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विधानसभा चुनाव...बगावत के साथ जीत का दबाव लेकर लड़ेंगे प्रत्याशी, कुछ बागी सीधे मैदान में उतरे
Tue, 08 Oct 2019 10:38 AM IST
खुशबू गोयल
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
मोहित धुपड़, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Tue, 08 Oct 2019 10:38 AM IST
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हरियाणा के चुनावी समर में दो दर्जन से अधिक प्रत्याशी ऐसे भी हैं, जो दोहरे दबाव के साथ मैदान में लड़ रहे हैं। अपने-अपने दलों से टिकट पाने में कामयाब हुए इन प्रत्याशियों पर अपनों की बगावत के अलावा जीत का भी दबाव है, क्याेंकि टिकट न मिलने से खफा इनके‘अपनोें’ यानी अपनी ही राजनीतिक पार्टियों के नेताओं ने इन प्रत्याशियों और पार्टी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। कुछ बागी तो इन प्रत्याशियों के खिलाफ मैदान में उतर चुके हैं, जबकि कुछ बागी निष्क्रिय होकर भीतरघात कर इन्हे नुकसान पहुंचाएंगे।
ऐसे में इन प्रत्याशियों के लिए जीत दर्ज करना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। देखा जाए तो सबसे ज्यादा बगावत भाजपा और कांग्रेस में हुई है। प्रदेश की लगभग बारह सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी जहां अपनों की बगावत से जूझ रहे हैं। वहीं तेरह के करीब कांग्रेस प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्हे नुकसान पहुंचाने के लिए टिकट न मिलने से नाराज उनकी पार्टी के नेताओं ने मोर्चा खोल रखा है। इसके अलावा इनेलो और जजपा के भी दो प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्हें नाराज अपनों की मुखलाफत झेलनी पड़ रही है।
ऐसे में इन सभी प्रत्याशियों के लिए अब जीतना इसलिए भी जरूरी हो गया है, क्योंकि इन सभी प्रत्याशियों को टिकट दिलवाने में इनके आका नेताओं ने हाईकमान तक एड़ी चोटी का जोर लगाया था। इन प्रत्याशियों की सीटों से कई अन्य दावेदार भी मजबूती से लॉबिंग में जुटे हुए थे, लेकिन उसके बावजूद ये प्रत्याशी अपने आकाओं के आशीर्वाद से टिकट पाने में कामयाब रहे। जिसके चलते अब दूसरे नाराज दावेदार इन प्रत्याशियों के खिलाफ हैं। अपनों के इसी नाराजगी ने अब इन प्रत्याशियों के समक्ष दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।
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ऐसे में इन प्रत्याशियों के लिए जीत दर्ज करना एक बड़ी चुनौती बन चुका है। देखा जाए तो सबसे ज्यादा बगावत भाजपा और कांग्रेस में हुई है। प्रदेश की लगभग बारह सीटों पर भाजपा के प्रत्याशी जहां अपनों की बगावत से जूझ रहे हैं। वहीं तेरह के करीब कांग्रेस प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्हे नुकसान पहुंचाने के लिए टिकट न मिलने से नाराज उनकी पार्टी के नेताओं ने मोर्चा खोल रखा है। इसके अलावा इनेलो और जजपा के भी दो प्रत्याशी ऐसे हैं, जिन्हें नाराज अपनों की मुखलाफत झेलनी पड़ रही है।
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ऐसे में इन सभी प्रत्याशियों के लिए अब जीतना इसलिए भी जरूरी हो गया है, क्योंकि इन सभी प्रत्याशियों को टिकट दिलवाने में इनके आका नेताओं ने हाईकमान तक एड़ी चोटी का जोर लगाया था। इन प्रत्याशियों की सीटों से कई अन्य दावेदार भी मजबूती से लॉबिंग में जुटे हुए थे, लेकिन उसके बावजूद ये प्रत्याशी अपने आकाओं के आशीर्वाद से टिकट पाने में कामयाब रहे। जिसके चलते अब दूसरे नाराज दावेदार इन प्रत्याशियों के खिलाफ हैं। अपनों के इसी नाराजगी ने अब इन प्रत्याशियों के समक्ष दोहरी चुनौती खड़ी कर दी है।
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इन प्रत्याशियों को जीतकर दिखाना होगा दम
दरअसल, दोहरी चुनौती झेल रहे इन प्रत्याशियों को अब जीतकर अपना दम पार्टी और उन बागी अपनों को दिखाना होगा, जो उनकी राह में मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं। इन प्रत्याशियों में मुलाना से भाजपा प्रत्याशी राजबीर बराड़ा, थानेसर से कांग्रेस प्रत्याशी अशोक अरोड़ा, शाहबाद से जजपा प्रत्याशी पूर्व विधायक ईश्वर पलाका, इंद्री से कांग्रेस प्रत्याशी नवजोत कश्यप पंवार, पटौदी से भाजपा प्रत्याशी सत्यप्रकाश जरवाटा, सफीदों से कांग्रेस प्रत्याशी सुभाष देसवाल, रादौर से कांग्रेस प्रत्याशी बिशनलाल सैनी, रादौर से भाजपा प्रत्याशी मंत्री कर्णदेव कंबोज, सढौरा से कांग्रेस प्रत्याशी रेणु बाला, पृथला से भाजपा प्रत्याशी सोहनपाल छौक्कर, अंबाला शहर से कांग्रेस प्रत्याशी पूर्व विधायक जसबीर मलौर, रेवाड़ी से भाजपा प्रत्याशी सुनील मुसेपुर, दादरी से भाजपा प्रत्याशी बबीता फौगाट, सिरसा से भाजपा प्रत्याशी प्रदीप रतुसरिया, रानियां से कांग्रेस प्रत्याशी विनीत कंबोज, अंबाला छावनी से कांग्रेस प्रत्याशी रेणु सिंगला अग्रवाल, कलायत से कांग्रेस प्रत्याशी जयप्रकाश, बरवाला से कांग्रेस प्रत्याशी भूपेंद्र गंगौर, बहादुरगढ़ से कांग्रेस प्रत्याशी राजेंद्र जून, महम से भाजपा प्रत्याशी शमशेर खरकड़ा, गुहला चीहका से कांग्रेस प्रत्याशी दिल्लू राम बाजीगर, पूंडरी से भाजपा प्रत्याशी एडवोकेट वेदपाल, अंसध से कांग्रेस शमशेर सिंह विर्क गोगी, फरीदाबाद एनआईटी के भाजपा प्रत्याशी नागेंद्र भडाना, शाहबाद से इनेलो प्रत्याशी संदीप कुमार, पेहवा से भाजपा प्रत्याशी संदीप सिंह हॉकी खिलाड़ी ऐसे प्रत्याशी जिनके हलकों में उनके अपनों ने बगावती सुर छेड़ रखे हैं। हालांकि सभी दलों के नेता अपने-अपने इन प्रत्याशियों के खिलाफ उठ रही बगावत को शंात करने में जुटे हुए हैं, मगर जिन सीटों पर बागी मैदान में कूद चुके हैं, उन सीटों पर दलों के प्रत्याशियों का इम्तिहान अब और कड़ा हो गया है।