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हरियाणा विस चुनावः राजनीति में नहीं कोई किसी का साथी, दल बदलने का सिलसिला हुआ तेज

Tue, 17 Sep 2019 03:19 PM IST
खुशबू गोयल प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़
प्रवीण पाण्डेय, अमर उजाला, चंडीगढ़ Published by: खुशबू गोयल Updated Tue, 17 Sep 2019 03:19 PM IST
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Haryana Assembly Elections 2019, Politicians Changing Parties Regularly
भूपेंद्र हुड्डा-शैलजा कुमारी - फोटो : सोशल मीडिया
विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही हरियाणा में सियासत की बयार बह चली है। आचार संहिता के साथ ही चुनाव का शोर शुरू हो जाएगा। इससे पहले सियासत की मुख्यधारा में आने के लिए नेताओं ने राजनीतिक दलों के दरवाजों पर दस्तक दे दी है। नेता सभी दलों का दरवाजा खटखटा रहे हैं। ऐसे में भाजपा में एंट्री मुश्किल से हो रही है। सत्तासीन भाजपा अपने खेमे में जांच परख कर उम्मीदवारों को शामिल कर रही है। जबकि कांग्रेस चारों ओर से घेराबंदी कर भाजपा को शिकस्त देना चाह रही है।
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यही वजह है कि कांग्रेस इस समय किसी भी बड़े नाम को शामिल करने से गुरेज नहीं कर रही है। यह बात अलग है कि जो लोग कांग्रेस में शामिल हो रहे हैं उनमें से कई नेता पहले भाजपा का दरवाजा भी खटखटा चुके हैं। भाजपा की ओर से टिकट का आश्वासन न मिलता देख कुछ नेताओं ने कांग्रेस तो कुछ ने अन्य दलों का दामन थामा है। हाल ही में कांग्रेस का दामन थामने वालों में इनेलो के कद्दावर नेता और पूर्व मंत्री अशोक अरोड़ा शामिल हैं। अरोड़ा इनेलो के सुख दुख के साथी रहे हैं और चौटाला परिवार के सबसे करीबी रहे हैं, लेकिन सत्ता से दूर हुए लंबा अरसा बीत चुका है।
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ऐसे में दिल पर पत्थर रख कर कांग्रेस का दामन थामना पड़ा। माना जा रहा है कि अब अरोड़ा थानेसर सीट से कांग्रेस के टिकट पर जोर आजमाइश करेंगे। इसी तरह कलायत सीट से दिग्गज जेपी को कांग्रेस में शामिल कर लिया गया है। राजनीति में कुछ भी संभव है, इस बात का प्रमाण यहां देखने को मिलता है। सुरजेवाला परिवार को पानी पी कर कोसने वाले जेपी कांग्रेसी नेता रणदीप सुरजेवाला से मतभेद भुला चुके हैं। हालांकि इस बार जेपी ने कांग्रेस भूपेंद्र सिंह हुड्डा के निमंत्रण पर ज्वाइन किया है।
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ऐसे ही एक पूर्व विधायक हैं प्रदीप चौधरी, कालका हलके से इनेलो के विधायक रहे प्रदीप चौधरी भी कांग्रेस का दामन थाम चुके हैं। चौधरी भी चौटाला परिवार के करीबियों में शुमार किए जाते हैं। अंत समय पर उन्होंने पारिवारिक लड़ाई का मिजाज भांपा और अंतत : हुड्डा के कहने पर कांग्रेस का दामन थाम लिया। माना जा रहा है अशोक अरोड़ा की भी इसमें अहम भूमिका रही है।

अभी और लंबी होगी सूची

दल बदलुओं की सूची में अभी कई और नाम शामिल होने हैं। भाजपा से जिन वर्तमान विधायकों का टिकट कटना तय माना जा रहा है। वे भी दलबदल की कोशिश कर रहे हैं। इसके अलावा अन्य पार्टियों में जो लोग यह मन बना कर आए हैं कि उनका टिकट पक्का है। ऐसे टिकट कटने पर यह लोग भी दल बदल की जुगत भिड़ाएंगे।

दल बदल के सिलसिले की शुरुआत
दल बदल की इबारत 2019 के चुनाव से पहले चौटाला परिवार में दरार पड़ने के साथ शुरू हुई। परिवार में विघटन होते ही इनेलो के कुछ विधायक पाला बदल कर इनेलो छोड़ जेजेपी में शामिल हो गए। इनेलो में विधायकों को रोके रखने के लिए अभय चौटाला ने साम, दाम, दंड, भेद सबका प्रयोग किया, लेेकिन इनेलो के विधायक धीरे-धीरे जाते रहे और अब स्थिति यह है कि इनेलो में अभय सहित मात्र तीन विधायक बचे हैं।
 
दल बदल के चलते गई अभय की कुर्सी
2014 में भाजपा सरकार बनते ही मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने 19 विधायकों के साथ जीत कर सदन में पहुंची इंडियन नेशनल लोकदल को इज्जत बख्शी और अभय चौटाला को नेता विपक्ष की कुर्सी सौंपी। यही नहीं अभय चौटाला को नेता विपक्ष के नाते विधानसभा में बैठने के लिए कमरा भी एलाट किया गया। साथ ही पुलिस सुरक्षा सहित अन्य सुविधाएं भी दी गईं, लेकिन भतीजों से लड़ाई के चलते यह कुर्सी अंत में आकर अभय चौटाला के हाथ से निकल गई।
 

दल बदल के कारण हुड्डा को मिली कुर्सी

हरियाणा विधानसभा में 2014 के विधानसभा चुनाव में पूर्व सीएम हुड्डा के साथ मात्र 15 विधायक ही सदन में पहुंचे। दस साल मुख्यमंत्री रहे हुड्डा को इस बार नेता विपक्ष की कुर्सी भी नसीब नहीं हुई, लेकिन समय का पहिया घूमा रेणुका और कुलदीप बिश्नोई ने कांग्रेस में एंट्री मारी और विधायकों की संख्या पंद्रह से 17 हो गई। इनेलो के विधायकों की संख्या घटी, अंतत : सरकार के अंतिम साल में भूपेंद्र सिंह हुड्डा के हाथ में नेता विपक्ष की कुर्सी आई और कुर्सी के साथ ही आ गई नए चुनाव की चुनौती।

भाजपा में शमिल हुए नेता
इनेलो क्या टूटी भाजपा में शामिल होने वाले विधायकों की लाइन लग गई। परमिंद्र ढुल, रविंद्र बलियाला, रामचंद कांबोज, मक्खन लाल सिंगला, रणबीर गंगवा, जाकिर हुसैन, नसीम अहमद, केहर सिंह, नगेंद्र भड़ाना और बलवान सिंह दौलतपुरिया इनेलो से पाला बदल कर भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इनेलो की पेहवा सीट से जसविंद्र संधू के निधन के बाद अब यहां चुनाव होना बाकी है। जबकि जींद से उपचुनाव में डॉ. कृष्ण मिड्ढा भाजपा के टिकट पर जीत चुके हैं।

जेजेपी में शामिल होने वाले इनेलो विधायक
परिवार में विघटन के साथ ही सबसे पहले डबवाली से विधायक नैना चौटाला अपने बेटों के साथ आईं। उसके बाद अनूप धानक, राजदीप और पिरथी सिंह भी जेजेपी का दामन थाम चुके हैं। अब अभय चौटाला के साथ वेद नारंग और ओम प्रकाश बरवा दो ही विधायक रह गए हैं।

सीएम का कहना एक अनार सौ बीमार
मुख्यमंत्री मनोहर लाल चुनावी सभाओं में टिकट के दावेदारों को पहले से ही यह कह रहे हैं कि टिकट किसी एक को मिलेगी। बाकी को टिकट मिलने वाले के साथ लगना होगा। भाजपा में इस समय एक अनार सौ बीमार वाली हालत है। ऐसे में चुनाव आते-आते कितने दावेदार भाजपा के खूंटे से बंधे रहेंगे यह कहना भी मुश्किल होगा।
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