परिवार पहचान विधेयक पारित: डाटा चोरी, नष्ट और लीक करने पर 10 साल सजा, 50 लाख जुर्माना
कांग्रेस के हंगामे के बीच मंगलवार को हरियाणा विधानसभा में परिवार पहचान विधेयक 2021 पास हो गया। इसमें डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही सजा का प्रावधान किया है। प्रदेश में किसकी कितनी संपत्ति है, सबको बतानी होगी। अब सरकार भूमि का डिजिटल डाटा तैयार करेगी।
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हरियाणा सरकार ने परिवार पहचान-पत्र को कानूनी रूप दे दिया है। मंगलवार को विधानसभा में हरियाणा परिवार पहचान विधेयक, 2021 पारित किया गया। सरकारी परियोजनाओं का लाभ लेने के लिए यह लागू किया जाएगा लेकिन अनिवार्य नहीं होगा। अधिसूचना जारी होते ही कानून लागू हो जाएगा। पहचान पत्र का डाटा चोरी, नष्ट, लीक करने या कराने पर दस साल की सजा व 50 लाख रुपये जुर्माना होगा।
अब सरकार भूमि का डिजिटल डाटा तैयार करने की तैयारी में है। परिवार पहचान पत्र व इसकी मदद से प्रदेश की सारी बेनामी संपत्तियों का डाटा सरकार की उंगलियों पर होगा। मंगलवार को परिवार पहचान पत्र को कानूनी दर्जा दिलाने में सरकार को सदन में विपक्ष का तीखा विरोध झेलना पड़ा।
विपक्ष की तरफ से नेता प्रतिपक्ष भूपेंद्र हुड्डा ने मोर्चा संभाला तो सरकार की तरफ से मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कमान अपने हाथ में ली। उन्होंने ही विधेयक को चर्चा के लिए प्रस्तुत किया था, इसलिए विपक्ष की शंकाओं को एक-एक कर दूर किया। परिवार पहचान पत्र योजना लागू होने से 3 लाख गरीब परिवारों की न्यूनतम आय बढ़कर 1.80 लाख होगी। इसके साथ ही विभागों को रियल डाइम डाटा मिलेगा।
डाटा की सुरक्षा सुनिश्चित की गई है। साथ ही सजा का प्रावधान किया है। प्रदेश में किसकी कितनी संपत्ति है, सबको बतानी होगी। जर्मनी के प्रतिनधिमंडल ने भी इस योजना की जानकारी आधा घंटा बैठक कर हासिल की है। अभी तक सभी विभागों का डाटा बिखरा हुआ था और आपस में मेल नहीं खाता था।
हुड्डा ने इस पर कहा कि इसका मकसद जनता की निगरानी है। सरकार इस विधेयक को वापस ले। कांग्रेस विधायक शमशेर गोगी ने कहा कि अगर यह कानून बन जाता है तो 24 अगस्त को काला दिन माना जाएगा। लोकतंत्र की हत्या करने का माध्यम लोकतंत्र के मंदिर को न बनाएं।
डाटा चोरी व गलत जानकारी पर सजा का प्रावधान
- अगर कोई मृत या जीवित व्यक्ति का गलत पहचान पत्र बनवाता है तो उसे तीन साल सजा व पचास हजार रुपये जुर्माना
- परिवार पहचान संख्या धारक को नुकसान पहुंचाने पर भी तीन साल सजा व पंचास हजार रुपये जुर्माना
- अधिकृत न होने के बावजूद सूचना जुटाने वाले को तीन साल सजा व एक लाख रुपये जुर्माना, अगर कोई कंपनी पहचान पत्र के नाम पर डाटा जुटाती है तो उसके कर्मचारी को तीन साल सजा व दस लाख जुर्माना
- डाटा को हानि पहुंचाने, चोरी करवाने, लीक करने पर दस साल की सजा व पचास लाख रुपये जुर्माना
- मीडिया में डाटा लीक करने पर तीन साल सजा, दस हजार जुर्माना
छिपा हुआ गोलमाल बाहर लाया जाएगा: मनोहर लाल
मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने कहा कि जो भी छिपा हुआ गोलमाल है, वह सब बाहर लाया जाएगा। सुधारात्मक योजनाओं से विपक्षी दलों में घबराहट है। सिस्टम ऐसे बने हुए हैं कि जो दबंग है और ऊंचा बोल सकता है वह सभी योजनाओं का लाभ ले जाता है। गरीब अपनी बात बोल नहीं सकता, इसलिए सुविधाओं से वंचित है। अंतिम व्यक्ति की चिंता के लिए किसी ने भी सिस्टम नहीं बनाया।
64 लाख परिवारों ने परिवार पहचान पत्र में अब तक पंजीकरण करवाया है। अभी तक सालाना आय एक लाख 20 हजार रुपये वाले परिवार को गरीब माना जाता था। अब 1.80 लाख रुपये की सालाना आय वाले परिवारों को बीपीएल में शामिल किया जाएगा। हाईकोर्ट से भी इस योजना को मंजूरी मिल चुकी है। 3.30 लाख सरकारी कर्मचारियों में से 298274 अपना परिवार पहचान पत्र बनवा चुके हैं।