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इस महीने 250 गांवों में ओलावृष्टि से फसलों के नुकसान: कैप्टन
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़।
Updated Tue, 29 Mar 2016 12:36 PM IST
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विधानसभा में बजट पेश करने जाते हुए कैप्टन अभिमन्यु
- फोटो : अमर उजाला
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हरियाणा के राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री कैप्टन अभिमन्यु ने कहा है कि प्रदेश में मार्च 2016 के दौरान हुई बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं से प्रदेश के 10 जिलों के लगभग 250 गांवों में गेहूं और सरसों की फसल में हुए नुकसान की रिपोर्ट उपायुक्तों की ओर से भेजी गई है। यह जानकारी कैप्टन अभिमन्यु ने हरियाणा विधानसभा के बजट सत्र के दौरान ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर दी।
विधानसभा स्पीकर ने विधायक बलवान सिंह व तीन अन्य विधायकों की ओर से लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के साथ ओलावृष्टि से नुकसान के मुद्दे पर विधायक परमेंद्र सिंह ढुल, ओम प्रकाश, राजदीप, अनूप कुमार, रामचंद कंबोज, जयप्रकाश, पिरथी सिंह और नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला द्वारा लाए गए प्रस्तावों को जोड़ते हुए सोमवार को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सदन में चर्चा कराई। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि सरकार की ओर से उपरोक्त गांवों में रबी की फसलों की विशेष गिरदावरी के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसनों के हितों की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी के प्रति अति सजग है और विशेष गिरदावरी रिपोर्ट प्राप्त होने के तुरंत बाद फसलों में हुए नुकसान का मुआवजा वितरण करने का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
उन्होंने कहा कि सभी जिलों के उपायुक्तों से फसलों के हुए नुकसान बारे सूचना मांगी गई थी। अब तक अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, रेवाड़ी, फरीदाबाद, पलवल, महेंद्रगढ़, गुड़गांव, पानीपत और करनाल से सूचना मिली है कि तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि से इन जिलों में कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उपायुक्त भिवानी, जींद, फतेहाबाद, हिसार, झज्जर, कैथल, रोहतक, सिरसा, सोनीपत और मेवात से लगभग 250 गांवों में फसलों के नुकसान की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2015-16 में सूखे, बाढ़, ओलावृष्टि और कीट हमले के कारण फसलों को हुए नुकसान से प्रभावित किसानों को 2224.66 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई। इसी प्रकार वर्ष 2013-14 व 2014-15 के 268.93 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान भी वर्ष 2015-16 के दौरान किया गया।
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इसके बाद चर्चा में हिस्सा लेते हुए नेता प्रतिपक्ष ने अधिकतम 5 एकड़ फसल के लिए ही मुआवजा दिए जाने के फैसले पर एतराज जताते हुए खराब हुई सारी फसल के लिए मुआवजा दिए जाने की मांग की। इनेलो के अन्य विधायकों ने सरकार से जानना चाहा कि विशेष गिरदावरी का काम कब तक पूरा होगा। निर्दलीय विधायक जयप्रकाश ने कलायत विधानसभा क्षेत्र में जल्द गिरदावरी पूरी करने की मांग की, वहीं भाजपा विधायक यादव ने नांगलचौधरी में पानी की कमी से फसलें खराब होने का मुद्दा उठाते हुए कैप्टन अभिमन्यु ने उस क्षेत्र में गिरदावरी कराने की आग्रह किया।
फसल बीमा पर सरकार ने दिया जवाब
हालांकि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं से फसलों को हुए नुकसान के बारे में था लेकिन इस पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सरकार की ओर से लाई जा रही फसल बीमा योजना पर भी सवाल उठाए। इनेलो के परमेंद्र सिंह ढुल ने तो यह मांग भी की कि सरकार इस विषय पर सदन में विशेष चर्चा सत्र बुलाए। उन्होंने फसल बीमा के प्रावधानों पर भी सवाल खड़े किए। विधायक जसविंदर संधू और कंबोज ने भी फसल बीमा को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में सवाल उठाए।
इस पर, कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने सदन में कहा कि फसल बीमा को लेकर कोई संशय नहीं है। उन्होंने कहा कि बीमा किस एजेंसी से कराया जाए, प्रदेश सरकार इस बारे में केंद्र के फैसले पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र ने कोई एजेंसी नहीं सुझाई तो प्रदेश सरकार अपनी ही किसी एजेंसी के बारे में विचार करेगी। उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना अगली फसल से लागू किया जाना तय है। उन्होंने कहा कि फसलों का बीमा तो पद्धतियों से हो सकता है, एक- मौसम की आधार पर, दूसरे- फसल की कटाई के हिसाब से। मौसम के कारण किसी क्षेत्र में फसल को हुए नुकसान का आंकलन किया जा सकता है और दूसरी पद्धति से फसल कटने पर कम पैदावार जैसी समस्या को बीमे में शामिल किया जा सकता है। इस बारे में सरकार अभी फैसला लेगी।
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विधानसभा स्पीकर ने विधायक बलवान सिंह व तीन अन्य विधायकों की ओर से लाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के साथ ओलावृष्टि से नुकसान के मुद्दे पर विधायक परमेंद्र सिंह ढुल, ओम प्रकाश, राजदीप, अनूप कुमार, रामचंद कंबोज, जयप्रकाश, पिरथी सिंह और नेता प्रतिपक्ष अभय चौटाला द्वारा लाए गए प्रस्तावों को जोड़ते हुए सोमवार को ध्यानाकर्षण प्रस्ताव पर सदन में चर्चा कराई। ध्यानाकर्षण प्रस्ताव का जवाब देते हुए कैप्टन अभिमन्यु ने कहा कि सरकार की ओर से उपरोक्त गांवों में रबी की फसलों की विशेष गिरदावरी के आदेश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसनों के हितों की रक्षा के लिए अपनी जिम्मेदारी के प्रति अति सजग है और विशेष गिरदावरी रिपोर्ट प्राप्त होने के तुरंत बाद फसलों में हुए नुकसान का मुआवजा वितरण करने का कार्य प्रारंभ कर दिया जाएगा।
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उन्होंने कहा कि सभी जिलों के उपायुक्तों से फसलों के हुए नुकसान बारे सूचना मांगी गई थी। अब तक अंबाला, पंचकूला, यमुनानगर, कुरुक्षेत्र, रेवाड़ी, फरीदाबाद, पलवल, महेंद्रगढ़, गुड़गांव, पानीपत और करनाल से सूचना मिली है कि तेज हवा के साथ बारिश और ओलावृष्टि से इन जिलों में कोई नुकसान नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि उपायुक्त भिवानी, जींद, फतेहाबाद, हिसार, झज्जर, कैथल, रोहतक, सिरसा, सोनीपत और मेवात से लगभग 250 गांवों में फसलों के नुकसान की रिपोर्ट प्राप्त हुई है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार की ओर से वर्ष 2015-16 में सूखे, बाढ़, ओलावृष्टि और कीट हमले के कारण फसलों को हुए नुकसान से प्रभावित किसानों को 2224.66 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई। इसी प्रकार वर्ष 2013-14 व 2014-15 के 268.93 करोड़ रुपये की बकाया राशि का भुगतान भी वर्ष 2015-16 के दौरान किया गया।
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इसके बाद चर्चा में हिस्सा लेते हुए नेता प्रतिपक्ष ने अधिकतम 5 एकड़ फसल के लिए ही मुआवजा दिए जाने के फैसले पर एतराज जताते हुए खराब हुई सारी फसल के लिए मुआवजा दिए जाने की मांग की। इनेलो के अन्य विधायकों ने सरकार से जानना चाहा कि विशेष गिरदावरी का काम कब तक पूरा होगा। निर्दलीय विधायक जयप्रकाश ने कलायत विधानसभा क्षेत्र में जल्द गिरदावरी पूरी करने की मांग की, वहीं भाजपा विधायक यादव ने नांगलचौधरी में पानी की कमी से फसलें खराब होने का मुद्दा उठाते हुए कैप्टन अभिमन्यु ने उस क्षेत्र में गिरदावरी कराने की आग्रह किया।
फसल बीमा पर सरकार ने दिया जवाब
हालांकि ध्यानाकर्षण प्रस्ताव बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाओं से फसलों को हुए नुकसान के बारे में था लेकिन इस पर चर्चा के दौरान विपक्षी सदस्यों ने सरकार की ओर से लाई जा रही फसल बीमा योजना पर भी सवाल उठाए। इनेलो के परमेंद्र सिंह ढुल ने तो यह मांग भी की कि सरकार इस विषय पर सदन में विशेष चर्चा सत्र बुलाए। उन्होंने फसल बीमा के प्रावधानों पर भी सवाल खड़े किए। विधायक जसविंदर संधू और कंबोज ने भी फसल बीमा को लेकर ध्यानाकर्षण प्रस्ताव में सवाल उठाए।
इस पर, कृषि मंत्री ओपी धनखड़ ने सदन में कहा कि फसल बीमा को लेकर कोई संशय नहीं है। उन्होंने कहा कि बीमा किस एजेंसी से कराया जाए, प्रदेश सरकार इस बारे में केंद्र के फैसले पर नजर रख रही है। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र ने कोई एजेंसी नहीं सुझाई तो प्रदेश सरकार अपनी ही किसी एजेंसी के बारे में विचार करेगी। उन्होंने कहा कि फसल बीमा योजना अगली फसल से लागू किया जाना तय है। उन्होंने कहा कि फसलों का बीमा तो पद्धतियों से हो सकता है, एक- मौसम की आधार पर, दूसरे- फसल की कटाई के हिसाब से। मौसम के कारण किसी क्षेत्र में फसल को हुए नुकसान का आंकलन किया जा सकता है और दूसरी पद्धति से फसल कटने पर कम पैदावार जैसी समस्या को बीमे में शामिल किया जा सकता है। इस बारे में सरकार अभी फैसला लेगी।