्तांतरित की जाएंगी। कार्यकारी अभियंता, पंचायती राज को भी जिला परिषद के अधीन किया जाएगा। जिला परिषदों को वित्तीय स्वतंत्रता प्रदान करने के लिए विभिन्न प्रकार का टैक्स लगाने की छूट दी जाएगी। सरकार केवल इन टैक्सों की न्यूनतम एवं अधिकतम दर निर्धारित करेगी।
जिला परिषदों को हर वर्ष कम से कम 20 करोड़ से 25 करोड़ तक की अनुदान राशि उपलब्ध करवाने का भी निर्णय लिया गया है। वर्ष 2020-21 से महाग्रामों में अप्रिय घटनाओं की रोकथाम के लिए एलईडी स्ट्रीट लाईट लगवाई जाएंगी। महाग्रामों में समाजिक सुरक्षा एवं विकास कार्यों व स्वच्छता की निगरानी को सीसीटीवी कैमरे लगेंगे। जिन ग्राम पंचायतों के पास अपने आय स्रोतों से एक करोड़ रुपए से अधिक की जमा राशि उपलब्ध है उनमें भी एलईडी स्ट्रीट लाईट लगवाई जाएंगी।
हरियाणा ग्रामीण विकास प्राधिकरण को 50 करोड़ रुपये की राशि वित्त वर्ष 2020-21 में उपलब्ध करवाई जाएगी, जिन गांवों के लाल डोरे के भीतर के नक्शे तैयार हो जाएंगे, उन गांवों को एचआरडीए प्राथमिकता देगा। ग्राम पंचायतों की वार्षिक आय 350 करोड़ रुपये से बढ़कर 500 करोड़ रुपए तक हो सके, इसके कदम उठाएंगे। पंचायती राज संस्थाओं एवं शहरी स्थानीय निकायों को राज्य वित्त आयोग की अनुशंसा के आधार पर दी जाने वाली अनुदान राशि को समय पर दिया जाना सुनिश्चित करेंगे।
ऐसे स्थानीय निकाय, जो कि वित्तीय तौर पर सुदृढ़ नहीं है उनको विकास कार्यों के लिए समान अनुदान दिया जाएगा बजट में केंद्रीय तथा राज्य वित्त आयोग, अन्य स्रोतों की सहायता को मिलाकर हर विधानसभा क्षेत्र में 80 करोड़ रुपये की दर से 7200 करोड़ रुपये वार्षिक धनराशि उपलब्ध करवाने का प्रावधान रखा गया है।
अन्नदाता की नाराजगी दूर करने के लिए धन वर्षा
जिस पर सरकार ने कदम उठाना शुरू कर दिए हैं। कृषि व किसान कल्याण से जुड़ी गतिविधियों के लिए सरकार ने कुल 6481.48 करोड़ का बजट रखा है। ये 2019-20 के बजट से 5230.54 करोड़ रुपये की तुलना में 23.92 प्रतिशत ज्यादा है। इसमें कृषि क्षेत्र के लिए 3364.90 करोड़, पशुपालन के लिए 1157.41 करोड़, बागवानी के लिए 492.82 करोड़ और मत्स्य पालन के लिए 122.42 करोड़ रुपये शामिल है। किसानों की आय दोगुना करने के लिए मत्स्य पालन को बढ़ावा दिया जाएगा। सरकार ने वर्ष 2020-21 में 55 हजार एकड़ में मत्स्य पालन का लक्ष्य निर्धारित किया है।
सिंचाई के लिए नहीं बजट की कमी
सिंचाई सुविधाओं के विस्तार के लिए सरकार ने खूब बजट दिया है। उन्होंने वर्ष 2020-21 में सिंचाई व जल संसाधन विभाग के लिए 4960.48 करोड़ रुपये का बजट आवंटित किया है। ये वर्ष 2019-20 के संशोधित बजट अनुमान 2994.63 करोड रुपये से 65.65 प्रतिशत अधिक है।
ग्रामीण विकास के बजट में भी इजाफा
सरकार ने ग्रामीण विकास को भी खासा तवज्जो दी है। इस बार 6294.79 करोड़ रुपये का बजट इसके लिए रखा गया है। ये 2019-20 के संशोधित बजट अनुमान 5164. 36 करोड़ की तुलना में 21.89 फीसदी अधिक है। विकास एवं पंचायत विभाग को अगले से भी बजट दिया है।
बजट से गांव, गरीब, किसान का होगा भला : दुष्यंत
उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बजट को गांव, गरीब व किसान हितैषी बताया है। उन्होंने कहा कि इससे तीनों वर्गों की समस्याएं दूर होंगी। हरियाणा की अर्थव्यवस्था में कृषि का अहम योगदान है। सीएम ने बजट में हर वर्ग को कुछ न कुछ दिया है। कृषि मंत्री जेपी दलाल ने कहा है कि सरकार सही दिशा में जा रही है। कृषि, किसान कल्याण व सिंचाई विभाग के लिए दिख खोलकर बजट आवंटित कर सीएम इन किसानों का हितैषी होने का परिचय दिया है।
किसान ऐसे पा सकेंगे ब्याज रहित कर्ज
. किसान निर्धारित समय पर ऋण की अदायगी करे
. किसान मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल पर लिए गए सभी सहकारी ऋणों को घोषित करे
. फसल के खरीद मूल्य में से ऋण की सीमा तक की अदायगी खरीद एजेंसी सीधे उस संस्था के खाते में जमा करवाई जाएगी, जिससे किसान ने ऋण लिया है।
कृषि क्षेत्र के लिए ये भी प्रावधान
. 2020-21 में कृषि व किसान कल्याण विभाग के प्रत्येक खंड कार्यालय में फसल बीमा योजना के अंतर्गत बीमा कंपनियों के प्रतिनिधि उपलब्ध रहेंगे
. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को भविष्य में ट्रस्ट मॉडल की रूपरेखा पर चलाने पर भी विचार
. मुख्यमंत्री परिवार समृद्धि योजना के तहत भी फसल बीमा प्रीमियम का भुगतान करने का प्रावधान
. अटल भूजल योजना को पानी की कमी वाले 36 खंडों में सुचारू रूप से चलाने के लिए कानूनी ढांचा बनेगा
. सॉयल हैल्थ कार्ड को मेरी फसल मेरा ब्यौरा पोर्टल से भी जोड़ा जाएगा।
. 11 लाख एकड़ भूमि लवणीय व जलभराव की समस्या से प्रभावित, 2020-21 में एक लाख एकड़ भूमि को सुधारने का लक्ष्य। मिशन मोड में पीपीपी के तहत बढ़ावा देंगे
. अगले महीने अल्प बजट प्राकृतिक खेती पर राज्यस्तरीय कार्यशाला
. गोदामों में चोरी रोकने के लिए भण्डारण निगम, हैफेड, खाद्य एवं आपूर्ति विभाग के सभी गोदामों में सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। इस वर्ष 52 गोदामों में कैमरे लगाने का लक्ष्य
. फसल विविधिकरण को अपनाने वाले किसान मास्टर ट्रेनर के रूप में चयनित किए जाएंगे।
. एक किसान दूसरे किसानों के कृषि उपकरणों जैसे ट्रैक्टर, रोटावेटर, कंबाइन हारवेस्टर इत्यादि का उपयोग कर सके, इसके लिए किसान कल्याण प्राधिकरण एक मोबाइल ऐप बनाएगा।
. विद्यालयों और महाविद्यालयों के विज्ञान के विद्यार्थियों को मिट्टी व जल परीक्षण के लिए प्रशिक्षित करेंगे, उन्हें प्रमाण पत्र दिया जाएगा, वे प्राध्यापक की देख-रेख में मिट्टी व जल परीक्षण का काम एक प्रमाणित व्यवसायी के रूप में कर सकेंगे।
. सभी पात्र छोटे व सीमांत किसानों को मशीनों व कृषि यंत्रों पर अनुदान बिना लाटरी के
. छोटे कृषि उपकरणों के निर्माताओं को भी सब्सिडी
. पैक हाउस, ग्रेडिंग, पैकिंग, प्रीकूलिंग, राइपनिंग चैंबर, मधुमक्खी पालन, शहद प्रसंस्करण, टिशू कल्चर, झींगा एवं मत्स्य पालन, मुर्गी पालन, सूअर पालन, बल्क दूध शीतकरण व एफपीओ द्वारा स्थापित 20 किलोवाट लोड तक के कोल्ड स्टोर को 2.75 रुपये प्रति यूनिट सस्ती बिजली
. वर्ष 2022 तक 1000 और नए किसान उत्पादक संगठन बनाए जाएंगे।
. किसान उत्पादक सगठनों को प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता
. टमाटर, प्याज, आलू, किन्नू, अमरूद, मशरूम, स्ट्राबेरी, अदरक, गोभी, मिर्च, बेबीकॉर्न, स्वीटकॉर्न की प्रोसेसिंग के लिए राज्य में चिह्नित फसल समूहों में नई इकाइयां स्थापित की जाएंगी। . खाद्य सामग्री को पैकिंग व ब्रांडिंग के साथ बिक्त्रस्ी हेतु वीटा एवं हैफेड की तर्ज पर राज्य भर में चिह्नित स्थानों पर 2000 आधुनिक बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
. सेक्स सोर्टिड सीमन पशुपालकों को मात्र 200 रुपये प्रति स्ट्रा की रियायती दर पर मिलेगा
. गौशालाओं में बेसहारा पशुओं के नियंत्रण व आश्रय प्रदान करने के लिए प्रावधान को 30 करोड़ रुपये से बढ़ाकर 50 करोड़ रुपये किया
. खारे पानी के मत्स्य फार्म के तहत जल क्षेत्र को बढ़ाया जाएगा और दो बड़े पेल्लेट फीड मिल प्लांट और 10 छोटे फीड मिल प्लांट स्थापित किए जाएंगे।
. पहली बार 250-250 एकड़ क्षेत्रों में कैट फिश तथा पिलापिया कल्चर शुरू की जाएंगी। मत्स्य पालन के लिए सामुदायिक भूमि की खुदाई भी की जाएगी।
. झींगा किसानों के लिए एक प्रॉन चिल्लिंग एंड प्रोसेसिंग सेंटर बनाया जाएगा। किसानों को कोल्ड चेन की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी।
. पंचकूला में टिक्करताल, यमुनानगर, करनाल और पानीपत में पश्चिमी यमुना नहर जैसे प्राकृतिक जलाशयों में घटती मछली प्रजातियों के संरक्षण से प्राकृतिक मछलियों का संरक्षण और संवर्धन
. परंपरागत मछली पालन प्रजातियों से हटकर नई कैटफिश प्रजातियों का पालन आरंभ किया जाएगा।
. लगभग 2500 एकड़ जलमग्न क्षेत्र को मत्स्य पालन के अधीन लाने के लिए बजट में प्रावधान
एसवाईएल के लिए रखे सौ करोड़
मेवात क्षेत्र में पेयजल उपलब्ध कराने के लिए सरकार ने केएमपी एक्सप्रेसवे के सामानांतर बादली के पास गुरुग्राम वाटर सप्लाई चैनल से पाईप लाइन के माध्यम से गुरुग्राम नहर तक पानी पहुंचाने के लिए मेवात फीडर नहर के निर्माण करने का निर्णय लिया है। इसके साथ ही 450 क्यूसिक की क्षमता वाली जीडब्ल्यूएस चैनल का पुनर्निर्माण ककरोई हैड से बादली तक किया जाएगा। उमरा माइनर तथा शादीपुर माइनर के पुनर्वास के लिए पांच करोड़ रुपये की अनुमानित लागत से जलापूर्ति सुदृढ़ की जाएगी।
‘हर खेत को पानी’ के ध्येय को साकार करने के लिए जलमार्गों को पक्का करने की लंबाई को कृषि कमांड क्षेत्र के अनुरूप 24 फीट प्रति एकड़ से बढ़ाकर 40 फीट प्रति एकड़ करने का निर्णय लिया गया है। कच्चे जलमार्गों को पक्का करना एवं पुराने जलमार्गों का पुनर्वास नौ इंच मोटी दीवार द्वारा किया जाएगा, जिसके परिणाम-स्वरुप राज्य में सिंचाई सघनता में वृद्धि होगी। पुनर्वास के लिए वर्तमान में 20 वर्ष की अवधि को जहां किसान चाहेंगे, कम करके 15 वर्ष कर दिया जाएगा।
1828 एमएलडी की शोधन क्षमता वाले 207 एसटीपी. से उपचारित अपशिष्ट जल का उपयोग करने के लिए 1098.25 करोड़ रुपये की लागत की एक परियोजना मंजूर की गई है। इससे यमुना नदी एवं घग्गर नदी में गिरने वालेे गंदे पानी के बहाव को रोका जा सकेगा । नहरी पानी के भंडारण के लिए औसतन 10 फीट की गहराई वाले लगभग 160 टैंकों का निर्माण किया जाएगा, जिनकी भंडारण क्षमता 16 मिलियन घन फुट होगी। इस प्रकार कुल प्रदेश में लगभग 80 हजार एकड़ भूमि पर सूक्ष्म सिंचाई की सुविधा शुरू की जाएगी।
विभिन्न नहरों पर रियल टाईम डिस्चार्ज डाटा प्राप्त करने के लिए चार करोड़ रुपये की लागत से स्वचालित इलैक्ट्रोनिक गेज लगाए जा रहे हैं। यह व्यवस्था आउट्लेटस से अतिरिक्त पानी के इस्तेमाल व चोरी का पता लगाने में सहायक होगी। इसके अलावा, स्मार्ट मोबाइल एप्लीकेशन भी तैयार किया जा रहा है, जिससे किसानों को नहरों के रोटेशनल प्रोग्राम तथा अंतिम छोर पर पानी की उपलब्धता के बारे में जानकारी मिल सकेगी। गैर-मानसून के दौरान 763.13 हैक्टेयर मीटर की शुद्ध जल भंडारण क्षमता के आदिबद्री बांध के निर्माण की एक परियोजना सरकार के विचाराधीन है।
हरियाणा सरकार को समझौता ज्ञापन के तहत उपरी यमुना नदी बोर्ड को 458.42 करोड़ रुपये की प्रारम्भिक राशि 5 सालों में चरणबद्ध रूप में देनी है ताकि इन बांधों का निर्माण हो सके। तदनुसार, वित्तीय वर्ष 2020-21 में 100 करोड़ रुपये के बजट का प्रस्ताव किया गया है। हरियाणा राज्य में आधारभूत संरचनाओं को सुदृढ़ करने के लिए हरियाणा सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग की नहरों व नालों के जर्जर व पुराने पुलों के पुनर्वास व पुनर्निर्माण के कार्य को प्राथमिकता के आधार पर चरणबद्ध तरीके से किया जाएगा। इस उद्देश्य के लिए वित्तीय वर्ष 2020-21 में 150 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव है ।
जीएसटी से राजस्व और फर्जीवाड़ा बढ़ा
नए पंजीकृत डीलरों के भौतिक सत्यापन के एक विशेष अभियान के फलस्वरूप, 16,966 फर्जी डीलरों का पता चला और उन्हें विपंजीकृत किया गया। 190 व्यावसायिक संस्थाओं से जुड़े धोखाधड़ी के पंजीकरण और आईटीसी के फर्जी दावे के मामलों में 102 प्राथमिकी दर्ज की गई हैं। जीएसटी के तहत पंजीकृत व्यापारियों के लिए मुख्यमंत्री व्यापारी सामूहिक निजी दुर्घटना बीमा योजना शुरू की है। जिसमें कुल 3.13 लाख पंजीकृत कर दाताओं से जुड़े 3.86 लाख व्यक्ति लाभार्थी होंगे।
इस योजना में दुर्घटना में मृत्यु या स्थाई दिव्यांगत होने पर पांच लाख रुपये का बीमा कवर होगा। एक दूसरी योजना मुख्यमंत्री व्यापारी क्षतिपूर्ति बीमा योजना शुरू की है, जिसमें 3.13 लाख व्यापारियों के स्टॉक या फर्नीचर के नुकसान की भरपाई करने के लिए 5 लाख रुपये से 25 लाख रुपये तक का बीमा किया गया है। इन दोनों स्कीमों के लिए संपूर्ण प्रीमियम का भुगतान सरकार ने किया है।
दिल का ख्याल, कैंसर पीड़ित का दर्द भी कम होगा
इस साल स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण क्षेत्र के लिए वर्ष 2020-21 में 6533.75 करोड़ रुपये आवंटित करने का प्रस्ताव किया है। प्रस्तावित परिव्यय में स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए 4201.16 करोड़ रुपये, चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान के लिए 1701.50 करोड़ रुपये, आयुष के लिए 353.29 करोड़ रुपये, कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य देखभाल के लिए 237.85 करोड़ रुपये और खाद्य एवं औषध प्रशासन के लिए 39.94 करोड़ रुपये शामिल हैं।
सरकार ने दावा किया है कि एमआरआई, सीटी स्केन, कैथ लैब और डायलिसिस की सुविधा के साथ-साथ वर्ष 2020-21 में ही सभी जिला अस्पतालों में कैंसर के इलाज के लिए कीमोथैरेपी का प्रावधान भी किया जाएगा।‘सोरबिट्रेट’ की गोली प्रथम सहायता के रूप में रेलवे स्टेशनों, बस स्टैंडों, अनाज मंडी इत्यादि प्रमुख सार्वजनिक स्थानों पर मुफ्त रखी जाएगी, ताकि किसी भी नागरिक को अचानक दिल से संबंधित तकलीफ जानलेवा न हो जाए।
जिला यमुनानगर, कैथल तथा सिरसा में तीन नए सरकारी मेडिकल कालेज भी बनाने का निर्णय लिया है। इसके अलावा, जिला भिवानी, जींद, महेंद्रगढ़ तथा गुरुग्राम में चार और सरकारी मेडिकल कालेज खोले जा रहे हैं, जिनके लगभग दो से तीन वर्षों में शुरू होने की संभावना है। इसके अतिरिक्त कुटेल, करनाल में पंडित दीनदयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ सांइसेस तथा नल्हड़, मेवात सरकारी मेडिकल कालेज में एक सरकारी डेंटल कॉलेज भी खोला जा रहा है।
राज्य में गंभीर बीमारियों से ग्रस्त मरीजों की सुविधा के लिए प्रदेश के सरकारी मेडिकल कालेजों मे वेंटीलेटर की संख्या 190 से बढ़ाकर 400 कर दी जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग की 27 नई एएलएस. एंबुलेंस को वर्तमान में चल रही 21 एंबुलेंसों के साथ जोड़ने की योजना है। सभी जिला अस्पताल व सब-डिवीजन अस्पताल कवर हो सकेंगे। इसके अतिरिक्त, 47 अतिरिक्त मोबाइल मेडिकल यूनिट प्रस्तावित हैं ताकि एक मोबाइल मेडिकल यूनिट कम से कम दो सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों को कवर कर सके। यह मोबाइल मेडिकल यूनिट गांव-गांव जाकर ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य जांच कराएगी।
कुछ के बजट पर चलाई कैंची तो कुछ के बजट में की वृद्धि
बिजली, पानी, खेल, परिवहन, शहरी और ग्रामीण विकास ये ऐसे महकमे हैं, जिन पर सरकार की ‘कृपा’ कुछ खास नहीं बरसी। बिजली, परिवहन और खेल विभाग के बजट पर तो कैंची ही चल गई। कुल मिलाकर इस बजट में सरकार की मेहरबानी बिजली-पानी से ज्यादा लोगों की सेहत और किसानी पर ही रही। अनुमानित बजट में अपेक्षाकृत सबसे ज्यादा वृद्धि कृषि एवं किसान कल्याण गतिविधियों और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण क्षेत्र में ही देखने को मिली।
18 सुपर लग्जरी के साथ ही मिलेंगी 867 स्टैंडर्ड नॉन एसी बसें
हरियाणा में लोगों को सुरक्षित, किफायती, कुशल और विश्वसनीय परिवहन प्रणाली उपलब्ध करवाने के लिए परिवहन क्षेत्र को 2307.44 करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं। इनसे सामान्य व सुपर लग्जरी वातानुकूलित बसों की संख्या बढ़ाई जाएगी। 31 मार्च, 2020 तक 18 सुपर लग्जरी एसी मल्टी-एक्सल बसें खरीदने की प्रक्रिया चल रही है। वर्ष 2020-21 में बीएस-6 उत्सर्जन मानकों को पूरा करने वाली 867 स्टैंडर्ड नॉन-ए.सी. बसों की खरीद भी पाइपलाइन में है।
इसके अलावा, विभाग ने ऑनलाइन बोली प्रणाली आधार पर किलोमीटर स्कीम के तहत भी सैकड़ों बसों को बेड़े में शामिल किया है। सीएम मनोहर लाल ने कहा कि विभाग ने साथ-साथ मैनुअल टिकटिंग प्रणाली को डिजिटल बनाने के उद्देश्य से बूट मॉडल पर इलेक्ट्रॉनिक टिकट इश्यूइंग मशीनों, आरएफआईडी आधारित बस पास सिस्टम और जीपीएस सिस्टम के क्रियान्वयन की प्रक्रिया शुरू कर दी है, जिसके सितंबर, 2020 तक पूरी तरह से लागू हो जाने की संभावना है।
जानिए किस विभाग को कितना मिला बजट
शिक्षा : इस बार बजट में सरकार ने तकनीकी शिक्षा पर ज्यादा जोर देने का इरादा दिखाया है। लिहाजा परंपरागत शिक्षा बजट में इस बार करीब 2 प्रतिशत की मामूली वृद्धि की गई है, जबकि तकनीकी शिक्षा में ये वृद्धि 11 प्रतिशत से ज्यादा है। इस वर्ष 2020-21 के बजट में परंपरागत शिक्षा बजट में वृद्धि दर 28.60 प्रतिशत व तकनीकी शिक्षा में 21.35 प्रतिशत है। वर्ष 2019-20 के बजट में ये वृद्धि दर 26.4 प्रतिशत व तकनीकी शिक्षा के लिए 10.1 प्रतिशत थी। वर्ष 2018-19 में वृद्धि दर 10.9 प्रतिशत व तकनीकी शिक्षा के लिए 20.2 प्रतिशत और वर्ष 2017-18 में वृद्धि दर 18.43 प्रतिशत और तकनीकी शिक्षा में मामूली वृद्धि ही की गई थी।
खेल एवं युवा मामले विभाग : इस बार खेल एवं युवा मामले विभाग के बजट में पिछले वर्ष की अपेक्षाकृत वृद्धि दर कम रही। वर्ष 2020-21 में खेल एवं युवा मामले विभाग के बजट में 12.83 प्रतिशत वृद्धि की गई है। वर्ष 2019-20 में ये वृद्धि दर 13.9 प्रतिशत थी वर्ष 2017-18 में तो इस विभाग के बजट में जबदस्त वृद्धि हुई थी और उस साल ये वृद्धि दर 59.10 प्रतिशत थी।
स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग : इस महकमे का बजट भी इस बार जबरदस्त तरीके से बढ़ाया गया। लोगों की सेहत की चिंता की चिंता करते हुए स्वास्थ्य बजट में इस बार वर्ष 2020-21 के लिए 23.03 प्रतिशत की वृद्धि की गई। वर्ष 2019-20 में ये वृद्धि 12.3 प्रतिशत, वर्ष 2018-19 में 25.02 प्रतिशत और वर्ष 2017-18 में बजट वृद्धि 15.52 प्रतिशत रही।
सिंचाई एवं जल संसाधन : सरकार की चूंकि किसान की चिंता है। इसलिए किसानी से जुड़े इस महकमे पर भी सरकार की फुल कृपा बरसी। वर्ष 2020-21 में इस महकमे के बजट में 65.65 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई। वर्ष 2018-19 में ये वृद्धि 20.01 प्रतिशत और वर्ष 2017-18 में 13.62 प्रतिशत की वृद्धि थी।
बिजली : हालांकि ये महकमा भी सरकार के बडे़ फोकस महकमे में आता है। लेकिन इस बार वर्ष 2020-21 के लिए बिजली से जुड़ी गतिविधियों के लिए 7302.86 करोड़ का अनुमानित बजट निर्धारित किया गया। इसी के साथ नवीकरणीय (सौर) ऊर्जा के लिए 256.64 करोड़ का प्रावधान किया गया है। वर्ष 2019-20 में ये बजट क्रमश: 12988.61 करोड़ व सौर ऊर्जा के लिए 475.91 करोड़ था। वर्ष 2018-19 में यह बजट 15372.16 करोड़ और सौर ऊर्जा के लिए 112.85 करोड़ था। यानी तीन साल से बजट में लगातार कटौती हो रही है।
परिवहन : जनता की सुविधा वाला यह महत्वपूर्ण महकमा है। लेकिन हैरत की बात यह कि इस बार इस महकमे के बजट में भी पिछले साल के अपेक्षाकृत कैंची चल गई। वर्ष 2020-21 में परिवहन क्षेत्र के लिए अनुमानित बजट में 2307.44 करोड़ रखा गया है। जोकि वर्ष 2019-20 में 2605.00 करोड़, वर्ष 2018-19 में 2538.40 करोड़ और वर्ष 2017-18 में 2239.43 करोड़ था।
शहरी स्थानीय निकाय विभाग : गांवों की अपेक्षाकृत इस बजट में सरकार का फोकस शहरों पर ज्यादा दिखा। इसलिए इस विभाग के लिए अनुमानित बजट में लगभग 1 हजार करोड़ की वृद्धि की गई है। वर्ष 2020-21 में इस महकमे का बजट 4916.51 करोड़ रखा गया है। वर्ष 2019-20 में बजट 3994.95 करोड़, वर्ष 2018-19 में 4221.83 करोड़, वर्ष 2017-18 में 3869.63 करोड़ व वर्ष 2016-17 में 3408.16 करोड़ था।
सैनिकों, अर्ध सैनिकों को ये सौगात
सैनिकों और अर्ध सैनिकों के आश्रितों के लिए निशुल्क कोंचिग स्कीम, उच्च कोटि की शिक्षा, एमफिल एवं पीएचडी के लिए फैलोशिप और कौशल विकास स्कीम शुरू की जाएगी।
बिजनेस शुरू करने वाले कर्मियों को कर्ज गांरटी
सरकार उद्यमिता को बढ़ावा देने के लिए सरकारी कर्मचारियों के अनुभव का फायदा उठाना चाहती है। इसलिए अगर सरकारी कर्मचारी दस साल की सेवा के बाद नौकरी छोड़कर अपना बिजनेस शुरू करना चाहते हैं तो बैंकों से कर्ज लेने पर उनकी गारंटी देगी।
कश्मीरी प्रवासी परिवारों को प्रति सदस्य 1250 रुपये
हरियाणा में रह रहे कश्मीरी प्रवासी परिवारों को वित्तीय सहायता योजना के तहत अब 1000 की जगह 1250 रुपये दिए जाएंगे। इसकी अधिकतम सीधा प्रति परिवार 5000 रुपये थी जिसे भी बढ़ाकर 6250 कर दिया गया है। निशक्त बच्चों को अब 1650 रुपये तो निराश्रित बच्चों को 1350 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे।
‘मेरा शहर सर्वोत्तम शहर’ से स्मार्ट बनेंगे शहर, बदलेगी सूरत
ये इरादा वित्तमंत्री मनोहर लाल ने बजट के दौरान पेश किया। इसी के चलते सरकार शहरी स्थानीय निकाय विभागों के सशक्तीकरण के साथ ही उन्हें स्वाययता देने के लिए प्रतिबद्ध है और इसके लिए इस वर्ष 4916.51 करोड़ रुपये आवंटित किये गए हैं। मनोहर लाल ने सदन में यह भी बताया कि नगर निगमों के मेयर पद के साथ-साथ अब नगर परिषदों व नगरपालिकाओं में प्रधान के पद पर प्रत्यक्ष चुनाव का प्रावधान बनाया गया है।
यानी प्रधान भी अब सीधे जनता चुनेगी। अभी तक नप व नपा प्रधानों का चयन नगर पालिका और परिषद में चुने गए पार्षदों की वोटिंग से होता था।
इसी के तहत वर्ष 2020-21 से सभी शहर के सभी मार्गों पर समुचित प्रकाश के लिये एक नई योजना ‘जगमग शहर योजना’ का प्रस्तावित है, जिसके अंतर्गत सभी शहरी क्षेत्रों के लगभग 5 लाख लाइट प्वाइंटों को एलईडी लाइट से बदला जाएगा।
कुछ चुने हुये शहरों के सर्वांगीण विकास के लिये भी ‘मेरा शहर सर्वोत्तम शहर’ नामक एक नई योजना बनाई गई है। इस योजना के तहत चयनित किये गये शहरों में आधुनिक जन सुविधाओं जैसे न्यूनतम 18 घंटे पेय जल वितरण, आवारा पशु मुक्त बनाना, पार्कों का आधुनिकीकरण, प्रमुख चौराहों एवं सार्वजनिक स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे की व्यवस्था, सार्वजनिक स्थलों पर शौचालयों की व्यवस्था, एक मुख्य सड़क पर बिजली के तारों को भूमिगत करना इत्यादि का प्रबंध किया जाएगा।
चयनित शहरों को उनकी वित्तीय स्थिति के अनुसार सरकार द्वारा अनुदान दिया जाएगा एवं इसके लिये बजट में उपयुक्त धनराशि का प्रावधान है। मनोहर लाल के अनुसार यद्यपि सरकार का लक्ष्य सभी स्थानीय निकायों को पूर्ण रूप से स्वायत्त बनाना है, इस कार्य में कुछ समय लगने की संभावना है। ऐसे सभी वित्तीय रूप से कमजोर निकायों में आधारभूत सुविधाएं देने के लिये ‘मंगल शहर योजना’ में 200 करोड़ रूपये का बजट प्रावधान किया गया है।
शहरी क्षेत्रों में डेयरी मालिकों द्वारा गोबर डालने के कारण सीवर जाम हो जाता है, इस समस्या के समाधान के लिये शहरी निकायों द्वारा ‘डेयरी टू डेयरी’ गोबर एकत्रित किया जायेगा और इस सेवा के लिये डेयरियों पर उचित शुल्क भी लगाया जाएगा। सभी अनाज मंडियों में फायर ब्रिगेड की समुचित व्यवस्था की जाएगी और गुरुग्राम, सोनीपत, पंचकूला, फरीदाबाद जैसे बड़े महानगरों में बहुमंजिला इमारतों की अग्नि सुरक्षा के लिये हाईड्रोलिक प्लेटफार्म उपलब्ध करवाये जाएंगे।
शहरी क्षेत्रों में वायु प्रदूषण एक प्रमुख समस्या है। इसके समाधान के लिये ‘ई-मोबिलीटी’ अभियान चलाया जाएगा, जिसके अंतर्गत पुराने डीजल ऑटो को ई-ऑटो, ई-रिक्शा, सीएनजी ऑटो से बदलना, शहरी क्षेत्रों में बिजली चलित बसों का संचालन, घर-घर से कूड़ा इकट्ठा करने के लिये ई-रिक्शा आदि की व्यवस्था की जायेगी। शहरी क्षेत्रों में रेहड़ी एवं फड़ी लगाने वाले विक्रेताओं के पुनर्स्थापन के लिये ‘सायंकालीन हाट’ स्थापित किये जाएंगे।
सड़क और रेल पटरी पर सरपट दौड़ें ‘जिंदगी’, खर्च हाेंगे अरबों
इसी दिशा में वर्ष 2020-21 में लोक निर्माण (भवन एवं सड़कें) विभाग के लिए 3541.32 करोड़ रुपये का बजट प्रस्ताव किया गया है। प्रधानमंत्री ग्रामीण सड़क योजना-पार्ट थ्री के तहत वर्ष 2020-21 के दौरान लगभग 1000 किलोमीटर सड़कों का सुधार होने की आशा है। वर्ष 2019-20 में नाबार्ड स्कीम के तहत 138.33 करोड़ रुपये की राशि की 40 परियोजनाएं स्वीकृत हुई। वर्ष 2020-21 में 232.76 करोड़ रुपये की लागत से 81 सड़कों का सुधार करने का एक प्रस्ताव नाबार्ड को भेजा गया है।
राज्य सरकार की पहल पर, पांच परियोजनाएं भिवानी से चरखी दादरी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-148बी को चार मार्गी बनाने, भिवानी बाईपास समेत खरक से भिवानी तक राष्ट्रीय राजमार्ग-709ई को चार मार्गी बनाने, पिंजौर-बद्दी-नालागढ़ राष्ट्रीय राजमार्ग-21ए पर पिंजौर में बाईपास, कैथल से अंबाला तक राष्ट्रीय राजमार्ग-65 को चार मार्गी बनाने, पंजाब सीमा से जींद वाया नरवाना राष्ट्रीय राजमार्ग-71 को चार मार्गी बनाने और पंचकूला से यमुनानगर तक राष्ट्रीय राजमार्ग-73 को चार मार्गी बनाने की भारत सरकार द्वारा स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। इन सभी परियोजनाओं का कार्य प्रगति पर है।
भारत सरकार ने नवंबर 2014 से हरियाणा के लिए 17 नये राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किये हैं, जिनकी कुल लंबाई 1069.82 किलोमीटर है। इनमें दो मुख्य ग्रीन फील्ड कॉरिडोर इस्माइलाबाद से नारनौल (राष्ट्रीय राजमार्ग-152डी) और सोहना-वडोदरा (राष्ट्रीय राजमार्ग-148एन) शामिल हैं। इनके निर्माण का कार्य आवंटित कर दिया गया है।
चार दिन में गड्ढा नहीं भरा, तो शिकायतकर्ता को मिलेंगे 100 रुपये
सरकार ने समयबद्ध तरीके से मरम्मत सुनिश्चित करने के लिए ‘स्टेट ऑफ आर्ट’ जेटपैचर मशीनों के माध्यम से पैच और गड्ढों की मरम्मत का कार्य आवंटित किया है। सड़कों पर गड्ढ़ों की सूचना विभाग के अधिकारी तथा आम जनता द्वारा ‘हरपथ एप‘ पर अपलोड की जा रही है। ठेकेदार द्वारा 96 घंटों में गड्ढे की मरम्मत की जानी है। इस समय-सीमा में मरम्मत न किए जाने पर ठेकेदार पर 1000 रुपये प्रति गड्ढा प्रतिदिन के स्वत: जुर्माने का प्रावधान है।
अगर शिकायत 96 घंटे में दूर नहीं की जाती है तो इस जुर्माने की राशि में से उसी शिकायतकर्ता को 100 रुपये प्रोत्साहन राशि देने की योजना को पहली अप्रैल, 2020 से लागू किया जाएगा। वर्ष 2019-20 में 438 किमी लंबी 182 नई सड़कों का निर्माण 382.29 करोड़ रुपये की लागत से किया गया है। 1130 करोड़ रुपये की लागत से 1566 किमी लंबे छह करम या इससे अधिक चौड़े सभी 530 कच्चे रास्तों को पक्की सड़क में बदलने का कार्य समयबद्ध तरीके से किया जाएगा।
211 किमी नई रेल लाइनों की डीपीआर केंद्र को भेजी
5600 करोड़ रुपये की लागत से, हरियाणा ऑर्बिटल रेल कॉरिडोर परियोजना रेलवे मंत्रालय द्वारा स्वीकृत की गई है। इसके अतिरिक्त, 150 किलोमीटर लंबी जींद-हांसी नई रेलवे लाइन और 61 किलोमीटर लंबी करनाल-यमुनानगर नई रेलवे लाइनों की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट को भी अंतिम रूप देकर रेलवे मंत्रालय को भेजा गया है।
कैथल शहर में लगभग 4.5 किमी लंबी एलिवेटेड रेलवे लाइन की परियोजना तैयार की गई है, जिसे स्वीकृति के लिए रेल मंत्रालय को शीघ्र प्रस्ताव भेजा जायेगा। इस परियोजना से कैथल शहर तीन रेलवे क्रासिंग (देवीगढ़ रोड, करनाल रोड, पुराने अंबाला-हिसार बाईपास) से मुक्त हो जाएगा, जिससे यातायात का संचालन सुचारू रूप से होगा।
इसी प्रकार, जींद शहर की चारों रेलवे लाइनों (जींद-पानीपत, जींद-रोहतक, जींद-सोनीपत, प्रस्तावित जींद-हांसी) को आपस में जोड़कर पांडु पिंडारा के पास एक नया जक्शन बनाने का अध्ययन किया जा रहा है। कलानौर और गोहाना रेलवे स्टेशन पर हिसार से हरिद्वार जाने वाली ट्रेन के ठहराव के लिए तथा बवानीखेड़ा में किसान एक्सप्रैस (बठिंडा-दिल्ली ट्रेन) के ठहराव के लिए भी अनुग्रह करेंगे।
हड़प्पा स्थलों को दर्शाने वाली तैयार होगी एटलस
कुरुक्षेत्र में बुद्ध स्तूप को पर्यटन आकर्षण स्थल के रूप में विकसित किया जा रहा है। राज्य के प्राचीन स्थलों के संरक्षण के लिए पुरानी तहसील बिल्डिंग नूंह, लोहारू किले और तावडू के मकबरा परिसर को राज्य संरक्षित स्मारक घोषित किया गया है। इसके अलावा, पंचकूला में एक स्टेट-ऑफ-आर्ट पुरातात्विक संग्रहालय स्थापित किया जा रहा है।
इसके अतिरिक्त, हिसार के गांव राखीगढ़ी में एक स्थल संग्रहालय एवं व्याख्या केंद्र निर्माणाधीन है। केन्द्रीय बजट 2021 में राखीगढ़ी को देश के एक प्रतिष्ठित स्थल के रूप में विकसित करने की घोषणा करने के लिए केंद्रीय वित्त मंत्री का धन्यवाद करते हुए उन्होंने कहा कि इसके लिए केन्द्रीय बजट में 1000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
खान एवं भूविज्ञान विभाग के लिए 111.02 करोड़ रुपये के परिव्यय का प्रस्ताव करते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने सतत विकास के सिद्धांतों का पालन करते हुए राज्य के खनिज संसाधनों का व्यवस्थित अन्वेषण और दोहन सुनिश्चित करने के लिए ठोस कदम उठाए हैं।
हर घर में जल: केंद्र से पहले लक्ष्य पूरा करने का सपना
वित्तमंत्री ने वर्ष 2020-21 में जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग के लिए 3591.27 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। उन्होंने कहा कि यद्यपि भारत सरकार द्वारा जल जीवन मिशन के अंतर्गत सभी घरों में पेयजल कनेक्शन उपलब्ध करवाने का लक्ष्य 2024 तक रखा गया है, लेकिन हमने हरियाणा में इस कार्य को वर्ष 2022 में ही पूरा करने का लक्ष्य रखा है। हरियाणा के ग्रामीण क्षेत्रों में लगभग 32.88 लाख घर हैं और वर्तमान में राज्य के कुल 17.58 लाख घरों में पेयजल कनेक्शन हैं। ग्रामीण जल आपूर्ति बढ़ोतरी कार्यक्रम के अंतर्गत गांवों में जल आपूर्ति का स्तर 55-70 लिटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन तक बढ़ाने के लिए मौजूदा जल आपूर्ति सुविधाओं का सुधार एवं मजबूतीकरण किया जाएगा।
गांवों में 135 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन की दर से जल आपूर्ति बढ़ाने तथा सीवरेज व्यवस्था बिछाने के लिए शुरू की गई महाग्राम योजना अब तक 128 गांव चिह्नित किए गए हैं। प्रथम चरण के 20 गांवों का कार्य 31 मार्च 2021 तक पूरा हो जाएगा, दूसरे चरण में 37 गांवों का कार्य 31 दिसंबर 2023 तक व अंतिम तीसरे चरण में शेष 71 गावों का कार्य 31 दिसंबर 2024 तक पूरा कर दिया जाएगा। नया सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट भूना में जून, 2020 तक स्थापित कर दिया जाएगा व शेष 6 शहरों नांगल चौधरी, राजौंद, इस्माइलाबाद, सिसाय, बास व सढ़ौरा में परिशोधन सयंत्र लगाने का कार्य आगामी वित वर्ष 2020-21 मे शुरू किया जायेगा।
इन्द्री, पलवल व युमनानगर में मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट की जगह नये सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाये जाएंगे। इसके अलावा कैथल, पून्डरी, ऐलनाबाद, फतेहाबाद, रतिया, टोहाना, सिरसा, रोहतक, तोशाम, असंध व सिवानी के मौजूदा सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट का उन्नयन किया जाएगा। राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र प्लांनिंग बोर्ड के तहत गन्नौर, सोहना, बेरी, झज्जर, कलानौर, सांपला, खरखौदा, होडल व समालखा में सीवरेज लाइन डालने व सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के उन्नयन व नवीनीकरण इत्यादि के कार्य वर्ष 2020-21 में किये जाएंगे।
मनोहर के विजन में केजरी मॉडल की झलक
उन्होंने राष्ट्रीय मुद्दों को साइड में रखते हुए स्थानीय मुद्दों व कामों को गिनाने पर ही ध्यान केंद्रित रखा, जिससे एकतरफा जीत मिली। अब मनोहर लाल भी हरियाणा में वैसा ही करिश्मा करके दिखाना चाहते हैं। चूंकि, हरियाणा में उनकी डगर आसान नहीं है। जजपा के साथ गठबंधन कर उन्होंने सरकार बनाई है। जिसकी मुश्किलें शुरू से ही कम नहीं हो रही। पूर्व मनोहर सरकार के मंत्रियों पर जहां भ्रष्टाचार के आरोप लग रहे हैं, वहीं सहयोगी आजाद विधायक बलराज कुंडू अपना समर्थन वापस ले चुके हैं।
जजपा विधायक रामकुमार गौतम ने भ्रष्टाचार सहित अन्य मुद्दों को लेकर सरकार व अपनी पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोला हुआ है। जिससे सरकार के लिए स्थिति असहज बन रही है। गौतम सड़क से सदन तक सरकार को घेरने की कोई कसर नहीं छोड़ रहे। टोहाना से जजपा विधायक भी कड़े तेवरों में हैं। वे भी विज से भ्रष्टाचार के मामलों की शिकायत कर चुके हैं। जजपा विधायकों जोगी राम सिहाग, नैना चौटाला व ईश्वर सिंह ने भी विकास को लेकर अपना स्टैंड स्पष्ट रखा है। जिस पर सरकार सदन में घिर रही है।
इसे देखते हुए भाजपा 2024 में अपने बूते सत्ता में आने का सपना देख रही है। 2014 के चुनाव में भाजपा ने प्रदेश में 47 सीटें जीती थी, जो 2019 में कम होकर 40 रह गईं। नारा 75 पार का था, जिसकी हवा निकली। अब सीएम मनोहर लाल ने वर्तमान बजट के लिए गठबंधन सरकार के पहले ही साल में सीधे जनता से जुड़ने की कोशिश की है ताकि आगामी विधानसभा चुनाव में विपक्ष को मात दी जा सके।
पैसा कहां से आएगा, कहां खर्च होगा
केंद्र से मिलेगा ---- 16.21 प्रतिशत
नाबार्ड समेत अन्य लेनदेन से - 32.8 प्रतिशत
राज्य के करों से -- 37.61 प्रतिशत
गैर कर राजस्व -- 11. 14 प्रतिशत
अन्य राजस्व प्राप्ति --- 2.96 प्रतिशत
यहां खर्च होगा
आर्थिक सेवाओं पर 22.80 प्रतिशत
सामाजिक सेवाओं पर 34.65 प्रतिशत
सामान्य सेवाएं 13.94 प्रतिशत
कर्ज ब्याज वापसी 28.61प्रतिशत
शिक्षा की बदलेगी सूरत, नौनिहाल को हर दिन दूध
इससे अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा ग्रहण करने के इच्छुक बच्चों के लिए 119 राजकीय आदर्श संस्कृति विद्यालय उपलब्ध होंगे। अभी प्रदेश में बस्तामुक्त एवं अंग्रेज़ी माध्यम के 418 प्राथमिक विद्यालय हैं। सरकार ने ऐसे 1000 और विद्यालयों की स्थापना उन गांवों में करने का निर्णय लिया गया है, जहां अभी दो से अधिक राजकीय प्राथमिक विद्यालय चल रहे हैं। विज्ञान विषयों को बढ़ावा देने के साथ-साथ विज्ञान को कृषि से जोडऩे के लिए सभी सरकारी महाविद्यालयों और पॉलिटेक्निकों में मिट्टी परीक्षण को बढ़ावा दिया जाएगा।
अगले शैक्षणिक सत्र से दस और राजकीय महाविद्यालयों में विज्ञान संकाय की कक्षाएं शुरू होंगी। सभी महाविद्यालयों और विश्वविद्यालयों में विज्ञान के उभरते क्षेत्रों से संबंधित नए कोर्स शुरू किए जाएंगे। 10वीं कक्षा के बाद विज्ञान में विद्यार्थियों की रुचि बढ़ाने के लिए विज्ञान के प्रोत्साहक भर्ती करने का प्रस्ताव है। विज्ञान संकाय वाले 1487 राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालयों को स्मार्ट विद्यालयों में परिवर्तित किया जाएगा। विश्वकर्मा कौशल विश्वविद्यालय शैक्षणिक सत्र 2020-21 के दौरान डिप्लोमा/अवर स्नातक/स्नातकोत्तर स्तर के 31 न पाठ्यक्रम शुरू करेगा।
गरीब बच्चों को नौवीं से बारहवीं तक भी मुफ्त शिक्षा
एक लाख 80 हजार रुपये वार्षिक से कम आय वाले गरीब परिवारों के बच्चों को भी 9वीं से 12वीं कक्षा तक मुफ्त शिक्षा मिलेगी। उन्हें मुफ्त पाठ्य पुस्तकें, लेखन सामग्री एवं वर्दी का प्रावधान किया जाएगा। दूर-दराज के स्कूलों में 9वीं कक्षा या 11वीं कक्षा में पढ़ने जाने वाले अनुसूचित जाति के विद्यार्थियों को निशुल्क साइकिलें प्रदान की जाएंगी। डिजिटल लाइब्रेरी के अलावा सभी कालेजों में 2000 सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे।
स्वच्छ भारत प्रांगण स्कीम के तहत 4000 बहुद्देशीय वर्कर्स रखे जाएंगे
स्वच्छ भारत प्रांगण योजना के तहत प्राइमरी स्कूलों के परिसर, कक्षाओं, शौचालयों की सफाई, पेयजल का प्रबंध और पौधों को पानी देने के लिए बहुद्देशीय कार्यकर्ता रखे जाएंगे। 500 विद्यार्थियों की संख्या वाले 3581 स्वतंत्र प्राइमरी स्कूलों में 3793 कार्यकर्ताओं व 500 से अधिक छात्र संख्या वाले स्कूलों में 212 कार्यकर्ता नियुक्त होंगे। इन्हें दस हजार रुपये प्रति माह मिलेंगे। सभी स्कूलों में चारदीवारी का निर्माण होगा। गेट तक पक्का रास्ता बनेगा। स्कूलों का सौंदर्यीकरण किया जाएगा। हर स्कूल में चरणबद्घ तरीके से सौर पैनल लगेंगे।
80 फीसदी से अधिक अंक पर 1500 से 6000 छात्रवृत्ति
मुख्यमंत्री सक्षम छात्रवृत्ति योजना के तहत पांचवीं कक्षा में 80 प्रतिशत अंक प्राप्त करने के लिए संचालित परीक्षा के आधार पर छठी, सातवीं व आठवीं कक्षा के छात्रों को 1500 से 6000 रुपये तक छात्रवृत्ति मिलेगी।
रोजगार के लिए बनेगा प्लेसमेंट सेल
सरकार सक्षम युवाओं लिए एक विशेष प्लेसमेंट सेल बनाएगी। सभी तरह के अल्पावधि कौशल के लिए सिंगल पोर्टल शुरू किया जाएगा ताकि उम्मीदवारों को एक ही क्लिक पर सही कौशल प्रशिक्षण और उसके लिए प्रशिक्षण केंद्र की जानकारी हासिल करने में सुविधा हो सके। रोजगार के अवसर बढ़ाने के लिए पैकिंग व ब्रांडिंग के साथ खाद्य सामग्री की बिक्री को वीटा एवं हैफेड की तर्ज पर राज्य भर में चिन्हित स्थानों पर 2000 आधुनिक बिक्री केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
चार हजार खिलाड़ियों को डाइट भत्ता बढ़ने का फायदा
डाइट भत्ता 250 रुपये होने से 4000 खिलाड़ियों को फायदा होगा। विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों के उत्कृष्ट प्रदर्शन को सुनिश्चित करने के लिए उच्च प्रदर्शन प्रशिक्षण केंद्र खोला जाएगा। खिलाड़ियों के लिए समुचित संख्या में छात्रावासों का निर्माण होगा। युवाओं की क्षमताओं को बढ़ाने और ऊर्जा का राष्ट्र निर्माण में दोहन करने के लिए युवा मंडलों की संख्या तथा रजिस्टर्ड युवा मंडलों की गतिविधियों के लिए बजट बढ़ाया गया है।