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हरियाणा में रिकॉर्ड 76.2 मतदान, 19 पर नजर

Thu, 16 Oct 2014 04:18 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़
ब्यूरो/अमर उजाला, चंडीगढ़ Updated Thu, 16 Oct 2014 04:18 PM IST
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Haryana Assembly Elections Record 76.2% Voting, Counting on 19

हरियाणा विधानसभा चुनाव में मतदान के सभी रिकार्ड टूट गए हैं। आयोग के मुताबिक प्रदेश में 76.2 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। इससे पहले हरियाणा गठन के बाद 1967 में सर्वाधिक मतदान हुआ था। 47 साल बाद 2014 के विधानसभा चुनाव में रिकार्ड टूटा है।

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चुनाव आयोग के मुताबिक आयोग की तरफ से भी अधिक से अधिक मतदाताओं को मतदान करने के लिए प्रेरित किया गया था। राज्य में इस बार एक करोड़ 63 लाख मतदाताओं में से यह मतदान प्रतिशत निकल कर सामने आया है।
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राज्य के 16,357 मतदान केंद्रो पर चुनाव को लेकर मतदान की प्रक्रिया सुबह सात बजे से शुरू हुई थी। सुबह के समय ठंड अधिक होने के कारण मतदाताओं की संख्या अधिक नहीं दिखी, लेकिन धूप निकलते ही मतदाताओं की लाइनें लगनी शुरू हो चुकी थीं।

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वोटिंग में ऐलनाबाद नंबर-1, बड़खल फिसड्डी

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हरियाणा प्रदेश में मतदान ने इस बार नया रिकार्ड बनाया वहीं कुल 90 सीट में से ऐलानाबाद की सीट मतदान में नंबर-1 रही। यहां तो रिकार्ड तोड़ मतदान 89 प्रतिशत मतदान हुआ। यह सीट इसलिए भी अहम है क्योंकि इस सीट पर इनेलो के दिग्गज अभय सिंह चौटाला भी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा से पवन बैनीवाल और कांग्रेस से रमेश भादू मैदान में हैं।

इस सीट पर साल 2009 के विधानसभा चुनाव में 86.27 प्रतिशत हुआ था। जबकि इस साल हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 80.7 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि दूसरे नंबर रानिया में रिकार्ड तोड़ मतदान हुआ है। यहां पर 87.9 प्रतिशत मतदान हुआ है। इस सीट पर कांग्र्रेस के रंजीत सिंह, भाजपा के जगदीश नेहरा और इनेलो के रामचंद्र कंबोज मैदान में है।

साल 2009 में यहां पर 86.9 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि पिछले विधानसभा चुनाव में पूरे प्रदेश में इस सीट पर सबसे ज्यादा मतदान हुआ था। इस साल हुए लोकसभा चुनाव में इस सीट पर 80.51 प्रतिशत मतदान हुआ था। जबकि सबसे कम मतदान पूरे प्रदेश में  बड़खल सीट पर हुआ है।

इस सीट पर 56 प्रतिशत मतदान हुआ। यहां से कांग्रेस के महेंद्र प्रताप, भाजपा के सीमा त्रिखा और इनेलो के चंदर भाटिया ने चुनाव लड़ा है। जबकि बल्लभगढ़ सीट से 58 प्रतिशत मतदान हुआ है।

जिले में सिरसा रहा नंबर वन

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हरियाणा के 21 जिलों में सबसे ज्यादा मतदान सिरसा में हुआ। सिरसा में 84.2 प्रतिशत मतदान हुआ है। जबकि दूसरे नंबर पर जिला फतेहाबाद में 82.4 प्रतिशत मतदान हुआ है। जबकि सबसे कम मतदान जिला फरीदाबाद में 62 प्रतिशत मतदान हुआ है। जबकि जिला गुडगांव में भी 68.2 प्रतिशत मतदान हुआ है।

मुख्य चुनाव अधिकारी श्रीकांत वाल्गद का कहना है कि जिला फरीदाबाद में सबसे कम मतदान हुआ है। उनका कहना है कि लोकसभा चुनाव में भी इस जिले में कम मतदान हुआ था। उनका कहना है कि कम मतदान के कारणों को जानने का प्रयास किया जाएगा।

127 ईवीएम मशीनों खराब हुई
मुख्य चुनाव अधिकारी श्रीकांत वाल्गद ने बताया कि पूरे प्रदेश के मतदान में कुल 127 ईवीएम मशीनें खराब हुई है जिन्हें बदल दिया गया था।

दो बजे हो गया था 50 प्रतिशत मतदान

मतदान का उत्साह बुधवार सुबह 11 बजे तक 15 से 16 प्रतिशत था लेकिन दोपहर दो बजे तक प्रदेश में 50 प्रतिशत मतदान हो गया था।

ईवीएम में बंद हुआ प्रत्याशियों का भाग्य

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हरियाणा विधानसभा चुनाव संपन्न होने के साथ ही प्रदेश की सभी 90 विधानसभा सीटों पर प्रत्याशियों के भाग्य का फैसला ईवीएम मशीनों में कैद हो गया है।

मतदान के बाद ही राजनीतिक दलों के उम्मीदवार गणित लगाते में जुट गए हैं। लेकिन असल तस्वीर 19 अक्तूबर को दोपहर बाद साफ होगी। हरियाणा में किसकी सरकार बनेगी और कौन विपक्ष के तौर पर विधानसभा में भूमिका निभाएगा।

सभी समीकरण मतगणना के बाद स्पष्ट होंगे। लोकसभा चुनाव के बाद सफलता की उम्मीद लगाए भाजपा को कितनी सीटें मिलेगी। इनेलो कितनी सहानुभूति हासिल करेगी और कांग्रेस को विकास का कितना लाभ मिलेगा। इन सभी बातों पर मंथन के बाद मतदाताओं ने अपना फैसला दे दिया है। जिसके बाद नेताओं को नतीजों के आने का इंतजार है।

मतदान कम और अधिक होना भी इस चुनाव में चर्चा का विषय है। मतदान का रिकार्ड टूटने को लोग मोदी की लहर और कांग्रेस के खिलाफ जोड़ रहे हैं। जबकि इनेलो इसे अपने पक्ष में मान कर चल रही है। उम्मीदवारों को फील्ड की मेहनत से भले ही निजात मिल गई है, लेकिन 19 अक्तूबर तक उनके माथे पर चिंता की लकीरें छाई रहेंगी।

गठन के बाद अब तक हरियाणा में मतदान

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वर्ष---------------कुल मतदान प्रतिशत में
1967------------------72.65
1968-------------------57.26
1972--------------------70.46
1977--------------------64.46
1982-------------------69.87
1987------------------71.24
1991------------------65.86
1996------------------70.54
2000--------------------69.01
2005---------------------71.96
2009-----------------------72.29

यह कहना है मुख्य निर्वाचन अधिकारी का

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मुख्य निवार्चन अधिकारी, हरियाणा श्रीकांत वालगद कहते हैं कि अभी तक 76.2 फीसदी मतदान हुआ है। 1967 के विधानसभा चुनाव में यह मतदान 72.65 प्रतिशत था, जो कि 2009 के विधानसभा चुनाव में 72.29 प्रतिशत तक पहुंचा, लेकिन 1967 का रिकार्ड नहीं टूट पाया। यह पहला ऐसा चुनाव है जिसमें मतदान के सभी रिकार्ड टूट गए हैं।

शाम के समय भी मतदान के लिए मतदान केंद्रों में लंबी लाइनें लगी रहीं। हरियाणा में इस बार सबसे अधिक मतदान हुआ है। कांग्रेस और भाजपा के प्रत्याशी सभी 90 विधानसभा से चुनाव लड़ रहे हैं।

जबकि 88 इनेलो के, 87 बसपा,65 हजकां और 17 उम्मीदवार सीपीएम, 14 सीपीआई के उम्मीदवार हैं। इसके अलावा 297 उम्मीदवार पंजीकृत पाट्रियों और 603 उम्मीदवार इस चुनाव में निर्दलीय चुनाव लड़ रहे हैं।

शह और मात के बीच फंसे राजनीति के धुरंधर

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हरियाणा की राजनीति के धुरंधर इस विधानसभा चुनाव में शह और मात के बीच फंसे हैं।

राज्य में हुए रिकार्ड मतदान ने मतदाताओं के साथ प्रत्याशियों को भी सोचने के लिए मजबूर कर दिया है। अब तक के नतीजों को देखे तो अधिक मतदान की कीमत हमेशा सत्ताधारी दल ने चुकाई है।

इस विधानसभा चुनाव में अधिक मतदान किसके खाते में जाएगा, इसकी तस्वीर तो 19 अक्तूबर को साफ होगी। लेकिन कयासों का दौर जारी है। हर पार्टी रिकार्डतोड़ मतदान को अपने सियासी चश्मे से देख रही है।

सत्ताधारी दल ने चुकाई है अधिक मतदान की कीमत

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राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अधिक मतदान का हमेशा सत्ताधारी दल को नुकसान होता है। एग्जिट पोल के नतीजों पर नजर डालें तो चर्चा आम है कि गैर जाट मतदाताओं ने भाजपा के पक्ष में मतदान किया है। जबकि कुछ हद तक जाट मतदाताओं की सहानुभूति पूर्व मुख्यमंत्री ओम प्रकाश चौटाला के पक्ष में नजर आ रही है।

देसवाली और बांगर बेल्ट में कांग्रेस जाट मतदाताओं पर पूरी तरह से कब्जा नहीं कर सकी है। अहीरवाल, उत्तर हरियाणा और बांगर के गैर जाट मतदाताओं को भी सियासी गणितज्ञ भाजपा के खाते में मान के चल रहे हैं। हरियाणा में दलितों को लुभाने में कांग्रेस की सरकारी योजनाएं कितनी कारगर साबित हुई हैं, यह तो परिणाम ही तय करेगा।

अनुमान लगाया जा रहा है कि डेरे के समर्थन ने भाजपा की ताकत बढ़ा दी है। डेरे के समर्थन का फैक्टर काम किया तो भाजपा को बहुत सी सीटों पर टानिक मिल जाएगा। हरियाणा की अलग गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी बनाने के बाद सिख मतदाताओं पर नजरें गड़ाए बैठी कांग्रेस को इसका कितना लाभ मिलेगा। यह स्थिति भी अभी तक स्पष्ट नहीं हुई है।

राज्य में 21 से अधिक सीटें सिख बहुल सीटें हैं, लेकिन विधानसभा चुनाव में हय मुद्दा गूंजता दिखाई नहीं दिया है। फिलहाल भाजपा शहरी क्षेत्रों में मिली बढ़त को अपने और इनेलो ग्रामीण क्षेत्रों में मिली बढ़त को अपने खाते में जोड़ कर देख रही है।

इन सीटों के परिणाम पर रहेगी सबकी नजर

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राज्य में दस से ज्यादा सीटें ऐसी हैं। जहां पर इस बार दिग्गजों की प्रतिष्ठा दांव पर है। इसमें सबसे ज्यादा प्रतिष्ठा की सीट उचाना है। यहां से दिग्गज नेता बीरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता मैदान में है।

इंडियन नेशनल लोकदल के लिए इस बार उचाचा के साथ डबवाली और ऐलनाबाद सीट पर भी प्रतिष्ठा की लड़ाई है। जबकि कांग्रेस को गढ़ी सांपला किलोई सहित सोनीपत, रोहतक और झज्जर की कई सीटों से आस लगी है।

भाजपा के प्रत्याशियों की घेराबंदी भी तगड़ी की गई है, लेकिन देखना यह होगा कि इस चुनाव में भाजपा के मुख्यमंत्री पद के कितने दावेदार जीत कर सामने आएंगे।

भाजपा के मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवारों में मनोहर लाल खटटर, अनिल विज, कृष्णपाल गुर्ज्जर, रामबिलास शर्मा, कैप्टन अभिमन्यू और ओम प्रकाश धनखड़ के नाम शामिल हैं।

राजनीतिक नजर से बेहद अहम उचाना सीट

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राजनीतिक दृष्टि से अहमियत रखने वाली जींद जिले की उचाना सीट से कांग्रेस छोड़कर भाजपा में आए बिरेंद्र सिंह की पत्नी प्रेमलता और ओम प्रकाश चौटाला के पौत्र दुष्यंत चौटाला में कड़ा मुकाबला है।

मौजूदा समय में इस सीट से इनेलो सुप्रीमो ओमप्रकाश चौटाला विधायक हैं। डबवाली से अजय चौटाला की पत्नी नैना चौटाला चुनाव लड़ रही हैं। इस सीट से इनेलो के वरिष्ठ नेता अजय सिंह चौटाला विधायक हैं। ऐलनाबाद से एक बार फिर से अभय चौटाला ने चुनाव लड़ा है।

इसके अलावा गढ़ी सांपाल किलोई से मुख्यमंत्री भूपेंदद्र सिंह हुड्डा कैथल से संसदीय कार्यमंत्री रणदीप सिंह सुरजेवाला, अंबाला शहर से विनोद शर्मा, करनाल से मनोहर लाल खटटर, सिरसा से भाजपा की सुनीता सेतिया, हिसार से सावित्री जिंदल, आदमपुर से कुलदीप बिश्नोई, नारनौंद से कैप्टन अभिमन्यू, महेंद्रगढ़ से राम बिलास शर्मा और रेवाड़ी से कैप्टन अजय सिंह यादव की हार जीत पर प्रदेश की जनता की निगाहें लगी हैं।

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