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विस सत्रः 4 घंटे की बहस और कांग्रेस, इनेलो का वाकआउट
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
Updated Tue, 01 Dec 2015 01:51 PM IST
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हरियाणा विधानसभा में धान खरीद के मुद्दे पर चार घंटे चली जोरदार बहस के बाद राज्य सरकार ने विपक्षी दलों की उस मांग को मानने से इंकार कर दिया, जिसमें धान खरीद की जांच सीबीआई से या हाईकोर्ट के सीटिंग जज से कराने की मांग रखी गई थी।
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सरकार के रवैये के विरोध में पहले तो कांग्रेस के सदस्य सदन का बायकाट कर गए, बाद में इनेलो ने सदन में नारेबाजी करते हुए वाकआउट किया। विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष? इनेलो के अभय चौटाला के अलावा जाकिर हुसैन, जसविंदर सिंह संधू, परमेंद्र सिंह ढुल और नसीम अहमद ने प्रदेश में धान खरीद में धांधली का आरोप लगाते हुए विधानसभा अध्यक्ष को काम रोको प्रस्ताव दिया था।
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वहीं कांग्रेस की ओर से विधायक दल की नेता किरण चौधरी ने भी इसी मामले में स्पीकर को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव देकर चर्चा कराने की मांग की थी। स्पीकर कंवर पाल गुर्जर ने इनेलो के काम रोको प्रस्ताव को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में बदलकर कांग्रेस के प्रस्ताव के साथ ही बहस की अनुमति दी।
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अभय चौटाला ने बहस शुरू करते हुए सदन को बताया कि प्रदेश में धान खरीद में करीब 10 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा का घोटाला हुआ है। इस चर्चा में हिस्सा लेते हुए इनेलो के अन्य नेताओं ने भी इस घोटाले की जांच सीटिंग जज या एसआईटी का गठन करके कराने की मांग की।
कांग्रेस की ओर से ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा, विधायक करण दलाल ने भी हिस्सा लिया और सरकार ने पूरे मामले की जांच सीबीआई से कराने की मांग की गई। सरकार की ओर से खाद्य एवं आपूर्ति राज्यमंत्री कर्णदेव कांबोज ने सदन में जवाब देते हुए धान की खरीद और उसके एवज में किसानों को किए गए भुगतान का ब्योरा पेश किया गया।
उन्होंने इस बात से इंकार किया कि धान खरीद में कोई धांधली हुई है। लेकिन अभय चौटाला अपने सवाल पर डटे रहे कि जब नमी के नाम पर किसानों का पैसा काटा गया है तो यह पैसा किसकी जेब में गया है। कृषि मंत्री ओपी धनखड़ खड़े हुए और उन्होंने कहा कि सरकार ने बासमती को पहली बार एमएसपी पर बिकवाया, जिसे विपक्ष ने घोटाला कह दिया है।
सदन के नेता व मुख्यमंत्री ने प्रदेश में धान खरीद का पूरा ब्योरा आंकड़ों के साथ पेश किया। लेकिन विपक्ष इससे भी संतुष्ट नहीं हुआ और मामले की जांच सीबीआई से या सीटिंग जज से कराने पर अड़ा रहा। चार घंटे तक चली इस बहस के बाद जब सत्ता पक्ष ने विपक्ष की मांग मानने से इंकार कर दिया तो कांग्रेस के सदस्य सदन से वाकआउट कर गए।
इनेलो के सदस्यों ने मुख्यमंत्री को याद दिलाया कि वे सभी दलों के दो-दो सदस्यों को लेकर सदन की एक कमेटी का गठन करने पर राजी थे, तो वही कमेटी बना दें, जिसकी अध्यक्षता विधानसभा अध्यक्ष करें। लेकिन सरकार की ओर से इस पर भी सहमति नहीं जताने पर इनेलो के सदस्य पहले तो वेल में आकर नारेबाजी करने लगे। उसके बाद वे सदन से बाहर चले गए।