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Hindi News ›   Chandigarh ›   Haryana Assembly Elections 2019, Review of Candidates in All 12 Assemblies

हरियाणा विधानसभा चुनाव 2019 में कोई हारो चाहे कोई जीतो, गम नहीं...यहां शौक घणां सै चौधर का

Sat, 21 Sep 2019 11:29 AM IST
खुशबू गोयल मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Sat, 21 Sep 2019 11:29 AM IST
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Haryana Assembly Elections 2019, Review of Candidates in All 12 Assemblies
हरियाणा के ग्रामीण - फोटो : फाइल फोटो
दूध, दही के प्रदेश हरियाणा के लोगों में पहलवानी, खेलकूद, फौजी बनकर देशसेवा के साथ-साथ ‘चौधर’ का भी घणां शौक है। चौधराहट के इस शौक में लोग हार-जीत की परवाह भी नहीं करते। कई प्रत्याशी ऐसे हैं जो बार-बार हारने के बावजूद चुनाव मैदान में डटे नजर आते हैं। चुनाव जीत जाएं तो बात दूजी, वरना फिर से किस्मत आजमाने से भी ये पीछे नहीं हटते। यही वजह है प्रदेश ही नहीं बल्कि देश की सियासत में भी हमेशा से हरियाणा का बड़ा दखल रहा है। देश की राजनीति को इस सूबे ने कई बड़े नेता दिए हैं।
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देश के उप प्रधानमंत्री ताऊ देवीलाल से लेकर विदेश मंत्री दिवंगत सुषमा स्वराज सरीखे कई ऐसे नाम हैं, जिन्होंने हरियाणा की सरजमीं से अपना राजनीतिक सफर शुरू किया और फिर एक दिन वे देश के सियासी फलक पर चमके। पंजाब सूबे से अलग होकर ‘चौधरियों’ के इस प्रदेश में पहली बार सन 1967 में विधानसभा चुनाव हुए थे। अब वर्ष 2019 में हरियाणा के 13वें विधानसभा चुनाव होने जा रहे हैं। अब तक हो चुके 12 विधानसभा चुनाव में हरियाणा से कुल 13355 लोग चुनाव लड़ कर अपनी किस्मत आजमा चुके हैं। सूबे में विधानसभा सीटें तो कुल नब्बे हैं।
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मगर आंकड़े देखें तो हर सीट पर चुनाव लड़ने वालों की संख्या अच्छी खासी रही है। वर्ष 1996 में तो हरियाणा में रिकार्ड सबसे ज्यादा 2608 प्रत्याशी चुनावी जंग में उतरे। इनमें से 2022 प्रत्याशी तो केवल आजाद थे, जो किसी राजनीतिक पार्टी से संबंद्ध नहीं थे। इन आजाद प्रत्याशियों ने जीत की आस ले सिर्फ चौधर के शौक में विधानसभा का चुनाव लड़ा था। इन आजाद प्रत्याशियों में से 10 प्रत्याशी जीते भी थे, लेकिन 2001 प्रत्याशी इतनी बुरी तरह हारें कि उनकी जमानत तक जब्त हो गई। इसी चुनाव में हांसी विधानसभा सीट पर सबसे ज्यादा 58 प्रत्याशियों ने चुनाव लड़ा था।
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इस  विधानसभा चुनाव में 70.5 प्रतिशत मतदान हुआ था और बंसीलाल की हरियाणा विकास पार्टी (हविपा) के सबसे ज्यादा 65 में से 33  प्रत्याशी जीते थे। हविपा का गठबंधन भाजपा से था, भाजपा ने भी 25 में से 11 सीटें पर जीत दर्ज की थी। कुछ आजाद प्रत्याशियों की मदद से इस बार चौधरी बंसीलाल सरकार बनाने में भी कामयाब रहे थे।

पहले चुनाव में 471 प्रत्याशियों ने ठोकी थी ताल

सन 1967 में 471 प्रत्याशी मैदान में थे,  वर्ष 1968 में 398 प्रत्याशियों, वर्ष 1972 में 384, वर्ष 1977 में 671 प्रत्याशियों, वर्ष 1982 में 1095 प्रत्याशियों, वर्ष 1987 में 1322 प्रत्याशियों, वर्ष 1991 में 1885 प्रत्याशियों, वर्ष 1996 में 2608 प्रत्याशियों, वर्ष 2000 में 965 प्रत्याशियों, वर्ष 2005 में 983 प्रत्याशियों, वर्ष 2009 में 1222 प्रत्याशियों व वर्ष 2014 में 1351 प्रत्याशियों ने विधानसभा चुनाव में अपनी किस्मत आजमाई।

राजनीतिक दृष्टि से हरियाणा का अपना अलग महत्व रहा है। पंजाब से अलग होने के बाद सूबे के विकास और नेतृत्व में हरियाणा के कई नेताओं ने अपना अहम योगदान दिया है। स्वस्थ राजनीति के लिए  यह अच्छी बात है कि यहां बहुत से लोग में चुनाव लड़ने का शौक रखते है। युवाओं को भी साफ-सुधरी सोच के साथ सूबे केा विकास पथ पर आगे ले जाने के लिए राजनीति में आगे आना चाहिए।
- डा. रमेश मदान, राजनीतिक मामलों के जानकार
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