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हरियाणा विस चुनावः कर्मचारियों ने दिखाए तल्ख तेवर, 90 हलकों में सम्मेलनों के जरिए करेंगे घेराबंदी
Mon, 23 Sep 2019 12:07 PM IST
खुशबू गोयल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, चंडीगढ़
Published by: खुशबू गोयल
Updated Mon, 23 Sep 2019 12:07 PM IST
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manohar lal khattar
- फोटो : Amar Ujala
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हरियाणा विधानसभा चुनाव का बिगुल बजते ही कर्मचारियों ने भी तेवर तल्ख कर लिए हैं। वादाखिलाफी के विरोध में कर्मचारी सभी 90 विधानसभा क्षेत्रों में कर्मचारी सम्मेलन आयोजित करेंगे। सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के बैनर तले इन स मेलनों का आयोजन होगा। स मेलनों में सरकार से 2014 के घोषणा पत्र में कर्मचारियों से किए गए वादों को पूरा न करने और नीतिगत मांगों का समाधान न होने पर जबाव मांगा जाएगा। सभी राजनीतिक दलों के प्रत्याशियों से जन सेवाओं के निजीकरण एवं कर्मचारियों की मांगों के प्रति रुख स्पष्ट करने की भी मांग की जाएगी।
सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने बताया कि कर्मचारियों को पंजाब समान वेतनमान देने, ठेका प्रथा समाप्त करने, अंकुश कर्मकारों को 15 हजार रुपए न्यूनतम वेतन, गेस्ट टीचर व सफाई कर्मचारियों सहित कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, शिशु शिक्षा भत्ते में दोगुना बढ़ोतरी, जन सेवाओं के विभागों को मजबूत करना इत्यादि वादे सरकार पूरा नहीं कर पाई है। जन सेवा के विभागों रोडवेज, शिक्षा, बिजली, स्वास्थ्य, जन स्वास्थ्य में कर्मचारियों तीखे विरोध के बावजूद निजीकरण की नीतियों को तेजी से लागू करने का काम किया गया है।
किलोमीटर स्कीम में 900 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भी सरकार स्कीम को जारी रखने पर अडिग है। दो हजार के करीब प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए गए। 400 के करीब स्कूलों में विज्ञान संकाय बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि कर्मचारी स मेलनों में इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा और जन सेवाओं एवं रोजगार की रक्षा के लिए जनमत तैयार करेंगे। बीस जुलाई को मु यमंत्री के साथ सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की मीटिंग में 24 बिंदुओं पर सहमति बनी थी, लेकिन मु य सचिव की तरफ से जारी प्रोसीडिंग में केवल 12 मांगों का ही उल्लेख है। इनमें से केवल दो ही मांगों को मानने का पत्र जारी किया गया है। कच्चे कर्मचारी पक्का न होने से खफ हैं। पुरानी पेंशन नीति बहाल नहीं की गई।
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सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा के प्रधान सुभाष लांबा व महासचिव सतीश सेठी ने बताया कि कर्मचारियों को पंजाब समान वेतनमान देने, ठेका प्रथा समाप्त करने, अंकुश कर्मकारों को 15 हजार रुपए न्यूनतम वेतन, गेस्ट टीचर व सफाई कर्मचारियों सहित कच्चे कर्मचारियों को पक्का करना, शिशु शिक्षा भत्ते में दोगुना बढ़ोतरी, जन सेवाओं के विभागों को मजबूत करना इत्यादि वादे सरकार पूरा नहीं कर पाई है। जन सेवा के विभागों रोडवेज, शिक्षा, बिजली, स्वास्थ्य, जन स्वास्थ्य में कर्मचारियों तीखे विरोध के बावजूद निजीकरण की नीतियों को तेजी से लागू करने का काम किया गया है।
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किलोमीटर स्कीम में 900 करोड़ के घोटाले का पर्दाफाश होने के बाद भी सरकार स्कीम को जारी रखने पर अडिग है। दो हजार के करीब प्राथमिक स्कूल बंद कर दिए गए। 400 के करीब स्कूलों में विज्ञान संकाय बंद कर दिया गया। उन्होंने बताया कि कर्मचारी स मेलनों में इन मुद्दों को प्रमुखता से उठाया जाएगा और जन सेवाओं एवं रोजगार की रक्षा के लिए जनमत तैयार करेंगे। बीस जुलाई को मु यमंत्री के साथ सर्व कर्मचारी संघ हरियाणा की मीटिंग में 24 बिंदुओं पर सहमति बनी थी, लेकिन मु य सचिव की तरफ से जारी प्रोसीडिंग में केवल 12 मांगों का ही उल्लेख है। इनमें से केवल दो ही मांगों को मानने का पत्र जारी किया गया है। कच्चे कर्मचारी पक्का न होने से खफ हैं। पुरानी पेंशन नीति बहाल नहीं की गई।
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