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हरियाणा विधानसभा स्पीकर को हाईकोर्ट से राहत, सीबीआई जांच से इनकार

Sat, 18 Feb 2017 09:31 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Sat, 18 Feb 2017 09:31 AM IST
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Haryana Assembly Speaker relief from punjab and haryana highcourt
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट - फोटो : File Photo
पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा विधानसभा के स्पीकर के निजी सचिव की ओर से लॉ अधिकारी को नियमित करने के लिए पैसों की मांग के आरोपों की सीबीआई जांच की अपील खारिज कर दी। हाईकोर्ट ने शुक्रवार सुबह मामले में फैसला सायं तक सुरक्षित रख लिया था, लेकिन सायं के समय याचिका को खारिज करने का आदेश सुना दिया। इस मामले में याची ने हरियाणा सरकार, विधानसभा स्पीकर, विधानसभा सचिव, लायजन आफिसर वकील सिंह, विजिलेंस ब्यूरो के महानिदेशक को प्रतिवादी बनाया था।
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इससे पहले भी हाईकोर्ट में विधानसभा में भर्ती में धांधली के आरोप की याचिका विचाराधीन है। इस मामले में पंचकूला निवासी वेद प्रकाश ने हाईकोर्ट को बताया कि उसे विधानसभा में एडहॉक पर लॉ अधिकारी के पद पर 2010 में नियुक्त किया गया था। तब से वे लगातार इस पद पर एक्सटेंशन हासिल करते रहे। हरियाणा सरकार ने जून 2014 में ग्रुप-बी के एडहॉक कर्मियों को नियमित करने की नीति बनाई थी।
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इसी नीति के तहत याची ने भी सरकार को रिप्रेजेंटेशन देकर नियमित करने का आग्रह किया था। इसके बाद उस पद पर नए सिरे से भर्ती का विज्ञापन जारी कर दिया गया, जिस पद पर याची एडहॉक पर नियुक्त था। 
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हाईकोर्ट ने याचिका को खारिज करते हुए सीबीआई जांच से किया इनकार

Haryana Assembly Speaker relief from punjab and haryana highcourt
Punjab And Haryana Highcourt Chandigarh - फोटो : File Photo
याचिकाकर्ता ने इस पद के लिए आवेदन भी दिया, लेकिन याचिकाकर्ता का आवेदन यह कहते हुए खारिज कर दिया गया कि उसकी आयु अधिक हो गई है। याचिकाकर्ता ने सरकार को एक और अर्जी देकर बताया कि वह पिछले पांच वर्षों से भी अधिक समय से इस पद पर एडहॉक के तौर पर काम करता रहा है। उसके आवेदन को स्वीकार किया जाना चाहिए, लेकिन उसका आवेदन स्वीकार नहीं किया गया। 

याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया है कि विधानसभा के एक अधिकारी वकील चंद ने उससे उसकी फाइल क्लीयर करने के लिए पैसे मांगे थे, जो उसने दे भी दिए थे। इस मामले में याचिकाकर्ता ने वकील सिंह पर गंभीर आरोप लगाते हुए कोर्ट को बताया कि वकील सिंह केवल टेलीफोन आप्रेटर था, लेकिन नई सरकार के आते ही उसे चार माह में चार प्रमोशन देकर लायजन आफिसर नियुक्त कर उसे स्पीकर का निजी सचिव बना दिया। इसके चलते उसे अंडर सेक्रेटरी के पद के बराबर वेतनमान दिया जाने लगा।

वकील सिंह ने उसकी सेवा को नियमित करने के लिए कई बार कई बहाने से पैसे लिए, इसके साथ ही उसको यह भी धमकी दी कि इस पद के लिए लोग 20 लाख रुपये देने के लिए तैयार हैं, उसने तो केवल तीन लाख ही दिए हैं। याचिकाकर्ता ने आरोप लगाया कि उसे और पैसे न देने के कारण प्रताड़ित किया गया। इसके खिलाफ उसने हाईकोर्ट में पहले भी याचिका दायर की। हाईकोर्ट के आदेश पर विजिलेंस ने जांच की, लेकिन कुछ नहीं किया। वह सीएम, पीएम, स्पीकर हर स्तर पर शिकायत कर चुका है, लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। याचिकाकर्ता ने इस मामले की सीबीआई जांच की मांग की थी।
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